विश्वास की डोर मजबूत होती है – विनीता सिंह
मुंबई की बारिश भारी हो रही थी। लोकल ट्रेन की खिड़की से पानी की बूंदें तेजी से सरक रही थीं, जैसे शहर की भागदौड़ को धोना चाहती हों। आरव खिड़की के पास बैठा था, आंखें सूनी। उसके बगल में सोनू सो रहा था, सिर कंधे पर टिका हुआ। दोनों बचपन के दोस्त थे, धारावी की … Read more