कठपुतली – पुष्पा पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

बहन से बात करने के बाद विनोद जी अपनी बजट बनाने में लग गये। जैसलमेर आना- जाना और फिर ‘मामा-भात’ रस्म के लिए जेवर- कपड़े आदि उपहार… कोई कमी नहीं होनी चाहिए। अंतिम भांजे की शादी है। घर में पत्नी और बच्चे भी खुश थे कि चलो इसी बहाने घूमने का मौका मिलेगा। गुड़िया ने … Read more

आसमान में उड़ना – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

सुनो कामिनी अब मैं रिटायर हो चुका हूं,घर चलाने के लिए सिर्फ पेंशन आती है अब मैं शुभम को खर्चे के लिए इतने सारे पैसे नहीं दे सकता। आखिर कबतक मैं उसका बोझ उठाता रहूंगा।अब कुछ काम धाम करेगा मैं तो परेशान हो गया हूं पवन जी अपनी पत्नी से बोले।               पवन जी और पत्नी … Read more

कठपुतली – सीमा सिंघी : Moral Stories in Hindi

माही का आज ससुराल में पहला दिन था । उसे अपनी मां की सीख रह रह कर याद आ रही थी। माही सब के साथ अच्छे से रहना। ज्यादा बोलना नहीं और हां यहां की तरह उठते ही सब से पहले अपनी चाय की प्याली लेकर बैठ नहीं जाना । कमरे में कपड़े इधर उधर … Read more

किरदार – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

             बेटे के व्यवहार ने आज सरोज जी को अंदर तक तोड़ कर रख दिया।कितने जतन से कितनी तपस्या से जतिन को पाला पोसा था,पर आज—–?          रमेन्द्र जी जब सरोज को ब्याह कर लाये थे तो सरोज की उम्र महज 19 बरस की थी।बाबुल के यहां कुलांचे भरते भरते कब वो घर पराया हो गया पता … Read more

कठपुतली – विधि जैन : Moral Stories in Hindi

मीनल और सोनल देवरानी जेठानी दोनों ऐसे रहती थी की सगी बहन है।  शॉपिंग करने जाना है तो साथ में जाती थी घर का काम है तो दोनों साथ करती हैं।  सास को ज्यादा असर नहीं पड़ता था ससुर रिटायर्ड हो गए थे उनका भी कहना था कि घर में यदि सब मिलजुल कर रहेंगे … Read more

“जड़ें हिलती हैं जब…” – दीपा माथुर : Moral Stories in Hindi

(एक दृश्यात्मक पारिवारिक कहानी — भावों से भीगी, समय की सच्चाइयों से टकराती) बरामदे में बैठकर अख़बार पढ़ते-पढ़ते दादा जी का चेहरा सख्त हो गया था। चश्मे के पार से उनकी आँखें अख़बार के हर शब्द को जैसे चीरकर देख रही थीं। “आजकल का ज़माना… कोई किसी का नहीं रहा।” हाथ काँपे, कप चाय छलक … Read more

रिश्तों की मर्यादा – दीपा माथुर : Moral Stories in Hindi

कमरे में हल्का अंधेरा था। बाहर बारिश की बूँदें, खिड़की पर थिरक रही थीं — जैसे हर बूँद पूछ रही हो, “क्या आज फिर कोई रिश्ता भीगने वाला है?” नैना ने आरव को देखा — उसकी पीठ अब भी मुड़ी हुई थी, जैसे उसने बात नहीं सुनी हो। लेकिन नैना जानती थी — आरव सब … Read more

कठपुतली – रेनू अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

टीवी पर एक पुरानी फिल्म चल रही थी। उसमें एक सीन आया—कठपुतलियों का डांस। रंग-बिरंगे कपड़ों में बंधी डोरियों से नाचती कठपुतलियां, जैसे किसी अदृश्य हाथ की कमान पर थिरक रही हों। रीना और उसकी बहू रिंकी साथ बैठकर फिल्म देख रही थीं। अचानक रीना चुप हो गई, उसकी आंखों की चमक बुझ सी गई। … Read more

कठपुतली – परमा दत्त झा : Moral Stories in Hindi

‘बाबूजी आज भोपाल मेला चलिए न-राधा और मालती भी कह रही थी।-बहू चाय देते बोली। अच्छा,कहते महेश्वर दयाल जी चाय पीने लगे।वे टी वी भी देखने लगे। सुबह के सात बजे थे और ये अपनी चाय दुकान चलाकर आये थे।इनकी आंखों से सावन भादो झरने लगे। “ना बाबूजी,अब सब ठीक हो गया।-यह बहू यशोदा थी। … Read more

आसमान पर उड़ना – कमलेश राणा : Moral Stories in Hindi

निशि बेटा देखो तुम्हारा पार्सल आया है। हां मम्मी अभी आती हूं। बेटा क्या तुम्हें ऐसा नहीं लगता कि तुमने शॉपिंग की अति कर रखी है। नौकरी क्या लगी.. तुम तो आसमान पर ही उड़ने लगी।याद रखना अति हर चीज की बुरी होती है आज यह तुम्हारा पांचवां पार्सल है। मां पता नहीं क्यों आपको … Read more

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