आंसुओं का मुखौटा

धूल भरी पगडंडी से होते हुए जब विकास की गाड़ी पुश्तैनी हवेली के लोहे वाले बड़े दरवाजे के सामने रुकी, तो वहां पहले से ही गांव वालों की भारी भीड़ जमा थी। शालिनी ने गाड़ी का शीशा नीचे किया तो बाहर से आती अगरबत्ती, लोबान और रोने-पीटने की मिली-जुली आवाजें उसके कानों से टकराईं। आज … Read more

वंश का अभिमान: एक माँ की हुंकार

शिवानी अपनी तीन साल की नन्ही बेटी, काव्या को अपने हाथों से नाश्ता करा रही थी। काव्या की मीठी तोतली बातें और उसकी मासूम हंसी से पूरा घर गूंज रहा था। शिवानी के पति, राघव, अखबार पढ़ते हुए बीच-बीच में अपनी बेटी की हरकतों पर मुस्कुरा देते थे। बाहर से देखने पर यह एक बेहद … Read more

खानदान का चिराग: एक नई सुबह

 सुरभि जो अब तक खामोश थी, आज उसके सब्र का पैमाना छलक गया। वह हमेशा अपनी सास का सम्मान करती थी और उनकी कड़वी बातों को घूंट बनाकर पी जाती थी, लेकिन आज बात सिर्फ उसकी नहीं, उसकी बेटी मायरा के वजूद की थी।  सुरभि रसोई में सबके लिए अदरक वाली चाय और पोहा बना … Read more

बेनाम रिश्ते का बोझ

पिछले तीन दिनों से घर में एक अजीब सी खामोशी छाई हुई थी। यह खामोशी घर की दीवारों में नहीं, बल्कि स्नेहा के स्वभाव में थी। स्नेहा, जो पूरे घर की जान थी, जिसकी चहचहाहट से सुबह होती थी और जिसकी हंसी पर पूरा परिवार निहाल रहता था, वो अब एक बुझी हुई मोमबत्ती की … Read more

सांवली सी वो

 मीरा दीदी की पुरानी संदूकची को साफ करते हुए आज मेरे हाथ में एक पुरानी ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर लग गई। तस्वीर पर जमी धूल को मैंने अपने दुपट्टे के कोने से साफ किया, तो उसमें से दो चेहरे उभर कर सामने आए। एक तरफ मेरी बड़ी बहन कावेरी थी, और उनके ठीक बगल में … Read more

 मन का दर्पण

रात के करीब दस बज रहे थे। घर में एक अजीब सा सन्नाटा पसरा हुआ था, जिसे सुमित्रा जी की तेज और गुस्से से कांपती हुई आवाज़ ने चीर दिया। “राघव! मेरे कमरे में आ अभी के अभी!” सुमित्रा जी का चेहरा गुस्से से तमतमाया हुआ था और उनकी सांसें तेज़ चल रही थीं। राघव, … Read more

खामोशी के पीछे का तूफान

पार्वती देवी की अनुभवी आँखें पिछले कई दिनों से एक अजीब सा बदलाव महसूस कर रही थीं। उनका बेटा, समीर, जो हमेशा पूरे घर में अपनी हंसी और चुलबुलेपन से रौनक बिखेरे रहता था, आजकल एक गहरी और अनजानी उदासी की चादर ओढ़े हुए था। यह बात पार्वती जी को अंदर ही अंदर बहुत बेचैन … Read more

**सिंदूरी वादे की अनकही दास्तान**

लड़के वाले तो सिर्फ लड़की देखने आए थे, लेकिन जब दोनों परिवारों के बुजुर्ग एक साथ बैठे, तो तय हुआ कि बार-बार आने-जाने का खर्च और समय क्यों बर्बाद किया जाए। शुभ मुहूर्त भी था और लड़का भी साथ ही आया था, तो क्यों न आज ही हाथ पीले कर दिए जाएं और दुल्हन को … Read more

ममता का अनमोल आँचल

सुधा की शादी को पूरे दस साल बीत चुके थे, लेकिन उसके आंगन में अब तक किसी बच्चे की किलकारी नहीं गूंजी थी। मायके से लेकर ससुराल तक, हर जगह उसकी सूनी गोद को लेकर तरह-तरह की बातें होती थीं। कोई ताने मारता, तो कोई हमदर्दी जताता, लेकिन सुधा के दिल का दर्द कोई नहीं … Read more

दर्द की इंतहा – लक्ष्मी कानोडिया ‘अनिका ‘

“माँ, मैं शादी नहीं करना चाहती।” नंदिनी ने इतना कहा और चुप हो गई। कमरे में कुछ पल के लिए ऐसी खामोशी छा गई, जैसे किसी ने अचानक चलते पंखे की आवाज भी बंद कर दी हो। माँ ने उसकी ओर देखा। “क्यों?” “क्योंकि मैं अभी पढ़ना चाहती हूँ। नौकरी करना चाहती हूँ। अपने पैरों … Read more

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