बस, अब बहुत हो गया मम्मी जी – मंजू ओमर

अरे कुछ ना पूछो कमला बहू एक नंबर की कामचोर है काम करने में तो उसका मन ही नहीं लगता। बस जी चुराती रहती है हर काम को,,जरा मौका लगा नहीं की बस कमरे में बैठ जाती है जाकर। अच्छा भाभी जी मुझे तो पता था कि आपकी बहू खूब अच्छे से काम संभालती है घर गृहस्ती का।

अरे कहां रे कमला मैं तो एक गरीब घर की बहू लाई थी कि अच्छे से  घर संभालेगी ,और पूरी तरह काम की जिम्मेदारी लेगी । और सास ससुर नंद की अच्छे से देखभाल करेगी। और हमारी सेवा भी । लेकिन कुछ नहीं मैं तो ऐसे परिवार में शादी करके बहुत पछता रही हूं ।

और ना ही कुछ दहेज ही मिला। बस थोड़ा देखने सुनने में ही ठीक थी । मां बाप ने कोई तौर और तरीका सिखाया ही नहीं। और तभी बहू करूणा चाय नाश्ता लेकर आ गई ,क्योंकि सास से मिलने  दूर की ननद आई हुई थी । और बहू घर को अच्छे से संभालती है कि नहीं । हां बुआ जी ।

सास की सेवा हां बुआ जी सभी का काम करती हूं। लेकिन तेरी सास तो कह रही है तो बहुत कामचोर है। काम से बहुत जी चुराती है और कभी सास की सेवा नहीं करती। अच्छा तभी करूंणा बोल पड़ी मां जी बस ,अब बहुत हो गया अब बस करिए मेरी सबसे बुराई करना। 

               सब कुछ तो करती हूं इस घर के लिए और अब क्या करने लगूँ। और बुआ जी चार चार लोगों का काम मेरे सिर पर है चार लोग मम्मी पापा नंद और देवर और दो लोग हम लोग सारा काम अकेले ही करती हूँ।

कोई भी हाथ नहीं लगता यहां तक की दिनभर  नन्द नमिता  बैठी रहती है वह भी किसी काम में हाथ नहीं लगती। माँ जी को तो छोडिये।। आखिर मेरी शादी से पहले सब काम करते होंगे ना लेकिन अब नहीं । जैसे उसे घर की बहू नहीं फुल टाइम नौकरानी मिल गई है। 

                और ऐ क्या  माँ जी दिन भर दहेज न मिलने का रोना रोती रहती है। आज तो करूंणा सब कुछ बोल देने पर उतारू थी। आपको तो पहले से ही पता था कि मेरे पापा के पास पैसे नहीं है। वह बस अपनी तीनों बेटियों को अच्छा पढ़ाया लिखाया है बस।

हां जरूरत भर की शादी में खर्च भी किया है। लेकिन यह कहो कि दहेज के नाम पर आप लोगों की मनमानी नहीं की है। यह बात मेरे पापा ने आप लोगों को पहले ही बता दी थी। फिर भी आप शादी करने को तैयार थी। लेकिन अब क्यों हर वक्त दहेज का ताना दिया जाता है। 

                  मैं बहुत दिनों से देख  और सुन रही हूं कि जो भी घर में आता है, या फोन पर किसी को बात होती है तो आप बस काम का रोना रोती रहती है। अब घर में जब आप काम नहीं करती नमिता नहीं करती तो घर के सारे काम होते कैसे है। वह कौन करता है। अब बस भी करिए आप सबसे हमारी बुराइयां करना ।

मैं अपने खिलाफ अब कुछ भी नहीं सुनूगी।बुआ जी और सास मीरा जी के मुंह खुले के खुले रह गए।पहले तो ऐसा कभी नहीं जवाब दिया था  करूंणा ने।और आप सोच रही होगी क्या हो गया है करूणा को।तो सुन लीजिए मैं बहुत दिनों से चुप थी आपकी बात सुन रही थी।

हर किसी से अपनी बुराई सुन रही थी। लेकिन अब नहीं अब मैं कुछ भी नहीं सुनूंगी। और हां आज से मैं कोई भी काम नहीं करूंगी। आपकी बात नहीं सुनेंगे समझी आप । मीरा जी आज करूणा का यह रूप देखकर दंग थी। और सोच रही थी गरीब परिवार की लड़की है चाहे जैसे दबाकर रखो कुछ नहीं करेगी। मायके भी नहीं जा सकती बाप के रखने की औकात नहीं है । लेकिन नहीं यह तो आज शेर की तरह दहाड रही है। 

              2 साल पहले करूंणा और पंकज की शादी हुई थी। करूंणा देखने सुनने में अच्छी और पढ़ी लिखी थी। मीरा जी को अपनी बेटे पंकज के लिए करूंणा पसंद आ गई थी। लेकिन एक समस्या थी करूंणा कि पापा बहुत सारा दहेज नहीं दे सकते थे । क्योंकि उनकी इतनी हैसियत ही नहीं थी। 

जो भी उनकी बेटी को पसंद करता था उसे वह कह देते थे कि हम देखो बहुत सारा दहेज नहीं दे सकते। जो कुछ भी है वह हमारी बेटी है। पढ़ी लिखी सुंदर और सुशील संस्कारी है मेरी बेटी, जिस घर जाएगी स्वर्ग बना देगी।मैं और मेरी पत्नी ने तीनों बेटियों को अच्छे संस्कार दिए हैं। 

              यहां पंकज और उसके पिता गोपाल दास जी का मोटर पार्ट्स का बिजनेस अच्छा खासा बिजनेस था। । घर में किसी चीज की कमी नहीं थी ।पंकज और बेटी नमिता और एक छोटा भाई करण था । करुणा को देखकर मीरा का मन बहू बनने को मचल गया ।

लेकिन एक समस्या थी करूणा के यहाँ से दहेज की कोई संभावना नही थी।फिर मीरा को गोपाल जी ने समझाया अरे क्या करना दहेज का सब कुछ तो है हमारे घर में।

लड़की अच्छी है सामान्य परिवार से है तो घर में अच्छे से रहेगी। नहीं तो आजकल घर-घर बहुओं का तमाशा तो तुम देख रही हो । मीरा जी को भी समझ आ गई थी लड़की दब कर रहेगी तो पंकज और करूंणा की शादी हो गई। 

               करूंणा ससुराल आ गई । घर में मीरा जी काम संभालती थी, और करुणा देखती थी की नंद नमिता भी मम्मी की मदद करती थी। घर में झाड़ू पोछा बर्तन को काम वाली आती थी। शादी के 15 दिन बाद ही मीरा ने रसोई की जिम्मेदारी करुणा को पूरी तरह सौंप दी, और बोली बहू अब घर के खाने पीने की जिम्मेदारी तुम्हारी।

बहू के आ  जाने पर भी सास काम करें तो यह मेरी तोहीन होगी ना । तुम सब काम संभालोगे ना। हां माँ जी फिर क्या था, सास नंद बस बैठ गई सारा दिन आराम करती और हुकुम चलाती।करूंणा दौड दौड कर सब काम करती ।सबकी जरूरत समय से पूरी करने की कोशिश करती ।

जिसे सभी लोग खुश रहे । काम करते देखकर गोपाल दास पत्नी से बोले भाग्यवान तुमने तो सारा काम बहू पर ही छोड़ दिया है अकेली जुटी रहती है वह। तुम लोग मां बिटिया बस बैठे-बैठे हुकूम चलाती रहती हो । ऐसा तो ठीक नहीं है । आप चुप रहिए जी यह घर का मामला है और घर के मामले में आप लोगों को बोलने की कोई जरूरत नहीं है। 

            शादी के 4 महीने बीत गए इस बीच करूंणा  सिर्फ एक बार ही मायके गई थी ।वो जब भी पूछती जाने के लिए उसको मना कर दिया जाता । आज उसकी मम्मी पापा से मिलने का बहुत मन कर रहा था। करूंणा ने मीरा से कहा माँ जी दो चार दिन को मायके जाना चाहती हूं, बहुत दिन हो गए मम्मी पापा से मिले हुए।

अरे अभी तो गई थी मीरा ने कहा। अरे मम्मी शादी के बाद में सिर्फ एक बार ही मायके गई हूं। तो क्या हुआ रोज रोज मायके जाना अच्छी बात नहीं है । अब ये ही तुम्हारा घर है ,और फिर तुम चली जाओगे तो घर पर काम कैसे होगा । काम का क्या मम्मी जी वह तो आप मेरी शादी से पहले भी तो करती थी ।

आप और नमिता मिलकर संभाल लेना चार-पांच दिन की ही तो बात है । नहीं मुझसे  ना होगा अब यह काम । अभी जाना कैंसिल करो करूंणा अपना सा मुंह लेकर रह गई। 

                 इस बात को बीते महीना भर हो गया। । एक दिन करूंणा को पता लगा की मम्मी की तबीयत खराब है। तो घर में पर जाने की बात करने लगी । तो फिर जाने को मना कर दिया। अब करूंणा को बहुत गुस्सा आया और वह सारा काम छोड़कर कमरे में जाकर लेट गई। घर मे खाना पीना बनता न देखकर मीरा जी फिर कमरे मे आकर करूंणा को बातें सुनाने लगी । यह गुस्सा किसको दिखा रही हो खाना नहीं बनेगा क्या।

कामचोरी न दिखाओ और उठो और काम करो। जब देखो तब मां के जाने की जिद करती रहती है। एक तो कुछ लेकर भी नहीं आई शादी में और यहां सब कुछ मिल रहा है तो नखरे दिखा रही हैअभी कुछ दिन माँ बाप के घर रहना पडे तो सब समझ आ जाएगा।यहाँ के सुख सुविधा याद आने लगेगें समझी। 

         आज करूंणा ने  अपनी जुबान खोल ही दी । अब बस कर दो मम्मी जी मैं कुछ बोलती नहीं तो आप  सुनाती ही जाती है । क्या  शादी हो गई है तो क्या मैं अपनी मम्मी पापा को छोड़ दूं क्या । बस अब बहुत हो गया उस दिन आप बुआ जी के सामने भी मेरे बारे में बोले जा रही थी।

गरीब परिवार से हूँ। मेरे पापा ने पहले ही कहा था कि मैं दहेज नहीं दे पाऊंगा । फिर अब मैं क्यों ताना मारा जा रहा है । देखिए मेरे माँ  बाप ने ऐसे संस्कार मुझको नहीं दिए है कि मैं बड़ों का अपमान करूं, लेकिन अब जबकि बहुत हो गया है तो मुझे बोलना पड़ रहा है । और हां यह घर का काम आप देखें मैं तो अपने मम्मी पापा से मिलने जा रही हूं। और अब मैं तभी आऊंगी जब आप सब लोग मेरी काम में मदद करेंगे। और करूंणा चली गई मायके मीरा देखती ही रह गई

           गोपाल जी जब दुकान से आज तो घर मे सन्नाटा छाया था। पूछा तो सारा माजरा समझ आया‌। गोपाल जी बोले देखो मै तो तुम लोगो से पहले से ही कह रहा था ऐसा ं करो बहू के साथ। पर मेरी बात मीरा तुमने नही सुनी। हर समय बहू की ही गलती नही होती, कहीं कहीं हम बडो की भी गलती होती है।

बहू के आते ही घर की सारी जिम्मेदारी उसपर ही डाल देते है जैसे हम बहू नही घर की नौकरानी लाए है। अरे उसके आने से पहले भी तो घर के काम तुम लोग मिल कर भी करते थे न। ज्यादा बात खराब होने से पहले पंकज को भेजो बहु क घघर ले आए। और अब उसके काम मे तुम माँ बेटी दोनों ही हाथ बंटाओगी। हाँ जी करूंगी हम दोनों भी साथ साथ काम। पकंज ले आया करूणा को मां की तरफ से माफी मांग कर। 

       अब घर की परिस्थितियों मे बदलाव आ गया था। करूणा अकेली काम नहीं करती थी। मीरा और नमिता भी काम मे हाथ बंटाते जेल। करूणा मन ही मन खुश हो गई। चलो सब रास्ते पर आ गए। बस अब बहुत हो गया था भाई। 

मंजू ओमर

झांसी उत्तर प्रदेश

14 अगस्त

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