दर्द जब दवा बन जाए – शुभ्रा बैनर्जी
“अरे मम्मी,इतना बड़ा कट लग गया है चाकू से।खून भी बहुत बह रहा है।तुम छोड़ो ये सब।मैं कर लूंगी।बैन्ड एड लगा लो चलो।” रिद्धि(बेटी) लगभग चीखते हुए बोली।रमा ने हंसकर कहा”अरे,इतना भी गहरा घाव नहीं हुआ है रे।मैं चूना और हल्दी लगा लेती हूं,अभी खून रुक जाएगा।तू इतना घबरा मत।चिल्लाना बन्द कर।” “अच्छा,घाव ज्यादा नहीं … Read more