आंसुओं का मुखौटा
धूल भरी पगडंडी से होते हुए जब विकास की गाड़ी पुश्तैनी हवेली के लोहे वाले बड़े दरवाजे के सामने रुकी, तो वहां पहले से ही गांव वालों की भारी भीड़ जमा थी। शालिनी ने गाड़ी का शीशा नीचे किया तो बाहर से आती अगरबत्ती, लोबान और रोने-पीटने की मिली-जुली आवाजें उसके कानों से टकराईं। आज … Read more