दर्द जब दवा बन जाए – शुभ्रा बैनर्जी

“अरे मम्मी,इतना बड़ा कट लग गया है चाकू से।खून भी बहुत बह रहा है।तुम छोड़ो ये सब।मैं कर लूंगी।बैन्ड एड लगा लो चलो।” रिद्धि(बेटी) लगभग चीखते हुए बोली।रमा ने हंसकर कहा”अरे,इतना भी गहरा घाव नहीं हुआ है रे।मैं चूना और हल्दी लगा लेती हूं,अभी खून रुक जाएगा।तू इतना घबरा मत।चिल्लाना बन्द कर।”  “अच्छा,घाव ज्यादा नहीं … Read more

दर्द – सुनीता मलिक सोलंकी

“तुमसे मिलना मेरी ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत दर्द है, कबीर।”आराधना  ने ये बात उस दिन कही थी, जिस दिन कबीर ने पहली बार उसका हाथ थामा था। मरीन ड्राइव पर समंदर की लहरें किनारे से टकरा रही थीं, और आराधना की आँखें कबीर के चेहरे पर टिकी थीं। कबीर हँस पड़ा था — “दर्द खूबसूरत … Read more

*दर्द* – तोषिका

ये जो तुमने मुझे *दर्द* दिया है ना, मैं इसको कभी भी नहीं भूलूंगी। रोती हुई स्नेहा ने अपने भाई विजय को बोला। *कुछ साल पहले* स्नेहा अपने पूरे परिवार के साथ रहती थी और बहुत ही संस्कारी भी थी, दूसरी तरफ उसका छोटा भाई विजय मस्तीखोर था लेकिन पढ़ाई में भी अच्छा था। दोनों … Read more

“भाई मैं तेरी तरह स्वार्थी नहीं हूं” – सुनीता मलिक सोलंकी 

बागपत  की एक तंग सी गली में दो भाई रहते थे — बड़ा भाई मुकेश और छोटा अनिल । उम्र में पाँच साल का फासला, पर सोच में ज़मीन-आसमान का। उनके पिता जी की परचून की दुकान थी । पिता के बाद  मुकेश ने दुकान संभाल ली। अनिल पढ़ने में तेज़ था, सो पढ़ाई कर  … Read more

दर्द – मधु वशिष्ठ

बहुत समय बाद हैदराबाद में जब दोनों सहेलियां मिलीं तो उनकी बातें ,हंसी ,खुशी कुछ भी खत्म होने का नाम नहीं ले रही थी।  बहुत समय बाद मिली थी इसलिए अपने सारे दर्द और खुशियां भी साझा कर रही थी।  डोमिनोस में जाने वह कब से बैठी थीं तभी हंसते हुए मीनल ने राखी से … Read more

कशमकश – प्रतिमा श्रीवास्तव

लड़कियों की उम्र गुजर जाती है दो घरों को आपस में बांधने की लेकिन सच कहूं तो वही घर हमेशा की तरह इतिहास दोहराते हुए प्रश्न पूछ ही बैठता है कि आखिर कौन से घर को वो अपना कहें? एक मायका जहां के आंगन के हर कोनों में उसकी मौजूदगी दर्ज है,दूसरा ससुराल जहां वो … Read more

असहनीय दर्द – गीता वाधवानी

 पल्लवी नींद में चिल्ला रही थी” छोड़ो मुझे, अंकल ऐसा मत करो, मुझे छोड़ो। ”   उसका पति आकाश हैरान परेशान था। उसकी कल ही पल्लवी से शादी हुई थी और आज वह नींद में चिल्ला रही थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्यों चिल्ला रही है। उसने झकझोर कर पल्लवी को जगा … Read more

दर्द – डाॅ संजु झा

 मनुष्य के जीवन में सुख-दुख का मेला लगा ही रहता है।नियति के खेल निराले हैं, उसमें कभी तो सुखों की बरसात होती है और कभी दर्द के काले बादल  उसकी जिंदगी में अंधेरा कर जाते हैं । फिर अचानक से उसकी जिंदगी के आसमान में बिजली चमककर एक नया रास्ता भी दिखा देती है। बारह … Read more

आखिरी फोन कॉल – लतिका श्रीवास्तव

पैर पत्थर से टकराया और दर्द की एक तीखी लहर रमिया के शरीर में दौड़ गई। वह लड़खड़ाकर सड़क किनारे बैठ गई। घुटने से रिसते खून को देखकर उसने अनायास ही एक फीकी मुस्कान भर दी। “इतना दर्द तो नहीं था…” उसने मन ही मन सोचा। दर्द की असली परिभाषा तो उसे उस आखिरी फोन … Read more

ख्वाहिश का दर्द – अंजना ठाकुर

सुनो जी इस बार मेरी बहन गुजरात घूमने जाने का प्रोग्राम बना रही मुझे द्वारकाधीश के दर्शन करने का बड़ा मन है मुझसे भी पूछ रही इस बार हम चलें क्या नीलम ने डरते -डरते अपने पति गिरीश से पूछा ‘हर बार की तरह गिरीश का बही जवाब, अभी पहले घर की जिम्मेदारी तो पूरी … Read more

error: Content is protected !!