माँ से जुड़ाव – अंजु गुप्ता ‘अक्षरा’
विनय और तनवी एक दूसरे के पूरक थे। घर में अगर किसी बात पर अंतिम मुहर लगती तो वह विनय की होती—और तनवी वह मुहर बिना शिकायत, बिना बहस, बिना “क्यों” पूछे स्वीकार कर लेती। क्या मजाल कि बिन अपने पापा की मर्जी के खिलाफ तनवी कोई तिनका भी उठा ले। वह कभी अपनी पसंद … Read more