उसने *जो बोया, वही पाया* है, और मुझे अपनी बहु पर गर्व है, शशि की सास मीनू सीना तान कर बोली। पूरे घर में खुसुर फुसुर होने लग गई। सब आपस में ये बातें करने लग गए कि शशि अपने बेटे,राजीव; जो उसको अपनी जान से भी ज्यादा प्यारा है उस के लिए ऐसा कैसे बोल सकती है।
*कुछ हफ्ते पहले*
बहु!बहु! जल्दी बाहर आओ। साड़ी वाला आया है, तुम भी पसंद कर लो अपने लिए। शशि की अंदर से आवाज आई “आई मां”। वो किचेन से बाहर आई और देखा काफी खूबसूरत साड़ी है।
दोनों सास बहु में इतनी बनती थी कि सबको लगता था मीनू अपने घर बहु नहीं बल्कि बेटी लाई है।
मीनू जब नई नई घर की बहु बनकर आई थी तब उसकी सास उसके लिए कुछ नहीं करती थी, ना ही हाथ बटवा ती थी। तभी उसने ठान लिया था कि अगर उसकी भी कभी कोई बहु हुई तो वो उसको बहु की तरह नहीं अपनी बेटी की तरह ही समझेगी, ताकि उसको कोई तकलीफ ना हो।
शशि ने एक साड़ी पर हाथ रखा और बोला “मां, मुझे ये साड़ी पसंद आई”। मीनू मुस्कुराई और बोली “बस एक ही साड़ी, ५-६ साड़ी और लेलो कुछ दिनों में घर में फंक्शन भी आ रहा है, बहुत सारे मेहमान भी आयेंगे।” शशि ने जब यह सुना तो उसकी आँखें टूटे तारे की तरह चमक सी गई।
रात को राजीव दफ्तर से घर आया, काफी थका हुआ था तो वो बिना खाना खाए और शशि की बात बिना सुने सो गया, दूसरी तरफ शशि समझदार थी इसीलिए बिना कुछ बोले, अपना खाना खा कर सो गई। दिन हफ्तों में कब करवट लेते बदले पता ही नहीं चला और फंक्शन का दिन आ गया।
उस रात कुछ ऐसा हुआ कि जिससे पूरा परिवार, दोस्त, साथी सब विचार में आ गए।
*फंक्शन का दिन*
शशि उसी साड़ी में थी, जो उसने पहली नजर में पसंद की थी और उधर मीनू ने जब शशि को देखा तो उसको देखते ही बोली “बहु, तुम बहुत सुंदर लग रही हो, ऐसा लग रहा है कि कोई स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा हो। काला टीका लगा देती हू, किसी की नजर नहीं लगनी चाहिए मेरी बेटी को।”
शशि ने बोला “मां धन्यवाद”। पर उसकी निगाहें और कान कही और ही टीके हुए थे, वो राजीव के मुंह से सुनना चाहती थी कि वो लग कैसी रही है।
तभी उधर से राजीव आया और उसने जब शशि को देखा तो वो उसको देखता रहा फिर उसके पास आकर बोला “ये साड़ी, तुमने कब ली? तुम कितना खर्चा करवाती हो मेरा”।
शशि का उसी वक्त चेहरे की सारी रौनक चली सी गई। ये चीज मीनू ने देख ली थी पे मेहमान थे इसीलिए कुछ नहीं बोली।
“राजीव यार कैसा है तू?” पीछे से आवाज आई। राजीव ने जब मुड़कर देखा तो उसका बचपन का दोस्त अपने परिवार के साथ आया था।
राजीव ने जैसे ही उसको देखा वो फूले नहीं समाया और बोला “यार तू, तू कब आया? कितना बदल गया है। तू कैसा है?”
दोनों की बातें शुरू हो गई और बातों बातों में राजीव ने शराब के इतने ग्लास पी लिए कि उसको खुद को होश नहीं था।
तभी वहां पर थोड़ी देर बाद शशि आई और हल्का सा राजीव को बोली “बस कीजिए, आज के लिए बहुत है। सेहत के लिए इतनी शराब अच्छी नहीं होती और आप खुद के होश में भी नहीं है।”
राजीव का दोस्त बोला “भाभी ये तो कुछ भी नहीं है, कॉलेज के तुम पर ये इससे भी ज्यादा पी लेता था, और हंसने लगा”।
राजीव को शर्मिंदगी महसूस हुई और उसने शशि का हाथ अपने ऊपर से झटकते हुए बोला “मुझे तुम्हारी हर बात पर टोका टाकी नहीं पसंद है। तुमसे शादी करना मेरी सबसे बड़ी गलती थी।”
चटाक
बहुत ज़ोर की आवाज़ आई। सब आस पास वो नजारा देख कर हैरान रह गए और राजीव को पूरा होश आ गया। उसने *जो बोया, वही पाया* है, और मुझे अपनी बहु पर गर्व है, शशि की सास मीनू सीना तान कर बोली। उस बीच खुसुर फुसुर के एक ने बोला “बहन जी शराब ही तो मर्द का इकलौता सहारा होता है, दुख बाटने का तो अगर आज थोड़ी ज्यादा पी ली राजीव बेटे ने तो क्या हो गया?”
मीनू बोली “भाई साहब शराब पीना ही गलत है और दूसरी बात मर्द के उनकी धर्म पत्नी है जो उनकी बातें सुनने के लिए, उनके दुख बाटने के लिए त्यार रहती है। सारा दिन उनसे बात करने के इंतजार में रहती है और इतना सब करने के बाद भी जब उनकी कदर नहीं होती तब भी वो प्यार देती है। तो इसमें आप बताए गलती हम पत्तियों की है या आप जैसे मर्दों की?”
पूरी जगह सन्नाटा छा गया।
तभी आगे मीनू बोली “शशि को राजीव की फिक्र है, इसीलिए वो उसको बोल रही थी, तो उसमें गलत क्या बोला?”
धीरे धीरे वहां पर सभी महिलाएं मीनू की हां में हां मिलाई और मीनू ने अपने बेटे को उसके अपशब्द का प्रयोग के लिए शशि से माफी मांगने को कहा।
जो मीनू अपने समय नहीं बोल पाई, आज उसने अपनी बेटी के लिए कर दिया।
#क्या आप को भी लगता है, मीनू ने जो किया वो सही किया?
लेखिका
तोषिका