जिंदगी की दूसरी पारी – विनीता सिंह

राहुल जी एक स्कूल में गेम के टीचर थे।उनकी उम्र 60साल की थी स्कूल से रिटायर हो चूके उन्होंने सोचा सारी जिन्दगी बहुत काम कर लिया अब अपने पोते पोतियों के साथ समय बीताऊगा।

लेकिन कहते हैं जो होना होता है वहीं होता है। उनके दोनों बेटे अपनी नौकरी के लिए अपने अपने परिवार को लेकर दूसरे शहर चलें गए। बेटों ने कहा पिता जी आप हमारे साथ चलिए।

लेकिन राहुल जी अपने पुरखों का घर छोड़कर नहीं जाना चाहते थे। राहुल जी ने दोनों बेटों को समझकर भेज दिया अब वह उस घर में अकेले रहने लगे अब वह घर उन्हें काटने लगा

पत्नि की बहुत याद आती।जो कई साल पहले यह दुनियां छोड़कर जाने लगी।बेटे पिता से फोन पर बात करते तब राहुल जी अपने को बहुत खुश दिखाने की कोशिश करते। लेकिन अकेले में बहुत दुखी होते।

फिर उन्होंने सुबह-शाम टहलना शुरू कर दिया था एक दिन पार्क में कुछ बुजुर्गो को क्रिकेट खेलते हुए देखा उनके मन में अजीब सी हलचल हुई।वह वही बैच पर बैठ कर मैच देखने लगे जो उन्हें कमी दिखाई दी वह बताने लगे। तभी उन्हीं में से एक सज्जन आये और बोले आप हमारे साथ खेलिए आप को क्रिकेट में बहुत जानकारी है आप हमारी टीम के कोच बन जाइए।

राहुल जी के मन की मुराद पूरी हो गई हों। अब राहुल जी के चेहरे पर एक अलग तरह की आत्मविश्वास से भरी खुशी थी 

क्योंकि उनके जीवन की दूसरी पारी की शुरुआत थी, अब राहुल जी सुबह चार बजे उठकर नित्य कर्मों को करने के बाद पार्क में जाते अपने दोस्तों के साथ बैठकर योग करते हंसी मजाक करते थे 

बाद में मैदान पर जाकर क्रिकेट खेलते और बहुत ज्यादा खुश रहते हैं उनके जीवन की दूसरी पारी की शुरुआत बहुत अच्छी थी। धीरे-धीरे राहुल जी बहुत प्रसिद्ध हो गए कई स्कूल ऑन में उनसे संपर्क किया अपने स्कूल के बच्चों की क्रिकेट की टीम का कोच बनाए जाते थे राहुल जी ने हां कर दी।

राहुल जी के सिखाएंगे बच्चे तथा प्रदेश स्तर पर क्रिकेट खेलने जाने लगे और मैच को जीतने लगे राहुल जी की बहुत तारीफ हो रही थी। अब राहुल जी के चेहरे पर हर समय खुशी रहती हमेशा आदमी विश्वास से भरे रहते हैं बच्चों को क्रिकेट के नए-नए टीम लेकर एक शहर से दूसरे शहर एक परदेसी दूसरे प्रदेश एक देश से दूसरे देश जाने लगे। उनके द्वारा क्रिकेट सिखाएंगे बच्चे सब लोग राहुल जी की बहुत तारीफ करते। रिटायरमेंट एक परी की समाप्ति दूसरी पारी की शुरुआत होती है। जो काम हम नौकरी पर रहते हुए या अपने युवावस्था में नहीं कर सकते हैं । वही काम हम रिटायरमेंट के बाद समय का सदुपयोग कर सकते हैं जिससे बहुत सारे लोगों को प्रेरणा मिलती है। राहुल जी एक मिसाल है प्रेरणा सूत्र जिंदगी में कभी भी रुकना नहीं हमेशा कुछ ना कुछ सीखते रहना, कुछ ना कुछ करते रहना चाहिए। 

छोटी सी जिंदगी मिली है यह मत सोचो हमें क्या मिला बाकी सोचो हमने दुनिया को क्या दिया क्या लेकर आई थी क्या लिखा जाएंगे अच्छा किया करेंगे लोगों को साथ लोगों के दिलों में रहेंगे जय राहुल जी ने अपनी दूसरी शुरुआत कर से बच्चों का भविष्य उज्जवल किया। जीवन की दूसरी कहानी आपके पास रखें अनुभव का खजाना होती है। जिसे हम दूसरे लोगों की जिंदगी सही राह पर लाकर उन्हें उनकी मंजिल तक पहुंचने में मदद कर सकते हैं 

अब राहुल जी का नाम अलवर में आने लगा, सब लोग सब जगह राहुल जी की तारीफ करें लगें

हमें इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है जीवन में कुछ ना कुछ नया करते रहना चाहिए,

 हमें रोज एक ना एक चीज को सीखना।

विनीता सिंह बीकानेर राजस्थान

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