एक भटके हुए मन की वापसी – शारदा सक्सेना
यह सुनकर कबीर आगबबूला हो गया। “तुम क्या बकवास कर रही हो?” “सच कह रही हूँ,” श्रुति ने अपनी बात जारी रखी। “तुम जिसे प्यार कहते हो, वो शायद तुम्हारी जिद थी। प्यार में इंसान आज़ाद करता है, कैद नहीं। और वैसे भी कबीर, अगर तुम खुश नहीं हो, तो किसी और की खुशी की … Read more