रिश्तों के भी रंग -निधि गुप्ता
मांसी को बचपन से ही रंगों से बहुत प्यार था। उसके कमरे की दीवारें तरह-तरह की पेंटिंग से भरी रहती थीं। कहीं नीले आसमान में उड़ते पक्षी, कहीं हरे खेत, तो कहीं लाल-पीले फूल। मांसी कहती थी कि रंग सिर्फ कागज़ पर नहीं होते, रिश्तों में भी होते हैं। मांसी की मां अक्सर मुस्कुराकर कहती, … Read more