तीसरा हिस्सा
शहर के सबसे पॉश इलाके में बना ‘आशीर्वाद’ भवन बाहर से जितना आलीशान और शांत दिखता था, अंदर से उसमें उतनी ही अशांति और कलह मची रहती थी। सेठ रामनारायण जी के देहांत को अभी मुश्किल से दो साल ही बीते थे, लेकिन इस छोटे से अंतराल में ही उस घर की पूरी तस्वीर बदल … Read more