टूटते रिश्ते की डोर – आरती झा आद्या : Moral Stories in Hindi

अह्लाद एक सफल बिज़नेसमैन था, जो अपने काम और परिवार दोनों के प्रति समर्पित था। उसका जीवन अपनी पत्नी नीरजा और माता-पिता के इर्द-गिर्द घूमता था। हालाँकि, उसकी दोहरी जिम्मेदारियाँ अक्सर उसे दो पाटों के बीच पिसने का अहसास कराती थीं। शाम के समय अह्लाद ऑफिस से घर लौटता तो नीचे का कमरा मम्मी पापा … Read more

गला काटना – मोनिका रघुवंशी : Moral Stories in Hindi

सरिता बहु यदि तुम्हे इस घर में हिस्सा चाहिए तो जैसा मैं कहता हूं वैसा ही करो….. वरना छोटे को इसका आधा हिस्सा देकर तुम गांव के घर मे अपना हिस्सा ले लो। लेकिन याद रखो मैं तुम्हे कोई पैसा नही दे पाऊंगा यदि गांव के घर मे हिस्सा चाहिए तो वंही चलकर रहना पड़ेगा … Read more

टूटते रिश्ते – वीणा सिंह : Moral Stories in Hindi

आज सुमित की शादी की दूसरी सालगिरह और बेटे की छठी दोनो है… बहुत मनुहार किया आना जरूर आशीर्वाद देने… शहर का नामी संपन्न परिवार… धन्य धान्य से भरपूर…शहर के तीन फैक्ट्रियों के मालिक…उड़ीसा में पिछले साल एक और नई फैक्ट्री लगी है… इसलिए शहर के नामी गिरामी हस्ती आमंत्रित हैं…. मेरे नजरें सुमित की … Read more

टूटते रिश्ते – डाॅक्टर संजु झा : Moral Stories in Hindi

इंसान की जिंदगी में प्यार का एहसास  जितना ही खुबसूरत होता है,इसके विपरीत  टूटे हुए  रिश्ते का दर्द  उतना ही कष्टप्रद और दुखदायी होता है।टूटे हुए  रिश्ते के जख्म ताउम्र नहीं भरते हैं,भले ही वक्त उस पर धूल की चादरें क्यों न चढ़ा दे! अतीत  के दुखदायी लम्हें व्यक्ति के दिल के कोने में ज्यों … Read more

” टूटते रिश्ते ” – उमा वर्मा : Moral Stories in Hindi

मीता का आज मन नहीं लग रहा था ।आज चौबीस मई है ।पति के गुजरे पूरे बीस वर्ष पलक झपकते न जाने कैसे बीत गया ।कितनी खुशहाल थी वह अपनी गृहस्थी में ।कितने जतन से बचाया था उसने अपने परिवार के बीच ” टूटते रिश्ते ” को। आज अचानक क्यों याद आ रहें हैं उसे … Read more

ये कैसा प्यार ? – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

” हैलो मम्मी !” श्रुति फोन मिला बोली। ” कौन ?” उधर से आवाज आई। ” मम्मी अपनी बेटी को भी भूल गई आप !” श्रुति उदास हो बोली। ” बेटी …कौन बेटी ?” उधर से अभी भी सपाट स्वर था। ” मम्मी ऐसे मत बोलो प्लीज !” श्रुति रोते हुए बोली। ” यहां आपकी … Read more

रिश्तों को संभालना पड़ता है – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

 ” सुन मानसी…मुझे मार्केट में कुछ काम है, इसलिए मैं जल्दी जा रही हूँ…तू किसी और से लिफ़्ट ले लेना।” कहकर दिव्या ने लैपटाॅप बंद करके अपने बैग में रखा और कंधे पर डालकर ऑफ़िस से बाहर निकल गई। उसने अपनी स्कूटी ‘सिटी माॅल ‘ के पार्किंग में रखी और घर के लिये कुछ ज़रूरी … Read more

सब्र का फल – शुभ्रा बैनर्जी : Moral Stories in Hindi

पिछले तीन सालों से मधु की छोटी बहन मायके नहीं आई थी।पांच भाई-बहनों में मधु ही सबसे बड़ी थी,और मीता सबसे छोटी।पहली कक्षा में थी ,जब पापा गुज़र गए।पिता की अंतिम यात्रा में अपनी दीदी का हांथ पकड़े पूछ रही थी वह”दीदी,पापा को कहां ले जा रहें हैं?सब रो क्यों रहें हैं?अस्पताल जा रहें हैं … Read more

पापा की फोटोकॉपी – शुभ्रा बैनर्जी : Moral Stories in Hindi

बचपन से ही और लड़कों की तरह शुभा का बेटा भी मां के आगे -पीछे ही घूमता रहता था।पापा के ड्यूटी से आते ही दौड़कर दादी के पास चला जाता था।बहन इसके विपरीत अपनी पापा की ज्यादा लाड़ली थी।शुभा को सासू मां अक्सर कहती”यही होता आया है हमेशा से बहू,बेटा मां का और बेटी पापा … Read more

“वो मेरी गलियाँ” – ललिता विम्मी : Moral Stories in Hindi

बहुत दिनों बाद,आज अपने शहर,अपनी गली,अपने घर की तरफ़ जाना हुआ था । हालांकि मेरा कुछ नहीं बचा था वहां,बहुत पहले ही सब के ठिकानें बदल गए थे। चिलचिलाती धूप, गर्म लूं के  थपेड़े,सिर पर ओढ़े हुए सूती  दुपट्टे ‌को एक बार फिर और खोल कर लपेट लिया था मैंने। वही गली थी ,बस अब … Read more

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