कितनी बार सुबह से फोन कर चुकी हूँ तब जा के तुम अब फोन उठाई हो” । शिखा की मम्मी संध्या जी ने शिखा को प्यार भरी झिड़की देते हुए ऐसे कहा । शिखा ने बहुत कठोरता से रूखे अंदाज में कहा… कोई काम था क्या मम्मी? आपको तो सिर्फ रेखा दीदी को फोन मिलाना याद रहता है, मैं तो सिर्फ काम के वक्त याद आती हूँ ।
“अरे ! ऐसे क्यों बोल रही हो तुम? कहां फर्क करती हूँ तुम दोनों में, जबकि तुमने मेरा दिल कितना दुखाया है मेरे विरुद्ध अंतर्जातीय विवाह करके । “देखा मम्मी ! कहा था ना..जो आपके दिल में था मुँह से भी निकल गया । खैर…आप अगर मुझे खरी खोटी सुनाने के लिए फोन की हैं तो मुझे बिल्कुल नहीं सुनना जो काम है वो बताइए ।
संध्या जी ने लंबी साँस खींचते हुए कहा…”तुम्हारे भाई संजीव की शादी तय हो गई है जनवरी में, अभी तीन महीने बाकी हैं पैसे भेज रही हूँ शॉपिंग कर लेना । उसके बाद फिर तुम्हें यहाँ आकर दूल्हा और दुल्हन के कपड़े श्रृंगार का सामान बाकी सब भी लेना है ।”ठीक है कहकर शिखा ने फोन रख दिया ।
अब उसके मन की उलझन और बढ़ रही थी । सिर भी मानो दर्द से फट रहा था । उसने अपने लिए चाय बनाई तब तक शिखा के पति अजय भीऑफिस से आ गए। अजय ने लंच डायनिंग टेबल पर रखते हुए कहा…”मम्मी जी का फोन आया था, संजीव भैया की शादी तय हो गई। हमें बुलाया है ।
शिखा ने बात खत्म करने से पहले ही बीच में बोला , एक बार तो प्रेम विवाह जैसा गुनाह किया तो जाकर इतनी बेज्जती सही हम दोनों ने तब तो मुझे लगा था शादी में शामिल नहीं हुए तो आशीर्वाद देने के लिए बुला रहे हैं, उस वक़्त तो हमारी मजबूरी थी दोनों परिवार को साथ जोड़कर चलना हमने भरसक कोशिश की पर तब नाकामयाब रहे, फोन पर भी मम्मी सिर्फ खरी खोटी सुनाती रहीं ।
मैं छोटी और रेखा दीदी बड़ी थी तो मैने पहले शादी कर ली इसके लिए कितना सुनना पड़ा । कितना अपमान सहूं? पहली बार हिम्मत करके शादी की सालगिरह में बुलाई वहाँ भी मम्मी – पापा दीदी संजीव सब आकर सिर्फ उपहार दिये और चले गए । खाना भी जरूरी नहीं समझा । अब शादी के दो साल होने वाले हैं, बहुत बेज्जती बर्दाश्त कर ली अब नहीं होगा ।
इतना छूत, भेदभाव है तो क्यों लोगों के पास जाकर मजाक का पात्र बनना ? कुछ बदलाव नहीं आने वाला मुझे पता है इसलिए हम नहीं जाएंगे, मुझे भी फोन आया था । अजय ने ढाढ़स बंधाते हुए कहा…”ऐसा नहीं कहते, हमें जाना होगा, तुम्हारे घर में लोग जातिवाद को इतना महत्व देते हैं और हमें जातिवाद मिटाकर एकजुट रहना है तो अपनी जिद त्याग करके हमें ही आगे बढ़ना होगा ।”
आँसुओं का शैलाब और दिल में अपनों के बिछोह का दुःख लिए शिखा ने अपने आंसुओं को पोंछते हुए अजय से कहा…”जाने को तो चली जाऊं अजय, मेरा मायका है पर जैसे भी हालात हों खुद तो बर्दाश्त कर लूंगी लेकिन किसी के मुँह से एक भी बुरा शब्द आपके लिए नहीं सह सकती , और शादी से अब तक कितने कम दिनों में इतना झेला है कि अब हिम्मत नहीं उनके सामने जाकर खड़ी हो जाऊं। मेरा भी # आत्म सम्मान है।
याद करिए आप..जब रेखा दीदी की बारात द्वार पर लगने वाली थी और मम्मी का हार नहीं मिल रहा था , आप उस जगह नहीं थे तब मम्मी ने फुसफुसाते हुए कहा…”इस कमरे में अपने ही घर के लोग थोड़ी हैं, पता नहीं किसने चुरा लिया, इस कमरे से तो अभी अभी अजय जी निकले हैं। कहीं…गुस्सा तो बहुत आ रही थी पर फिर भी खुद पर नियंत्रण रखकर बात को पचा लिया और आखिर में शादी के बाद मम्मी जो कपड़े निकाल कर राखी थी वहीं ढका हुआ मिल गया ।
गरीब घर में शादी जरूर की है, लेकिन चोर नहीं। पर जब आप अच्छे जॉब से कमा रहे हैं मेरे शौक पूरे कर रहे तो जाति से क्या लेना? मुझे तो लगता ही नहीं है कोई रिश्ता या अपनापन है मेरा वहाँ ! “आप मुझे मत बहलाइए अजय ! नहीं जाना मुझे, अकेले की और बात थी, पति का अपमान मुझे बर्दाश्त नहीं ।
अजय ने प्यार से शिखा को कहा चलो, जल्दी तैयार हो तुम्हें नहीं जाना ठीक है, हम बाजार चलेंगे और मूड फ्रेश करके आएंगे । शिखा ने मुँह पर पानी का छींटा डाला और साड़ी पहनकर तैयार हो गई । अजय ने गाड़ी स्टार्ट किया और तनिष्क शोरुम के पास गाड़ी रोकी ।
शिखा आश्चर्य से अजय को देखते हुए बोली.. यहाँ क्यों ? शिखा का हाथ पकड़ते हुए गाड़ी से उतारकर अजय ले जाते हुए बोलने लगा .. हमारे अपने तो अपने ही रहेंगे, थोड़ा नाराजगी जता लेने से खून के रिश्ते नहीं बदल जाएंगे । कम ही समय बचे हैं शादी में, अपनी होने वाली भाभी के लिए झुमके या चेन ले लो और खुद के लिए भी कुछ देख लो ।
शिखा ने अजय की बात न टालते हुए झुमके खुद के लिए भी और भाभी के लिए भी ले लिए । दुकान से निकल ही रही थी कि एक अजनबी लड़की ने दूर से हाथ हिलाते हुए आवाज लगाई…”हाय शिखा ! याद आया..? मैं नीति । हम इलाहाबाद में तीन साल साथ पढ़े थे सातवीं से नौंवीं तक और फिर मेरे पापा का तबादला हो गया था तो अलीगढ़ चले गए थे ।
और अब यहाँ बनारस में हम तेरह साल से हैं पर तुम यहाँ बनारस में कैसे ?, शादी कर ली, कब कहां ? एक साथ इतनी बातें सुनकर शिखा कुछ देर के लिए सन्न हो गई।
एक मिनट रुकी और शिखा ने दिमाग पर जोर डालते हुए कहा..क्लास में सबसे ज्यादा वैरायटी जिसके लंच बॉक्स में होती थी वही नीति हो न तुम ? मुझे याद आ गया वो खूब घूमने वाली लड़की हमेशा बॉय कट में रहती थी और पढ़ने में भी होशियार, बाल कितने बड़े कर लिये मै तो पहचान ही नहीं पाई ।
दोनों बहुत समय बाद जिंदादिली से गले मिलीं । शिखा ने बताया बनारस शहर में ही मम्मी पापा ने घर बना लिया और यहीं उसने पढ़ाई के दौरान अजय से प्रेम विवाह कर लिया । नीति ने कहा..पापा तो रिटायरमेंट के बाद नहीं रहे । दोनों दीदी की शादी हो गई थी और मेरी शादी भी इसी शहर में तय हुई है अपना पता दे दो तुम्हें कार्ड भेजूंगी ।
हाँ में सिर हिलाते हुए दोनों ने नम्बर एक दूसरे का लिया और शिखा बाय करते हुए गाड़ी में बैठने जा रही थी तब नीति ने गाड़ी के दरवाजे के पास आकर अजय को नमस्ते करते हुए कहा…शुक्रिया आपका !
हम दोनों सहेलियाँ जमाने बाद मिलीं तो सब कुछ भूल ही गईं। अजय ने मुस्कुराकर हाथ जोड़ते हुए कहा…”शुक्रिया तो आपका करना चाहता हूँ । मेरी पत्नी का मूड खराब था और आपकी वजह से उसका मूड अच्छा हो गया । “जल्दी मिलते हैं”! कहकर अजय ने बाय कहते हुए विदा लिया ।
अगली सुबह दरवाजे पर घंटी बजी । शिखा ने हड़बड़ाते हुए दरवाजा खोला। अपने पापा नारायण जी को देखकर उछलते हुए बोली…पापा ! आप इस वक्त ? नारायण जी ने शिखा को गले लगाते हुए बोला..तुम तो जानती हो बेटा, मै सुबह उठकर सैर के लिए जाता हूं आज सोचा तुम्हारे घर का ही रास्ता देख लूँ। बहुत बदल गई है
मेरी बेटी, अब तो बात ही नहीं करना चाहती । शिखा की आँखों से अचानक आँसू बह निकले । उसने रुंधे हुए गले से कहा…”मुझे सबसे ये सुनने को मिला पापा मैं बदल गई हूँ । पर किसी ने मेरे प्रति रूखे व्यवहार का अंदाज नहीं लगाया । मेरा दिल कितना दुखा।
“मुझे भी बहुत बुरा लगा बेटा । पर तुम्हारी मम्मी, बहनें भाई सब तुमसे प्यार करते हैं तुमने विरुद्ध जाकर शादी किया तो सबका गुस्सा तुमने झेला मैने तो तुम्हें कुछ नहीं कहा । “पापा ! आपका मौन ही मुझे ज्यादा दुखी कर गया । अजय ने चाय बनाकर देते हुए कहा…”कब से इसका मूड ठंडा कर रहा हूं पापा जी ! कल थोड़ी देर के लिए ठंडा हुआ इसकी एक दोस्त नीति मिल गई तो..अब फिर से आज शुरू ।
नारायण जी थोड़ा चौंकते हुए पूछे…”नीति ? तुम्हारी होने वाली भाभी का नाम भी नीति ही है । बहुत अच्छी लड़की है उसने बायो टेक्नोलॉजी से पढ़ाई की है, पापा नहीं हैं उसके । पहले हमलोग इलाहाबाद में थे ना वो भी कुछ समय वहां रही है । अब चौंकने की बारी शिखा की थी । उसने बोला कोई फोटो है तो दिखाइए पापा ।नारायण जी ने गैलरी से फोटो निकाल कर अपनी होने वाली बहु की फोटो दिखाई ।
शिखा आश्चर्य मिश्रित खुशी के भाव लिए जोर से उछल पड़ी । पापा…पापा ये तो नीति है ।तुम इसी की बात कर रही थी शिखा ? नारायण जी ने अजय और शिखा के चेहरे पर नज़र डालते हुए पूछा ।शिखा झूमते हुए बोली.. हाँ पापा !मेरी बचपन की सहेली । अब मजा आएगा शादी में । तकदीर हमें ऐसे मिलाएगी सोचा ना था । हमारा तो दोहरा रिश्ता हो गया । बहुत खुश हुए तीनों आपस में बात करके ।
शिखा ने चाय का कप रखकर तुरंत नीति को फोन लगाया..बगैर औपचारिकता के उसने कहा…”बधाई हो भाभी , मेरे घर में आपका स्वागत है । नीति ने टोकते हुए कहा..”बिन पिए झूम रही है क्या ? किस भाभी को फोन लगाया है नम्बर तो देख फोन में और क्या बातें कर रही। मैं नीति हूं ” ,। नीति ने हंसते हुए कहा । शिखा ने अपने पापा के फोन से बायोडाटा फोटो निकालकर नीति को भेजा । नीति का मुँह खुशी के मारे खुल ही नहीं रहा था ।
धैर्य बाँधते हुए नीति ने कहा..देख ! भगवान ने हमें किस रूप में मिलाया, कभी सोचा न था । दोनों ने एक दूसरे के साथ खुशी प्रकट करके खूब बातें की । बातों के बीच में दोनों सपने भी बुनने लग गईं तभी शिखा ने छेड़ते हुए कहा…”शादी में तो नहीं जाने की सोची थी लेकिन माहौल ही ऐसा हो गया कि अब आना ही पड़ेगा लेकिन तुम्हारी सास, ननद और पति से मेरी पटती नहीं सब नाराज बैठे हैं मेरी शादी से । तुम आओ तो सही समय से पहले मैं सबको मना लूंगी ।
और दोनों खिलखिलाकर हंस दी । नारायण जी ने अजय से कहा…”आप दोनों साथ में घर चलिए लेने आया हूँ और अब तो पूरा माहौल ही बदल गया ।
अजय शिखा और नारायण जी घर के लिए निकल गए।
रास्ते में नीति से जुड़ी बातें चलती रहीं कब घर आ गया पता ही नहीं चला । खूब चहल पहल देखकर मम्मी और संतोष बहुत खुश हुए । सारा माजरा नारायण जी ने बताया। सबकी समझ से बाहर था ।
शिखा ने मम्मी और भाई से गले लगकर माफी मांगते हुए कहा…”नए रिश्ते की खातिर पुराना खराब रिश्ता भूलकर नए जैसा सुंदर बनाना चाहती हूँ । सबके चेहरे खुशी से चमक रहे थे और रेखा दीदी को वीडियो कॉल में शामिल करके सब कुछ बताया गया । अब शादी की तैयारी जोरों से शुरू हो चुकी थी और शिखा को अपना #आत्मसम्मान एक नए रूप में वापस मिल गया था ।
#आत्म सम्मान
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