कड़वाहट – संगीता त्रिपाठी  : Moral Stories in Hindi

“कितनी बार कहा सुबह -सुबह लड़ा मत करो, पर नहीं तुम्हे कुछ समझ में आता नहीं “नितिन ऑफिस से आते ही मेघा पर बरस पड़ा। “सुबह की बात तो सुबह खत्म हो गई, अब क्यों गुस्सा हो रहे “मेघा ने हैरानी से पूछा।    “तुम्हारी वजह से मै ऑफिस देर से पहुंचा, मेरा प्रेजेंटेशन खराब हो … Read more

क्या बेटी हमेशा बोझ रहेगी ? – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

नलिनी एक टक घड़ी की तरफ देख रही थी और सोच रही थी समय का पहिया कहा किसी के लिए रुकता है आज तीन साल हो गए उसे ससुराल छोड़ मायके आए इन तीन सालों में रिश्तों के नए नए रंग देखे। जो भाई गर्व से उसे ससुराल से लाया था कि तेरा भाई अभी … Read more

कड़वाहट – माधुरी गुप्ता : Moral Stories in Hindi

योगिनी हर रोज की तरह रसोई में अपने बच्चों व पति के लिए नाश्ता बना रही थी कि उसकी बेटी गौरी उछलती कूदती उसके पास आई और कहने लगी,मां देखो, चाची ने आज मेरा कितना अच्छा हेयर स्टाइल बनाया है।तुम तो हर रोज वही सीधी मांग निकाल कर दो चोटियां बना देती थी। क्लास में … Read more

रिश्तों की कड़वाहट – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

प्रेम प्यार से बने रिश्ते कभी कभी कड़वाहट की इस हद तक पहुंच जाते हैं कि एक पल भी साथ रहना मुश्किल हो जाता है। सुमेधा और सुमित के रिश्ते में भी आज इस कदर कड़वाहट आ गई है कि सुमेधा तो सुमित की शक्ल भी देखना नहीं चाहती  और न ही बात करना चाहती … Read more

छोटी छोटी बातों में ख़ुशियों को तलाश करना सीखो – के कामेश्वरी : Moral Stories in Hindi

राजीव और सुभाष एक ही बिल्डिंग में आमने सामने वाले फ़्लैट में रहते थे । उन दोनों में अच्छी दोस्ती थी । रिटायर होने के बाद रोज सुबह शाम वाकिंग के बहाने सामने के पार्क में बातें करते हुए एक राउंड मारकर आ जाते थे । उन दोनों की सोच एक जैसी ही थी ।   … Read more

असर – बीना शर्मा : Moral Stories in Hindi

शाम के वक्त आंगन में अपनी पत्नी और बहू आनंदी को आपस में गपशप करते देखकर मनोहर मुस्कुराते हुए अपनी पत्नी कमला से बोले” तुम दोनों को आपस में गपशप करते हुए देख कर मन खुश हो गया अब ना बहू अकेली काम करते हुए थकती है और ना ही तुम घर में अकेले बैठी … Read more

तलाश करना सीखो । – बिमला महाजन : Moral Stories in Hindi

“जीवन लम्हो में जिआ जाता है ,मुक्कमल नही !” सब काम निपटा कर  श्यामली आराम करने लगी थी । सोचा कुछ हल्का -फुल्का पढ़ लूं ।   एक मासिक पत्रिका  के पन्ने पलट रही थी कि एक रचना का शीर्षक पढ़ कर चौंक गई । शीर्षक कुछ जाना पहचाना लग रहा था। जैसे ही रचना … Read more

नयी कहानी – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

  अरे,ये कौन है,किसने मेरी आँखें बंद की है।ये तो मेरा शैतान बच्चा लगता है।        हूँ-हूँ, दादू आप मुझे हर बार पहचान लेते हैं।क्या आपके पीछे भी आंखे हैं?       मेरे बच्चे, दादू के चारो तरफ आंखे हैं, पर वे तुझे ही देख पाती है।     दादू दादू आज तो आपको मुझे कोई कहानी सुनानी ही पड़ेगी।और हां … Read more

दिव्यतारा ( भाग 6 और अंतिम) – संध्या त्रिपाठी : Moral stories in hindi

अब तक आपने पढ़ा —            जीजी , आप साड़ी तो बदल लें …  हां हां बदलती हूं ….मेहमानों में से रिश्ते की देवरानी मीना ने कहा … अरे क्या बताँऊ मीना…तारा मुंह फुला कर पार्लर गई है … क्यों जीजी …? वो कह रही थी… मेरी शादी में मम्मी आप भी मेरे साथ पार्लर जाकर … Read more

दिव्यतारा (भाग-5) – संध्या त्रिपाठी : Moral stories in hindi

अब तक आपने पढ़ा —             एक दिन मजाक मजाक में दिव्य ने पूछा…. तारा तुझे कैसा लड़का चाहिए…?           तारा ने भी बड़े भोलेपन से जवाब दिया ….आपके जैसा दिव्य… जो मुझे समझ सके ….तारा का ये जवाब न जाने क्यों दिव्य को बहुत अच्छा लगा ….शायद यही तो सुनना चाहता था दिव्य… ! अब आगे … Read more

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