अटूट प्रेम

सुमित्रा देवी दौड़कर कमरे में आईं और अपनी बहू के कदमों के पास बैठकर उसे गले से लगा लिया। “मुझे माफ़ कर दे मेरी बच्ची। तूने आज साबित कर दिया कि माँ की ममता और एक औरत का विश्वास किसी भी विज्ञान की मोहताज नहीं होती। अब से तू नहीं, मैं तेरा पूरा ध्यान रखूंगी।” … Read more

रिश्तों की खूबसूरत डोर

उस रात कांता देवी बहुत देर तक सो नहीं पाईं। वे करवटें बदलती रहीं और पिछले एक साल का हर वो पल याद करती रहीं जब उन्होंने मीरा को बेवजह टोका था और मीरा ने बदले में सिर्फ एक शांत मुस्कान देकर बात टाल दी थी। उन्हें अहसास हुआ कि अगर मीरा चाहती तो हर … Read more

गुरु दक्षिणा

लंदन के एक प्रतिष्ठित अस्पताल से कार्डियोलॉजी में अपनी मास्टर्स की डिग्री और गोल्ड मेडल हासिल करने के बाद, जब डॉक्टर सुशांत पूरे छह साल बाद भारत लौट रहे थे, तो उनके घर में किसी बड़े त्योहार जैसा माहौल था। सुशांत की माँ, कावेरी देवी की छाती गर्व से चौड़ी हो गई थी। हो भी … Read more

रिश्तों की छांव  

“चुप कर मुर्ख!” दीदी ने माधव की बात बीच में ही काट दी। उन्होंने अपने पल्लू की गांठ खोली और उसमें से एक छोटी सी कपड़े की पोटली निकाली। वो पोटली उन्होंने माधव के हाथों में रख दी। “इसमें मेरी कुछ एफडी (Fixed Deposit) के कागज़ात हैं और मेरे कुछ पुराने गहने हैं जो मैंने … Read more

बेटियां सिर्फ़ मायके से लेने नहीं आती हैं

दोपहर के तीन बज चुके थे। रितिका ने अभी-अभी घर के सारे काम निपटाए थे और वह अपनी कमर सीधी करने के लिए बिस्तर पर लेटी ही थी कि दरवाजे की घंटी जोर से बज उठी। एक बार, दो बार और फिर लगातार बजती ही रही। ऐसा लग रहा था जैसे बाहर खड़े इंसान ने … Read more

अटूट धागा

अंजलि फूट-फूट कर रोने लगी। उसने स्नेहा को गले लगा लिया। रोहन की आँखों से भी अश्रुधारा बह निकली। स्नेहा ने रोहन का हाथ पकड़कर कहा, “भइया, दुनिया के लिए मैं कितनी भी बड़ी अफसर क्यों न बन जाऊं, लेकिन आपके बिना मेरी हर पहचान अधूरी है। मेरी शादी के मंडप में मेरा कन्यादान सिर्फ … Read more

 जीवनसाथी

कैलाश बाबू ने लैंडलाइन का रिसीवर जैसे ही क्रैडल पर रखा, उनके चेहरे पर एक पुरानी, जानी-पहचानी मुस्कान तैर गई। उनके मुंह से आदतन और बड़े ही उत्साह के साथ निकला, “अरे सावित्री, सुन रही हो? लखनऊ से अपने रमेश बाबू का फोन था, उनकी छोटी बेटी की शादी तय हो…” शब्द उनके होंठों पर … Read more

नियति

लाल जोड़े में सजी नव्या जब कार से उतरी, तो उसके कदमों में एक नई दुनिया की आहट थी। ढोल-नगाड़ों की थाप, रिश्तेदारों की भीड़ और औरतों के मंगलगीत से घर का कोना-कोना रोशनी से नहाया हुआ था। पूरे दिन की रस्मों और सफर की भारी थकान के बावजूद नव्या की आँखों में एक अजीब … Read more

मातृत्व

शहर की एक जानी-मानी एडवरटाइजिंग और डिजाइन एजेंसी की कांच वाली केबिन में आज सुबह से ही गहमागहमी का माहौल था। पच्चीस साल की नंदिनी अपने कंप्यूटर स्क्रीन पर एक डिजिटल इलस्ट्रेशन और हिंदी सुविचार वाले पोस्टर को अंतिम रूप देने में पूरी तरह से मग्न थी। उसने हल्के पीले रंग का एक सादा सा … Read more

संस्कारों की कद्र

“सुषमा जी, देखिए हमारे पंडित जी ने कहा है कि अगले महीने की पंद्रह तारीख का मुहूर्त सबसे उत्तम है। इसके बाद तो सीधा छह महीने तक कोई शुभ मुहूर्त नहीं है। हम चाहते हैं कि शादी इसी मुहूर्त में हो जाए। आखिर हमें भी तो अपने रिश्तेदारों को जवाब देना होता है।” फोन के … Read more

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