अपशगुनी – डॉ. पारुल अग्रवाल : moral stories in hindi

moral stories in hindi : सुमित्रा जी अपने छोटे बेटे के पास बैंगलोर आई हुई थी। आज उन्हें अपने बड़े बेटे अमन और उसकी पत्नी प्राची के साथ किए गए अपने बुरे बर्ताव पर आत्मग्लानि हो रही थी। आज उनका मन बार बार प्राची को अपशगुनी बोलने पर कचोट रहा था। असल में सुमित्रा जी … Read more

खानदान और सरनेम : moral stories in hindi

moral stories in hindi : जब मेरा दाखिला स्कूल में कराया गया था.. तो मेरे पिता ने मेरा नाम मंजू तिवारी लिखवाया ..मेरे साथ ही मेरे से छोटा मेरा भाई चाचा का बेटा उसका भी दाखिला कराया गया उसका नाम लिखवाया गया.. हम दोनों भाई बहनों के साथ कोई भेदभाव नहीं था.. उसे भी खानदान … Read more

दत्तक पुत्र – शिव कुमारी शुक्ला  : moral stories in hindi

moral stories in hindi : सरिता जी एवं  केशव जी की शादी को बारह वर्ष बीत चुके थे किन्तु वे संतान सुख  से अभी भी बंचित् थे। बहुत दवा इलाज कराया, मन्नते माँगी किन्तु उनकी मुराद पूरी नहीं हुई। कमी दोनों में ही नहीं थी किन्तु कहीं न कहीं किस्मत में ही  कमी थी जो … Read more

हौसलों की उड़ान ( भाग 3) – अर्चना सक्सेना : Moral stories in hindi

moral stories in hindi : “दीदी मेरे हिसाब से आपको सेल्फ डिफेंस सीखना ही चाहिए।” “हुँह कौन सिखायेगा मुझे? बताया न कहकर देख चुकी हूँ मम्मी से। पापा तैयार थे पर मम्मी नहीं मान रहीं, जरूर नानी ने भी मना किया होगा।” “ये तो ठीक कह रही हो दीदी, चलो टेंशन मत लो सोचते हैं … Read more

हौसलों की उड़ान ( भाग 2) – अर्चना सक्सेना : Moral stories in hindi

moral stories in hindi : जब क्रोध शांत नहीं हुआ तो बड़ी बेटी जया को फोन लगा दिया सावित्री ने और घर में हुयी सारी बात मिर्च मसाला लगाकर सुना दी। छोटी बेटी उर्मि तो भाई भाभी की ही सगी है, वे कुछ कहती भी हैं तो उल्टा उन्हें ही समझाने लगती है पर ये … Read more

हौसलों की उड़ान ( भाग 1) – अर्चना सक्सेना : Moral stories in hindi

moral stories in hindi : “बहुत सिर पर चढ़ाकर रखती है तू अपनी बेटी को! देखना बहू पछतायेगी किसी दिन, जब खानदान का नाम डुबोयेगी तेरी ये लाड़ली! अरे लड़की जात है, पराये घर जाना है, लड़की को यूँ सिर पे नचाना ठीक नहीं होता। हमारी भी बेटियाँ पढ़ने जाती थीं, मजाल है मोहल्ले भर … Read more

अंतर्मन की लक्ष्मी ( भाग – 39) – आरती झा आद्या : Moral Stories in Hindi

अचानक कमरे की लाइट ऑन हुई और ऑंखों पर पड़े इस प्रकाश ने विनया की ऑंखें बंद कर दी और वो चीख कर डगमगा गई, डगमगाते ही उसने खुद को बलिष्ठ हाथों में पाया। “तुम डरती भी हो, मुझे तो लगा था केवल डराती हो।” मनीष विनया को बाॉंहों में लिए उसकी कजरारी नैनों में … Read more

तलाक -रिश्ते का अंत,या फिर से शुरुआत (भाग 2)- रचना कंडवाल

वो धीरे से बोला कि सब कुछ तो तुम ले गयी नींद,चैन,खुशी सब कुछ। अच्छा चलती हूं। मयंक ने कहा थोड़ी देर बैठ सकती हो?  आस्था उसे देख रही थी,कि जब से वो आयी थी मयंक ने एक बार भी उस से नजरें नहीं हटायी थी। वो बीमार सा लग रहा था वो बैठ गई … Read more

तलाक -रिश्ते का अंत,या फिर से शुरुआत (भाग 1)- रचना कंडवाल

आस्था कोर्ट से वापस लौटी तो बहुत उदास थी आज कागज के एक टुकड़े पर एक साइन ने उसे और मयंक को हमेशा के लिए लिए अलग कर दिया था।थके कदमों से अपने कमरे में जाकर बेड पर बैठ गई। भैय्या और मां भी उसके पीछे पीछे आ गये। मां तो खामोश थीं, पर भैय्या … Read more

गृहप्रवेश (भाग 5) – मंजरी त्रिपाठी

नहीं नताशा ऐसी कोई बात नहीं है।मुझे तुम्हारे भाई की सगाई से भला क्या दिक्कत हो सकती है।मुझे ना खुशी है और ना ही कोई दुख। अरे आप ऐसे कैसे बोल रहे हैं….कोई बात हुई है क्या??मिहिर की बात सुनकर नताशा चोंकते हुये बोली। कोई बात नहीं हुई नताशा बस मैं आश्चर्यचकित हूँ कि तुम … Read more

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