गृहप्रवेश (भाग 4) – मंजरी त्रिपाठी
नताशा और मिहिर अपनी नई गृहस्थी में प्रसन्न थे।और अब तो नताशा कतई चिंतामुक्त थी।उसे अब कोई भय नहीं था मिहिर की तरफ से,वो अपनी माँ को भी सारा घटनाचक्र बताती रहती है और उनके दिशानिर्देश पर चलते हुये ही मिहिर के साथ अपनी नई और अलग गृहस्थी बनाने में सफल हो पाई थी। उधर … Read more