आग(स्वतंत्र) – परमा दत्त झा : Moral Stories in Hindi
बाबूजी आप देखकर नहीं चल सकते क्या?-बहू घर में आते ही चिल्लाते हुए बोली। क्यों क्या हुआ?-वे सहज भाव से पूछे। अभी पोंछा लगाया था,अभी सारा काम फिर से करना होगा। -अच्छा,वे बात को विराम देते हुए बोले। अचानक हुए हमले से वे चौंक गये ।अब मैं परिचय दे दूं। श्वसुर हैं डाक्टर योगेश जो … Read more