नीरजा ने बड़ी शांति से आनंद के हाथ अपने हाथों में ले लिए और हल्की सी मुस्कुराहट के साथ बोली, “शिकायत किससे करती? आपसे? मैंने आपसे प्यार किया था आनंद। प्यार में कोई शर्त नहीं होती, कोई व्यापार नहीं होता कि मैंने आपको अपना पूरा दिल दिया तो बदले में मुझे भी आपका पूरा दिल ही चाहिए। जब मैं इस घर में आई थी, तो मैंने देखा कि आप एक अच्छे बेटे हैं, एक जिम्मेदार इंसान हैं।
शाम के गहरे धुंधलके ने शहर को अपनी आगोश में ले लिया था। रिटायर्ड प्रोफेसर आनंद अपने घर की बालकनी में बैठे हुए थे। उनके हाथ में मोगरे की गजरे से सजी एक छोटी सी डिब्बी थी। हर शुक्रवार की शाम, पिछले अड़तीस सालों से, उनका यही नियम था। वे शहर के सबसे पुराने फूल वाले से ताज़ा मोगरे का गजरा लेकर आते थे। घर में घुसते ही उनकी पत्नी नीरजा हमेशा की तरह उनके लिए इलायची वाली चाय लेकर आती थीं।
नीरजा ने जैसे ही चाय का प्याला मेज पर रखा, आनंद ने वह गजरा नीरजा की ओर बढ़ा दिया और मुस्कुराते हुए कहा, “तुम्हारे जूड़े में ये मोगरा दुनिया के किसी भी गहने से ज्यादा खूबसूरत लगता है। यू आर माय लाइफ, नीरजा।”
नीरजा के चेहरे पर वही पुरानी, शांत और ठहरी हुई मुस्कान तैर गई। उसने बिना कुछ कहे गजरा लिया, उसे अपने बालों में लगाया और चुपचाप वापस भीतर चली गई।
आनंद और नीरजा की शादी को अड़तीस साल बीत चुके थे। उनके दोनों बच्चे, बेटा सुमेध और बेटी निहारिका, अब अपनी-अपनी जिंदगी में सेटल होकर विदेशों में रह रहे थे। घर में अब सिर्फ ये दो बुजुर्ग थे और उनके बीच पसरा हुआ एक लंबा, खामोश जीवन। ऊपर से देखने पर आनंद और नीरजा का जीवन किसी भी आदर्श दंपत्ति की तरह लगता था। नीरजा ने कभी आनंद से ऊँची आवाज़ में बात नहीं की थी और आनंद ने कभी नीरजा की किसी जरूरत को अनसुना नहीं किया था। लेकिन, इस शांत झील के भीतर एक ऐसा भंवर था, जिसे आनंद ने पूरी उम्र नीरजा से छुपा कर रखा था, या कम से कम उन्हें ऐसा ही लगता था।
आनंद जब जवानी के दिनों में कॉलेज में थे, तब वे अपने साथ पढ़ने वाली एक लड़की, पल्लवी से बेइंतहा मोहब्बत करते थे। पल्लवी और आनंद के बीच की दुनिया बहुत हसीन थी। पल्लवी को मोगरे के फूलों की महक बहुत पसंद थी। उसने आनंद से एक बार कहा था कि शादी के बाद उसे महंगे तोहफे नहीं चाहिए, बस हर शुक्रवार को उसके बालों के लिए मोगरे का गजरा चाहिए। आनंद ने पल्लवी से वादा किया था कि वह उम्र भर उसकी यह ख्वाहिश पूरी करेगा। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। आनंद के पिता का अचानक निधन हो गया और परिवार की जिम्मेदारियों के तले दबकर आनंद को अपने घर वालों की मर्जी से नीरजा से शादी करनी पड़ी। पल्लवी हमेशा-हमेशा के लिए आनंद की जिंदगी से दूर चली गई, लेकिन आनंद के मन के किसी कोने में वह हमेशा ज़िंदा रही।
शादी के बाद आनंद ने नीरजा को अपनी पत्नी तो मान लिया, लेकिन वह कभी पल्लवी को भूल नहीं पाए। अपने अपराधबोध और पल्लवी की यादों को ज़िंदा रखने के लिए, आनंद ने नीरजा को ही पल्लवी का अक्स मान लिया। नीरजा को नीले रंग की साड़ियां कभी खास पसंद नहीं थीं, लेकिन क्योंकि पल्लवी को नीला रंग पसंद था, आनंद अक्सर नीरजा के लिए नीली साड़ियां ही लाते थे। नीरजा ने भी बिना कोई सवाल किए उन्हें पहनना शुरू कर दिया। और फिर वह मोगरे का गजरा… आनंद हर शुक्रवार गजरा लाते और नीरजा उसे अपने बालों में सजा लेती। आनंद जब नीरजा के बालों में मोगरा देखते, तो उन्हें कुछ पल के लिए लगता जैसे पल्लवी उनके पास है।
सालों बीत गए। नीरजा ने अपना पूरा जीवन आनंद, उनके परिवार और बच्चों को संवारने में लगा दिया। उसने एक कुशल गृहिणी, एक समर्पित बहू और एक ममतामयी माँ का हर फर्ज़ निभाया। उसने आनंद की हर पसंद को अपनी पसंद बना लिया था।
एक दिन दोपहर के समय नीरजा किसी काम से पड़ोस में गई हुई थी। घर में अकेले आनंद अपनी एक पुरानी फाइल ढूंढ रहे थे, जो शायद अलमारी के सबसे ऊपरी हिस्से में रखे एक पुराने ट्रंक में थी। ट्रंक खोलते हुए आनंद के हाथ में एक पुरानी, भूरे रंग की डायरी लग गई। यह नीरजा की डायरी थी। आनंद ने कभी नीरजा की निजी चीजों में तांक-झांक नहीं की थी, लेकिन उस दिन न जाने क्यों उनके हाथ रुक गए। डायरी के पन्ने बहुत पुराने हो चुके थे। आनंद ने यूँ ही एक पन्ना पलट दिया।
उस पन्ने पर आज से करीब बीस साल पुरानी तारीख डली हुई थी और पन्ने के बीचों-बीच मोगरे का एक सूखा हुआ फूल रखा था। पन्ने पर नीरजा की सुंदर लिखावट में कुछ लिखा हुआ था। आनंद पढ़ने लगे:
“आज फिर शुक्रवार है। आज फिर वे मोगरे का गजरा लेकर आए। जब वे मुझे गजरा देते हैं और कहते हैं कि मैं उनकी जिंदगी हूँ, तो उनकी आँखों में एक अजीब सी उदासी होती है। एक ऐसी तलाश, जो मुझ पर आकर खत्म नहीं होती। शादी के शुरुआती सालों में ही मुझे उनकी पुरानी किताबों के बीच पल्लवी का वह खत मिल गया था, जिसमें मोगरे का जिक्र था। मैं जानती हूँ कि ये फूल मेरे लिए नहीं आते, ये उस याद के लिए आते हैं जो उनके दिल में आज भी महकती है। मुझे पता है कि जब वे मुझे नीली साड़ी में देखते हैं, तो वे मुझे नहीं, किसी और को तलाश रहे होते हैं। शुरू में बहुत दर्द होता था, रातों को अकेले रोती थी, लेकिन फिर मैंने सोचा कि अगर मेरे इस छोटे से झूठ को सच मानकर उन्हें खुशी मिलती है, तो मैं उनके लिए इतना तो कर ही सकती हूँ। आखिर प्यार का मतलब सिर्फ पाना तो नहीं होता। मैं उनके वर्तमान में हूँ, यही काफी है। मैं ताउम्र उनके लिए पल्लवी की परछाईं बनने को तैयार हूँ, क्योंकि मैं आनंद से प्यार करती हूँ।”
डायरी के पन्ने पर लिखे उन शब्दों ने आनंद के पैरों तले जमीन खिसका दी। उनके हाथों से डायरी छूटकर जमीन पर गिर गई। अड़तीस साल का उनका वहम, उनका भ्रम एक झटके में टूट गया था। आनंद को लगा जैसे किसी ने उनके सीने पर कोई भारी पत्थर रख दिया हो। उनकी आँखों से आँसुओं की धारा बहने लगी। वे जिस औरत को सिर्फ एक भोली-भाली पत्नी समझते रहे, वह असल में त्याग और प्रेम की कितनी बड़ी मूरत थी!
आनंद को अपने आप से घिन आने लगी। उन्होंने एक ऐसी औरत के साथ छल किया था, जिसने अपनी पूरी उम्र उनके नाम कर दी थी। वे जीवन भर पल्लवी की यादों का बोझ ढोते रहे और कभी यह देख ही नहीं पाए कि जो नीरजा उनके सामने खड़ी है, उसने उनका घर बसाने के लिए, उनके बच्चों को पालने के लिए अपने वजूद तक को मिटा दिया था। उन्होंने नीरजा को कभी वह प्यार दिया ही नहीं, जिसकी वह हकदार थी। वे हमेशा एक भ्रम में जीते रहे।
तभी दरवाजे पर आहट हुई और नीरजा अंदर आई। आनंद को जमीन पर बैठकर रोते हुए और पास पड़ी खुली डायरी को देखकर वह सब कुछ समझ गई। नीरजा चुपचाप आई और आनंद के पास फर्श पर बैठ गई। उसने अपने कोमल हाथों से आनंद के आँसू पोंछे।
“नीरजा…” आनंद का गला रुंधा हुआ था। “मुझे कभी माफ मत करना। मैं एक बहुत बुरा इंसान हूँ। मैंने तुम्हारे साथ बहुत बड़ा धोखा किया है। मैं पूरी जिंदगी एक भ्रम के पीछे भागता रहा और उस हीरे को नहीं पहचान पाया जो मेरे पास था। तुमने सब कुछ जानते हुए भी इतने सालों तक यह सब कैसे बर्दाश्त किया? तुमने मुझसे नफरत क्यों नहीं की? मुझसे शिकायत क्यों नहीं की?”
नीरजा ने बड़ी शांति से आनंद के हाथ अपने हाथों में ले लिए और हल्की सी मुस्कुराहट के साथ बोली, “शिकायत किससे करती? आपसे? मैंने आपसे प्यार किया था आनंद। प्यार में कोई शर्त नहीं होती, कोई व्यापार नहीं होता कि मैंने आपको अपना पूरा दिल दिया तो बदले में मुझे भी आपका पूरा दिल ही चाहिए। जब मैं इस घर में आई थी, तो मैंने देखा कि आप एक अच्छे बेटे हैं, एक जिम्मेदार इंसान हैं। मुझे लगा कि जो इंसान किसी की यादों से इतना सच्चा प्यार कर सकता है, वह इंसान अंदर से कितना निर्मल होगा। मेरी लड़ाई किसी इंसान से नहीं थी, एक याद से थी। और यादों से कभी लड़ा नहीं जाता, उन्हें बस समय के साथ बहने दिया जाता है।”
“लेकिन मैंने तुम्हें कभी वो जगह नहीं दी, जो एक पत्नी को मिलनी चाहिए…” आनंद फफक कर रो पड़े।
“किसने कहा?” नीरजा ने उनकी आँखों में देखते हुए कहा। “जब बच्चे बीमार पड़ते थे, तो रात-रात भर मेरे साथ कौन जागता था? जब मेरी तबीयत खराब होती थी, तो रसोई में जाकर मेरे लिए खिचड़ी कौन बनाता था? जब मैं उदास होती थी, तो मुझे हंसाने की कोशिश कौन करता था? क्या वो पल्लवी के लिए था? नहीं आनंद, वो मेरे लिए था। आपका एक हिस्सा भले ही अतीत में था, लेकिन आपका वर्तमान, आपका जीवन, आपका समर्पण हमेशा मेरे साथ था। आपने शायद महसूस नहीं किया, लेकिन इतने सालों में आप कब पूरी तरह से मेरे हो गए, यह आपको खुद भी नहीं पता चला।”
आनंद ने नीरजा की आँखों में देखा। उन आँखों में कोई शिकायत नहीं थी, कोई गिला नहीं था, बस असीम प्रेम और संतोष था। आनंद को उस दिन पहली बार अपनी पत्नी की असली खूबसूरती नजर आई। वह खूबसूरती जो नीली साड़ी या मोगरे के फूलों की मोहताज नहीं थी।
“मैं तुम्हारा बहुत बड़ा गुनहगार हूँ नीरजा। लेकिन आज, इस पल से मैं सिर्फ और सिर्फ तुम्हारा हूँ। आज मेरे अंदर से अतीत की वह आखिरी परछाईं भी हमेशा के लिए विदा हो गई है। मुझे माफ कर दो, मुझे अपने प्यार के लायक बना लो।” आनंद ने नीरजा के दोनों हाथों को चूमते हुए कहा।
उस शाम घर में एक अजीब सा सुकून था। एक ऐसा सुकून जो किसी तूफान के गुजर जाने के बाद आता है।
अगली शाम शुक्रवार की थी। नीरजा जब शाम को रसोई से चाय लेकर बालकनी में आई, तो आनंद वहां बैठे थे। लेकिन आज उनके हाथों में मोगरे का कोई गजरा नहीं था। आज उनके हाथों में एक लाल गुलाब था।
नीरजा ने हैरानी से गुलाब की तरफ देखा।
आनंद ने अपनी जगह से उठकर नीरजा के बालों में से वह पुराना क्लिप निकाला और उसके जूड़े में वह लाल गुलाब लगा दिया।
“आज मोगरा नहीं?” नीरजा ने मुस्कुराते हुए पूछा।
“नहीं,” आनंद ने नीरजा की आँखों में गहराई से देखते हुए कहा, “मोगरा एक ख्वाब था, जो कब का टूट गया। यह गुलाब हकीकत है, जो आज भी मेरे सामने महक रही है। यह गुलाब मेरी नीरजा के लिए है। आई लव यू, नीरजा। सिर्फ और सिर्फ तुम्हें।”
नीरजा की आँखों से छलक आए खुशी के आँसुओं ने आनंद के इस इकरार को हमेशा के लिए अपने दिल में सहेज लिया। उस दिन के बाद से उनके घर में कभी मोगरे की महक नहीं आई, लेकिन उनके जीवन में प्यार की जो असली महक घुली, उसने उनके बाकी बचे हुए जीवन को स्वर्ग से भी सुंदर बना दिया।
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