आखिरी श्रृंगार – ऋतु गुप्ता : Moral Stories in Hindi

आज राधा जी की पहली पुण्यतिथि पर पूरा परिवार, घर नाते रिश्तेदार बच्चे सब एकत्रित हैं। चौकी पर रखी श्रीमती राधा सुबोध गर्ग जी की मुस्कुराती हुई फोटो देखकर ऐसा लग रहा है मानो अभी बोल पड़ेंगी। वही राधा जी की तस्वीर के पास उनके पति सुबोध जी बैठे हैं और नीचे की तरफ शून्य … Read more

निर्णय तो लेना ही पड़ेगा ,कब तक आत्मसम्मान खोकर जियोगी – नीलम नारंग : Moral Stories in Hindi

बेटा, सिमरन मैं तुझे अभी भी समझा रही हूं। पहले भी तूने हमारी बात नहीं मानी  कोई बात नही,लेकिन अब मेरी बात मान ले अपना सामान पैक कर और मायके वापस आ जाओ जिस घर में आत्म सम्मान नहीं है, इज्जत नहीं है उस घर में रहने से कोई फायदा नहीं । सिमरन ने माँ … Read more

घुटन – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

अपने आप तो बाबूजी और माँजी चले गए , इस रूपा को सारी ज़िंदगी हम झेलें , पैंतालीस की हो चुकी …. अब तो शादी होने से रही ……तुम्हारा छोटा भाई परिवार को लेकर नौकरी पर चला गया । एक मैं और मेरे बच्चे, हम निभाते रहे सारे रिश्ते… .  पुष्पा! रूपा  दीदी इस घर … Read more

आज की महिला – के कामेश्वरी : Moral Stories in Hindi

नंदिता जब ब्याह करके अपने ससुराल पहुँची थी तो देखा घर में दो देवर हैं जो अपनी पढ़ाई पूरी करके नौकरी ढूँढ रहे थे । एक छोटी नन्द डिग्री में पढ़ रही थी । ससुर रिटायर हो कर घर पर ही थे । अब सास बहू को ज़िम्मेदारी सौंप कर खुद अपनी ज़िम्मेदारियों से मुक्त … Read more

निर्णय तो लेना ही पड़ेगा ,कब तक आत्मसम्मान खोकर जियोगी – संध्या सिन्हा : Moral Stories in Hindi

“हेलो शमिता! “  “ हाय तारा!” “ कैसी हो शमिता ..” “ फिट एंड फाइन यार! तुम बताओ कैसे हो ??” “ मैं एकदम ठीक हूँ, पर शायद तुम ठीक नही हो…, रो रही थी क्या??आवाज़ में भारीपन है…” “ अरे! नहीं यार..बस… ऐसे ही …।” “अच्छा रुक शाम को ‘इंडिया हैबिटेट सेंटर’ में मिलते … Read more

*खुलना ग्रंथि का* – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

           अरे अदिति अपने अस्तित्व को पहचानो,जब हर पल कचौटा जाता है, अपमानित किया जाता है तो फैसला तो तुम्हे लेना ही पड़ेगा।        तुम ठीक कह रही हो सपना।फैसला तो करना ही पड़ेगा।तुम मेरी बचपन की सखी हो,इसीलिये तुमसे अपने मन की हर बात शेयर कर लेती हूँ, इससे मेरा मन भी हल्का हो जाता है। … Read more

इकलौता मित्र – सरला पांडे : Moral Stories in Hindi

सुधीर को आए पूरे दस दिन हो गए। जिस कार्य के लिए यहां आया था वह भी एक हफ्ता पहले ही पूरा हो गया।यह बात स्वयं सुधीर ने ही बतायी थी। जिस उत्साह के साथ पहले दिन भास्कर ने अपने प्रिय मित्र का स्वागत किया था वह उत्साह अब ठंढा पड़ चुका था। सुनीता के … Read more

अच्छे दिन भी आएँगे – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

  ” माँ..कहाँ हैं आप?” घर में घुसते ही स्नेहा ने चहकते हुए अपनी माँ को आवाज़ लगाई।        ” मैं यहाँ हूँ स्नेहा…पर तू अचानक इस समय…” सुनयना की बात अधूरी रह गई क्योंकि स्नेहा ने उनके मुँह में मोतीचूर के लड्डू डाल दिये थे।      ” बधाई हो माँ..तुम्हारा लाडला अब डाॅक्टर बन गया है।#गाढ़े दिनों … Read more

सौभाग्यवती – वीणा सिंह : Moral Stories in Hindi

सुमन दी नही रही.. ये मनहूस खबर पड़ोस में रहने वाली भाभी ने दी.. और साथ में ये भी कहा मृणाल कल आएगा मुखाग्नि देने ..इसलिए मृत शरीर को अस्पताल में हीं रखा गया है….. पति धर्म पूरा करने आएगा मृणाल…तथाकथित समाज की बुजुर्ग महिलाओं के अनुसार सुमन #सौभाग्यवती #है जो पति के कंधे पर … Read more

सीखने की कोई उम्र नहीं होती…. तो क्या उम्र भर सीखती हीं रहूं !! – सविता गोयल : Moral Stories in Hindi

” कितनी सुघड़ बहू आई है शर्मा जी के यहां …. अरे अपनी शादी के सारे ब्लाउज और सूट खुद हीं सील कर लाई थी और यहां भी अपनी सास, ननद और सारे रिश्तेदारों के कपड़े सिलकर देती है । एक हमारे यहां है….. फटे में टांका लगाना भी ढंग से नहीं आता। ,, कमला … Read more

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