जमीन तो बिकनी ही थी – नीलम नारंग
मोहना कनाडा से आई शमशेर की चिठ्ठी पढ़ कर गुरदित को सुना रहा था | गुरदित की आँखों में ख़ुशी और दुःख के आंसू एक साथ बह रहे थे | चिठ्ठी के शब्द कम सुनाई दे रहे थे अतीत की बातें ज्यादा याद आ रही थी | “शमशेर ओ शमशेर कहाँ है , यार तेरा … Read more