आँगन के चार धाम
केशव जी पास के ही एक सरकारी डाकघर में बड़े बाबू के पद पर कार्यरत थे। सीमित वेतन और ईमानदारी की कमाई से घर का चूल्हा तो सम्मान से जल जाता था, लेकिन विलासिता या अतिरिक्त खर्चों की कोई गुंजाइश नहीं थी। शारदा जी बेहद शांत, संतोषी और धर्मपरायण महिला थीं। मोहल्ले के किसी भी … Read more