“नवाब” – ललिता विम्मी : Moral Stories in Hindi
मैं नहीं जानती, तुम कहाँ हो ,कैसे हो जिन्दा भी हो या मर गए। मेरे लिए तो तुम ज़िन्दा और मरे बराबर ही हो।मैं तुम्हें लिखना तो नहीं चाहती थी,पर मुझ अनपढ़ के हाथ में ये हुनर आया है तो अब लिखे बिना रहा भी नहीं जाता। शुक्र गुज़ार हूँ,मैं मेरी जरीना बीबी की जिनके … Read more