ये जो तुमने मुझे *दर्द* दिया है ना, मैं इसको कभी भी नहीं भूलूंगी। रोती हुई स्नेहा ने अपने भाई विजय को बोला।
*कुछ साल पहले*
स्नेहा अपने पूरे परिवार के साथ रहती थी और बहुत ही संस्कारी भी थी, दूसरी तरफ उसका छोटा भाई विजय मस्तीखोर था लेकिन पढ़ाई में भी अच्छा था। दोनों में अनबन चलना आम बात थी पर दोनों एक दूसरे के बिना रह भी नहीं सकते थे। अगर मां विजय को डांट रही होती थी तो स्नेहा उसको बचाने आ जाती थी
या फिर जब स्नेहा को किसी बात पर बोला जा रहा हो तो विजय बात संभाल लेता था। बढ़ती उम्र के साथ स्नेहा की भी शादी की उम्र हो गई थी। विजय उधर अभी कॉलेज ही कर रहा था। स्नेहा की शादी एक बड़े एन आर आई से पक्की कर दी।
शादी में स्नेहा की विदाई की वक़्त पहली बार विजय सबके सामने अपनी बहन के गले लग कर रोया और रोते हुए बोला “दीदी….दीदी अपना ध्यान रखना और कभी भी कोई दिक्कत या परेशानी आई तो मैं हू यहां पर।” स्नेहा की आँखें भी नम सी हो गई पर अपने आप को संभालती हुई बोली “चल हट, मैं तेरी बड़ी बहन हू, तू मेरा ध्यान रखेगा?
या फिर मैं?” विजय बोला “अब मैं भी कॉलेज आ गया हू, मैं अपने साथ साथ आपका भी और पूरे परिवार का ध्यान रख सकता हू।” तभी उन दोनों की मां बोली “बस बस, ये सब बातें बाद में करना। स्नेहा के ससुराल वाले भी उसकी राह देख रहे होंगे।”
उधर विदाई हुई और समय कब बड़ा पता ही नहीं चला और स्नेहा की दूसरी सालगिरा भी आ गई थी और वो अब गर्भवती भी थी। दूसरी तरफ विजय की भी नौकरी लग गई थी।
पहले जैसे बात होती थी दोनों भाई बहन में अब वो कम हो गई थी और कुछ समय से तो ना के बराबर ही हो गई थी।
उधर स्नेहा के घरवाले भी ज़्यादा बात नहीं करते थे।
ऐसे ही चला और समय का चक्र आगे बढ़ा और अब स्नेहा की गोदभराई का दिन भी पास था।
उसने खासतौर पर विजय को न्यौता दिया आखिर वो अब मामा जो बनने वाला था।
*गोदभराई वाला दिन*
सब कुछ त्यार था और स्नेहा भी त्यार हो कर आ गई थी। थोड़ी देर बाद उसके घर वाले भी आ गए पर विजय कही दिख नहीं रहा था। स्नेहा का ऐसा मायूस सा चेहरा देख कर उसकी मां बोली “बेटा, विजय बस थोड़ी देर में आ रहा है। कुछ काम आ गया था बस वो खत्म करके आता ही होगा।”
स्नेहा ने बोला ” आज के दिन भी काम? ऐसा कौनसा काम है कि वो आज के दिन भी नहीं छोड़ सकता था?”
उसकी मां ने बात टाल दी ये कहके कि कुछ होगा उसके दफ्तर का काम। स्नेहा को कुछ अजीब लगा पर तभी वहां पर विजय आ गया तो उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया।
विजय को देखते ही स्नेहा बोली “अरे, तू आ गया। कितना पतला हो गया है तू, अच्छे से खाता पीता नहीं है क्या?”
विजय ने अपनी बहन का हाथ पकड़ते हुए कहा “बस काम के चक्कर में हो गया हूँगा। तुम मेरी फिक्र मत करो और फिर हस्ते हुए बोला अपना और मेरी होने वाला भांजे का ध्यान रखो।”
स्नेहा मुस्कुराई और बोली “तुम्हे कैसे पता कि बेटा ही होगा?”
विजय बोला “मुझे सब पता है।”
तभी स्नेहा की सास ने बोला “चलो बेटा आजाओ, फंक्शन शुरू करते है।”
सब कुछ बड़े धूम धाम से हो रहा था और विजय अपनी बहन को मुस्कुराकर देख रहा था कि अचानक ने उसकी आंखों के आगे सब धुंधला सा हुआ और वो बेहोश हो गया।
स्नेहा ये सब देख हैरान हो गई और जल्द से जल्द हॉस्पिटल के लिए गाड़ी निकलने को बोली, उसकी मां ने उसको आराम करने को कहा लेकिन वो फिर भी नहीं मानी और उनके साथ हॉस्पिटल गई।
हॉस्पिटल आने के बाद डॉक्टर ने उसकी रिपोर्ट मांगी और तभी ही उसकी मां ने रिपोर्ट दी। स्नेहा ये सब देख कर कुछ नहीं समझ पा रही थी कि ये सब क्या हो रहा है। उसने अपनी मां से पूछा “मां, विजय को क्या हुआ है? आप ये कोनसी रिपोर्ट्स दे रहे थे डॉक्टर को?” स्नेहा के मन में कई सवाल थे, उसको समझ नहीं आ रहा थी कहा से वो शुरू करे। तभी उसकी मां ने बोला “बेटा, इतनी टेंशन मत ले, ये तेरे और तेरे होने वाले बच्चे के लिए ठीक नहीं है और जब ये विजय को पता चलेगा तो उसे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगेगा”।
उसकी मां ने स्नेहा को पानी दिया और सब कुछ बताया कि विजय की कुछ महीनों पहले से तबियत खराब हो रही थी, तो जब डॉक्टर को दिखाया तो पता चला कि उसको ब्रेन ट्यूमर है और काफी गंभीर है, और उसके पास ज्यादा समय नहीं बचा है।
स्नेहा ये सुनते ही मैं हो गई और अपना होश खो बैठी बस उसकी आंख से अश्रु बह रहे थे।
उसने बस एक सवाल पूछा “मां, इतनी बड़ी बात हो गई और आपने मुझे बताना भी जरूरी नहीं समझा।”
उसकी मां बोली “हम तुझे बताना चाहते थे, पर विजय तुझे परेशान नहीं करना चाहता था, इसीलिए उसने हमें तुझे ये सब बताने के लिए मना किया था। आज भी वो अपना चेकअप ही करने गया था।”
स्नेहा ने अपनी मां को गले लगा दिया और रोटी रही और फिर वार्ड के दरवाजे के पास आकर बोली “ये जो तुमने मुझे दर्द दिया है ना, मैं इसको कभी नहीं भूलूंगी। और अचानक से स्नेहा के पेट में दर्द हुआ, उसक8 मा ने डॉक्टर को बुलाया।
डॉक्टरों ने बोला “जल्दी से इसे लेकर चलो, हमे अभी इसका ऑपरेशन करना होगा, वरना दोनों मां और बच्चे की जान को खतरा हो सकता है।”
स्नेहा को ड्रिप लगाई गई और सही समय पर दोनों की जान बचाई और स्नेहा को लड़का हुआ, जैसे ही स्नेहा का बेटा रोया उधर डॉक्टरों ने विजय को मृत घोषित कर दिया। स्नेहा को जब होश आया तो उसकी मां ने उसको सब बताया और बोला “फिक्र मत के बेटा, विजय तेरे पास ही आया वो भी तेरे बेटे के रूप में।”
स्नेहा रोयी और अपने बेटे को हाथों में लेकर बोली “मेरा, विजय।”
लेखिका
तोषिका