नजरिया

मनोरमा जी ने अपने बेटे को देखा, तो उनका पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्हें लगा कि बेटा बहू के रंग में पूरी तरह रंग चुका है। उन्होंने बेटे को अपनी ओर खींचते हुए तीखे स्वर में कहा, “आकाश, तू बहुत भोला है रे! यह कोई बच्ची नहीं है, पूरी बीस साल की जवान … Read more

विषैले बोल

 राधिका ने हाथ जोड़ते हुए अत्यंत स्पष्ट शब्दों में कहा, “मेरे सास-ससुर ने मुझे वही गृहलक्ष्मी का पावन पद दिया है। वे मुझे किसी नौकरानी की तरह नहीं, बल्कि इस घर की स्वामिनी और रानी की तरह रखते हैं। अगर मैं अपने परिवार के लिए भोजन बनाती हूँ या बर्तन साफ करती हूँ, तो यह … Read more

त्याग का आँचल

रागिनी का कलेजा मुँह को आ गया। उसने पिता हरिशंकर जी की ओर देखा, “बाबूजी, क्या भाभी को सच में यहाँ नहीं लाया गया?” हरिशंकर जी ने अपनी पगड़ी ठीक करते हुए बेहद सहज भाव से कहा, “अरे बेटा, इतनी भारी भीड़ में उसका यहाँ क्या काम था? औरत जात का काम घर की व्यवस्था … Read more

स्वार्थ की सीढ़ी

नंदिनी ने अपनी नज़रें नीची करते हुए बहुत ही शालीनता से हाथ जोड़कर कहा, “अनिमेष जी, विवाह से पहले इस तरह अकेले सिनेमा जाना हमारे पारिवारिक संस्कारों में ठीक नहीं माना जाता। पिताजी को शायद संकोच होगा। आप जब भी यहाँ आते हैं, मुझे आपसे बात करके ही बहुत खुशी मिल जाती है।” अनिमेष मन … Read more

माँ का आशीर्वाद

 जेठ राकेश जी और मयंक के चेहरे का रंग उड़ चुका था। जिस भतीजी और भाभी को वे कल तक बोझ और ताने की वस्तु समझते थे, आज उनके सम्मान के छींटे अपने ऊपर लेने के लिए वे आगे-आगे होकर लोगों को चाय-पानी पूछ रहे थे। मयंक बार-बार मीडिया वालों से कह रहा था, “मेरी … Read more

मैली नीयत

नेहा ने तुरंत शालिनी को गले से लगा लिया और उसकी पीठ सहलाते हुए बोली, “अरे भाभी, ऐसा मत कहिए। परिवार में तो ऐसी नोक-झोंक होती ही रहती है। आप मेरी बड़ी बहन जैसी हैं, आपसे भला मैं कैसे नाराज हो सकती हूं? आज हमारे देवर की शादी है, हम दोनों बहनों को मिलकर बारात … Read more

झूठी शान

 सोफे पर बैठे अवनीश जी अपने चश्मे को ठीक करते हुए अखबार के पन्ने पलट रहे थे। तभी उनका उन्नीस वर्षीय बेटा आयुष हाथ में कॉलेज का ब्रोशर लिए तेजी से कमरे में दाखिल हुआ। उसके चेहरे पर एक अजीब सी बेचैनी और साथ ही भारी उत्साह तैर रहा था। “पापा! आपको याद है न, … Read more

असली दौलत बैंक बैलेंस नहीं…

जब तान्या को पूरी तरह होश आया, तो उसने देखा कि उसकी दाईं तरफ उसकी सास बैठी धीरे-धीरे उसके माथे पर हाथ फेर रही थीं और उनकी आँखों में आँसू थे। बाईं तरफ जेठानी जी थर्मस में हल्का सूप लिए खड़ी थीं। दरवाज़े पर उसका देवर मानव, कमज़ोरी के बावजूद चेहरे पर मुस्कान लिए खड़ा … Read more

संस्कारों का मान

यशोदा जी ने आगे बढ़कर उनके जुड़े हुए हाथ थाम लिए और स्नेह से कहा, “भाई साहब, शर्मिंदा मत होइए। जब सुबह का भूला शाम को घर लौट आए, तो उसे भूला नहीं कहते। आज हमारा परिवार सचमुच संपूर्ण हो गया।” प्रियांशु और प्रगति ने दौड़कर अपनी दीदी और जीजाजी को घेर लिया। “दीदी, हमें … Read more

दहलीज की धूप

शाम को अनुराग और समर ने बैठकर एक नया फैसला लिया। उन्होंने तय किया कि वे मां को उनकी जड़ों से अलग नहीं करेंगे, बल्कि अपनी जिंदगी में मां के लिए समय की प्राथमिकता तय करेंगे। दोनों भाइयों ने नियम बनाया कि हर दो महीने में एक भाई अपने परिवार के साथ पंद्रह दिन के … Read more

error: Content is protected !!