अतिथि,अब तुम जाओगे – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

बचपन में हमें टीचर ने सिखाया था कि अतिथि देवो भवः और सयाने होने पर दादी ने भी यही सिखाया था।जब भी चाचा, बुआ-फूफाजी अथवा पिताजी के मित्र हमारे घर आतें तो माँ हम सभी भाई-बहनों को एक कमरे में समेट देतीं थीं।अब रात को एक ही बिस्तर पर हम पाँचों भाई-बहन एक-दूसरे पर लातें … Read more

घर दीवार से नहीं परिवार से बनते हैं – मधु वशिष्ठ

घर दीवार से नहीं परिवार से बनते हैं सुमित्रा गुस्से में वर्मा जी से चिल्ला कर बोली। बंटी का दोस्त और  दीप्ति की सहेलियां भी घर से जा रही थी और दीप्ति उतरा हुआ मुंह लेकर खाने की प्लेटें सिंक में डाल रही थी।        आइऐ आपको वर्मा जी के परिवार के बारे में बताते हैं। … Read more

फैसला – बीना शर्मा 

“आज तुमने फिर से  अपने मम्मी पापा को पैसे दे दिए… मैंने मना किया था उन्हें पैसे देने के लिए फिर आपने उन्हें पैसे क्यों दिए? तुम ऐसे नहीं मानोगे..… आज मुझे ही कोई कठोर फैसला लेना पड़ेगा.… तब तुम सुधरोगे”मोनिका ने गुस्से में अपने पति मोहित से कहा तो मोहित ने उससे पूछा कैसा … Read more

रक्षाबंधन – डॉ बीना कुण्डलिया

ट्रिन ट्रिन ट्रिन ट्रिन फोन की लगातार बजती आवाजें अमिता ने दौड़कर अपना सेल फोन उठाया, उधर से आवाज आई हैलो, हैलो भाभी आवाज पहचान कर अमिता ने इधर उधर अपना मुंह घुमाया साफ जाहिर हो रहा था नाखुश थी वो । फिर बोली हाँ नम्रता बोलो । नम्रता अमिता की ननद जो अमिता को … Read more

कठोर कदम – प्रतिमा श्रीवास्तव   

सुबोध ने आज कठोर कदम उठाए थे अपनी मां के खिलाफ। ऐसा जो की करने से पहले एक बेटे को बार-बार सोचना पड़ता है। उसने घर छोड़ने का फैसला ले लिया था क्योंकि उसकी मां सरला जी का व्यवहार अपनी बहूओं के प्रति बहुत ही खराब था। सुबोध ने बहुत बार अनदेखा कर दिया था … Read more

ईर्ष्या – विनीता महक गोण्डवी 

अनामिका अमीर मां-बाप की इकलौती संतान थी। देखने में बहुत खूबसूरत जो भी देखता देखता ही रह जाता परंतु वह बहुत जिद्दी और नकचढ़ी थी। वह हर किसी को नीचा दिखाना चाहती थी और उसको इस काम में बहुत मजा आता था उसके मां-बाप रिश्तेदार भी इस आदत से परेशान रहते थे। बाहर किसी की … Read more

गलतफहमी – शुभ्रा मिश्रा

“तुम मुझसे जलते हो । तुमसे मेरा नाम, ओहदा,ख़ुशी कुछ भी देखा नहीं जाता है।तुम तो बचपन से ही मुझसे जलते हो । तुम पढ़ने मे मेरे जैसे तेज नहीं थे,तुम पापा की इक्छाओ पर कभी खरे नहीं उतरे,मैंने हमेशा परिवार और समाज मे पापा का मान बढ़ाया इसलिए तुम मुझसे जलते हो।तुम बड़े बेटे … Read more

मेरे बच्चे मेरी कमजोरी नहीं ताकत हैं – कमलेश आहूजा

सरोज और रमा एक ही बिल्डिंग में रहती थीं।दोनों कभी-कभी वॉकिंग करते समय मिलती थीं फिर धीरे-धीरे अच्छी दोस्त बन गईं।बच्चों के मामले में शायद रमा सरोज से ज्यादा भग्यशाली थी।उसके दोनों बेटे संस्कारी और पढ़े लिखे थे।रमा से बहुत प्यार करते थे..और करते भी क्यों ना?वही तो थी जो उनके सुख दुख की साथी … Read more

अपने ही होते हैं – विमला गुगलानी

 “ बधाई हो, बेटा हुआ है” नर्स ने लेबर रूम से बाहर निकलते हुए कहा। यह सुनकर सुमेधा की सास, ससुर, पति ,जेठ, सबके चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई। सुमेधा की सास ने हाथ जोड़कर भगवान का धन्यवाद किया, सिरफ इसलिए नहीं कि बेटा हुआ है, बल्कि उससे भी पहले  इसलिए कि सुमेधा … Read more

भाई से ईर्ष्या – रश्मि प्रकाश 

“ अनुजा मेरे कपड़े कहाँ रख दिए फिर नहीं मिल रहे… तुम भी ना जरा भी ध्यान नहीं देती हो पक्का मेरे कपड़े… सुहास के कपड़ों के साथ उसकी अलमारी में सज रहे होंगे ।” विभोर ने झल्लाते हुए कहा  वो कमरे से जैसे ही बाहर निकल कर आया… सुहास की पत्नी मनस्वी कुछ कपड़े … Read more

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