हमें इंतज़ार कितना ये हम नही जानते – कंचन सिंह चौहान  : Moral Stories in Hindi

खाना जल्दी से बना के रख देना है। वर्ना किचेन में ही आ के बैठ जायेगा। और एक बार बात शुरू होगी तो खतम ही नही होगी। फिर दीदी गुस्सा होंगी। किचेन में ही बैठकी जम जाती है तुम्हारी। वो खाना बना कर बाहर बराम्दे मे ऐसी जगह बैठी है, जहाँ से सड़क के मोड़ … Read more

लेकिन मैं अम्मा जी नहीं बनना चाहती – गीतु महाजन : Moral Stories in Hindi

सुमन जी और उनके पति शैलेंद्र जी अपनी नई बहू के साथ एक नये दौर की शुरुआत कर रहे थे। बहू के घर में कदम रखते ही एक अलग सी रौनक आ गई थी, एक नई उमंग, नई ऊर्जा। पहले दिन जब बहू ने पहली बार उनके लिए खाना बनाया, तो सुमन जी ने देखा … Read more

बिन मांगे मोती मिले – अर्चना सिंह : Moral Stories in Hindi

आज सुबह – सुबह अखबार खोलते ही  जिस फोटो को देखी नज़रें जैसे चुंधिया सी गई और दिल – दिमाग शंकाओं से घिर आया । बहुत कुछ बदल गया था इन पाँच सालों में । बड़े असमंजस में थी वही मीरा आंटी हैं जिन्हें मैं जानती हूँ या उनकी हमशक्ल हैं । लेकिन मीरा आंटी … Read more

ठोस कदम – अंजना ठाकुर : Moral Stories in Hindi

रानी एक मेहनती और आत्मसम्मान से भरी हुई महिला थी। तीस की उम्र पार कर चुकी थी और समाज में निचले तबके से आने के बावजूद भी उसके आत्मसम्मान में किसी तरह की कमी नहीं थी। वो कई घरों में बर्तन मांजने और सफाई का काम करती थी। उसकी ईमानदारी और मेहनत की वजह से … Read more

हम साथ-साथ हैं – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

मयंक और निकिता की शादी को पाँच साल हो चुके थे। दोनों एक-दूसरे के सुख-दुख को समझते थे, लेकिन मयंक के स्वभाव की एक बात थी जो निकिता को हमेशा से परेशान करती थी। मयंक का शांत स्वभाव और बिना किसी शिकायत के सब कुछ सहन कर लेना, निकिता के लिए हमेशा एक पहेली था। … Read more

हमें अपनी पहली संतान की खुशी है अफसोस नही – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

” मम्मा कुहू के जन्मोत्सव का कार्यक्रम किस जगह रखना है ?” केशव ने अपनी माँ कामिनी जी से पूछा। ” अरे कार्यक्रम कुछ नही बस हवन करेंगे क्या फायदा हो हल्ला करके कौन सा लड़का हुआ है !” कामिनी जी मुंह बनाते हुए बोली। ” पर मम्मा भाभी की पहली बेटी के होने पर … Read more

खिचड़ी – मीनाक्षी सिंह : Moral Stories in Hindi

82 वर्षीय विपुल जी अपनी सुबह की दिनचर्या में व्यस्त थे। आज उन्हें खिचड़ी का बहुत मन था। लेकिन सिर्फ खिचड़ी नहीं, बल्कि उस खिचड़ी के साथ ढेर सारी चीजें जो उनकी पत्नी सुनीता बहुत अच्छे से बनाती थीं। वह सुबह जल्दी उठकर रसोई में जाकर बोले, “सुनीता… आज खिचड़ी, दही के बड़े, वो हरी … Read more

सच्चे रिश्ते केवल बाहरी चमक-धमक से नहीं बल्कि दिल की गहराइयों से बनते हैं – सुभद्रा प्रसाद : Moral Stories in Hindi

रंजन अपने ऑफिस से थका-हारा घर पहुंचा। उसकी आँखों में हल्का सा गुस्सा और निराशा झलक रही थी। वह सीधे अपने कमरे में गया और खुद को बिस्तर पर फेंक दिया। उसकी माँ, विमला देवी, जो रंजन के चेहरे के हर भाव को समझने में माहिर थीं, तुरंत समझ गईं कि कुछ बात है जो … Read more

खुशियों के दीप – माधुरी गुप्ता : Moral Stories in Hindi

सेठ मंगलदास की हबेली आज पूरी कॉलौनी में एकदम अलग से चमक रही थी ,दूर दूर से लोग इस अदभुत रौनक कोदेखने आरहे थे। सेठजी भी आज सही मायने में बहुत खुश नजर आ रहे थे।यह करिश्मा किया था उनकी सबसे छोटी बहू सलोनी ने।हबेली में दीपावली पर लाइटों की झालर न लगा कर पूरे … Read more

ममता जीत गई – गीता वाधवानी : Moral Stories in Hindi

ज्योति के जीवन का सफर अपने पति निशांत के साथ एक सामान्य भारतीय परिवार की कहानी जैसा ही था। आठ साल पहले उसके और निशांत के विवाह के बाद सभी ने उम्मीद की थी कि जल्द ही उनके परिवार में नन्हा मेहमान आएगा। लेकिन संतान सुख की प्रतीक्षा में बीते सालों ने इस खुशी को … Read more

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