दिव्यतारा (भाग-4) – संध्या त्रिपाठी : Moral stories in hindi

अब तक आपने पढ़ा —              दादी साड़ी के पल्लू की गांठ खोलने लगी…. आज उसमें से मिचूड़े मिचुड़े 20 ,50 , 100 के कई नोट थे …जो दादी ने जमा किए होंगे… उसे निकाल कर तपन को देते हुए बोली …..इसे एकदम अंदर रखना… आखिरी इमरजेंसी के लिए… और ये सिर्फ पैसे नहीं है… दादी … Read more

दिव्यतारा (भाग-3) – संध्या त्रिपाठी : Moral stories in hindi

अब तक आपने पढ़ा —            अम्मा आज आप भी ले ही लो ना ….आज आपका पोता पास हुआ है ….रसगुल्ला के रस को निचोड़ते हुए मालती ने कहा ….       अरे अब पूरा ही रस निचोड़ कर देगी क्या बहू ….तो क्या मैं रूई के समान बेस्वाद सीठा सीठा रसगुल्ला खाऊंगी ……      मां अभी सुगर बढ़ा … Read more

दिव्यतारा (भाग-2) – संध्या त्रिपाठी : Moral stories in hindi

अब तक आपने पढ़ा —          अरे जा लल्ला तू लेकर आ जा…. भला पोते को खाने की इच्छा हो और दादी मान जाए , ऐसा कैसे हो सकता है …अरे मेरी दादी पैसे वाली है भाई ….कहकर तपन दादी की गोद में सिर रखकर लेट गया…। अब आगे —  तपन ओ तपन ….बाहर से दिव्य … Read more

दिव्यतारा (भाग-1) – संध्या त्रिपाठी : Moral stories in hindi

जय बजरंगबली… जय पीड़ा हारी…. जय कष्ट निवारण…… मम्मी ओ मम्मी.. कहां गई , देखो भाई बाहर कोई तुम्हें बुला रहा है …..बहू ओ बहू  जरा देखना चश्मा कहां रख दिया है मैंने ….मिल नहीं रहा , अरे कंघी करने को उतारा ….यही तो रखा था…. कहां चला गया… जैसे उसका भी पैर हो…          हे … Read more

“क्या शारीरिक सुंदरता ही सब कुछ होती है” – हेमलता गुप्ता : Moral Stories in Hindi

वाह पापा.. आपसे तो यह उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी, जब वह लोग आपकी डॉक्टर बेटी को सिर्फ यह कहकर रिश्ते से मना कर गए कि मैं मोटी और बदसूरत हूं और आपने जाकर जैसे ही अच्छे दाम लगाए  उन्हें वही बदसूरत लड़की सुंदर लगने लग गई, इसका मतलब पापा आप किसी भी सूरत में … Read more

कड़वाहट – निभा राजीव “निर्वी” : Moral Stories in Hindi

वर्तिका पिछले दस दिनों से मायके में ही थी। उसका उतरा हुआ और मायूस चेहरा देखकर उसके मां-बाप को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर उस हुआ क्या है… कुछ पूछने पर भी वह बस हां हूं मैं टाल दिया करती थी। कुल 3 महीने ही तो हुए हैं उसके विवाह को..फिर … Read more

अधूरा रिश्ता पूरा हुआ – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

 मेरे चाचा दिल्ली में डाॅक्टर थे।उनकी बेटी रंजू मेरी हमउम्र बहन थी और सहेली भी।स्वभाव से वह बहुत चंचल थी, मिज़ाज भी गरम रहता था लेकिन किसी की आँख में आँसू देखकर वह तुरंत पिघल भी जाती थी।        आठवीं कक्षा में ॠचा नाम की लड़की से उसकी दोस्ती हुई थी।जब भी वो मुझे फ़ोन करती … Read more

हौले हौले घुलती कड़वाहट – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

“पता नहीं मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है ? माँ सही कहती थी तेरे हाथ में यश ही नहीं है… अच्छे काम भी कर लो कोई नाम नहीं होने वाला..बेकार ही सिरदर्द ले कर अपने माथे काम की चादर ओढ़ती रहती हूँ….इतने जतन से सब तैयारी की और नाम देखो हो गया जेठानी जी … Read more

झूठी कड़वाहट – रश्मि झा मिश्रा : Moral Stories in Hindi

आंखों की कोर पोंछतीं… सुलेखा जी अचानक जोर से सुबक उठीं… फोन रखकर वहीं जमीन पर धप्प से बैठ… हथेलियों से मुंह ढंक कर आंसू बहाने लगीं…  अभिषेक ड्यूटी को निकल ही रहा था… मां को ऐसे देख हड़बड़ाहट में मां के पास आ गया…” क्या हुआ मां… क्या हो गया… ऐसे क्यों रो रही … Read more

खूबसूरत धोखा – शिव कुमारी शुक्ला : Moral Stories in Hindi

राजा एक सात वर्षीय  बच्चा अपने पिता से स्मार्टफोन की  फरमाइश कर रहा है। पापा मुझे स्मार्टफोन ही चाहिये। पर बेटा तुम अभी बहुत छोटे हो ऐसा फोन लेकर  क्या करोगे। तुम्हे बात ही करनी है तो अभी जो फोन तुम्हारे पास है वही ठीक है। नहीं पापा मुझे स्मार्ट फोन ही चाहिए उसमें  बहुत … Read more

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