भगवान से एक दोस्त की शिकायत  – मंजू तिवारी

 मैं अपनी दोस्त से बहुत प्यार करती हूं। शायद अपने आप से भी ज्यादा फिर भी मैं यह कहना चाहूंगी उसके प्रेम के सामने मेरा प्रेम वोना नजर आता है। जब मैं उसके साथ नहीं होती थी तुम मुझे बड़ी बेचैनी सी होती थी जैसे मेरे शरीर में आत्मा ही नहीं है। शायद उसको भी … Read more

कुछ ख़्वाब जो बने हकीकत – डॉ.नीतू भूषण तातेड

 मेरा एक ख़्वाब था कि लोग मुझे डॉ नीतू के नाम से जाने जो अब पूरा  हो चुका है….. बात लगभग आज से 35-36 वर्ष पहले की है जब मैं छठी कक्षा में पढ़ती थी ।पढ़ने में मेरी बिल्कुल भी रुचि नहीं थी। माँ-पिता की सबसे छोटी संतान होने के नाते अधिक प्यार ने मुझे … Read more

स्वयंसिद्धा – कमलेश राणा 

मिनी के पापा दिल्ली में एक प्राईवेट कंपनी में जॉब करते हैं,,मिनी से बड़ी बहन निधि और छोटा भाई विजय है,,   मिनी के पापा ने बेटे और बेटी में कभी भेद नहीं किया,,बेटियों को भी पूर्ण शिक्षित किया ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें किसी का मुंह न देखना पड़े और वो स्वाबलंबी बन सकें,, … Read more

हासिल आयी शून्य – श्रद्धा निगम

————————–  आज फिर मालती ने अपनी आदत से मजबूर होकर फोन पर हंसते हुए सामने वाले से कहा -अरे आओ,मज़ा आ जाएगा।सब मिल कर धमाल करेगे और ऐसा करना साथ मे शिखा  और मणि को भी ले आना।बहुत दिनों से कोई पार्टी नही हुई।हंसते हुए मालती ने फोन रखा ही था कि राहुल ने टोकते … Read more

खरी दोस्ती! – प्रियंका सक्सेना

काॅलेज में सभी के लिए सुधा और मीनल की दोस्ती मिसाल है। आर्थिक स्तर समान ना होते हुए भी दोनों ऐसे घुल मिल कर रहती मानों शक्कर पानी में घुली हों जैसे! सुधा मीनल में दांत-काटी दोस्ती है, पक्की वाली सहेली हैं दोनों बचपन से ही साथ पढ़ी-खेली हैं। मीनल का सपना है प्रतियोगी परीक्षाओं … Read more

विस्मृत नहीं होती है दोस्ती – अर्चना कोहली ‘अर्चि’

कस्तूरी के जाने के बाद दिल्ली शहर में मन नहीं लगा, चल पड़ी किसी ओर शहर की तरफ़। वैसे तो अपने गृहनगर भी जा सकती थी, पर वहाँ पर कोई भी तो अपना नहीं रहा था। माता-पिता  तो दो वर्ष पहले ही किसी हादसे में उसे छोड़कर जा  चुके थे।   कस्तूरी, उसकी प्रिय सहेली, … Read more

बूढ़ी घोड़ी लाल लगाम – श्रद्धा निगम

मधुको.आवाज़ देते हुए विवेक बैंक जाने के लिए तैयार हुआ. -शाम को तैयार रहना।आज हम सब घूमने चलेंगे,और रात का खाना भी बाहर ही खायेंगे। मां तुम भी तैयार रहना।– -अरे मैं क्या करूंगी जाकर ,तुम लोग चले जाना… -नही.. इस बार विवेक ने ज़ोर देते हुए कहा-बस चलना है…कोई टालमटोल नही.. विवेक  मालती का … Read more

संगीत – भगवती सक्सेना गौड़

एक विवाह समारोह मे सरिता आयी थी, रिसेप्शन समारोह की धूम थी, हर तरफ शोर , मस्ती का माहौल था। तभी किसी ने उद्घोषणा करी, अब सुनिए मेजर सागर नंदन की पेशकश, और उसमे लीन हो जाएं। तभी कोई माउथऑर्गन पर स्टेज में एक धुन बजा रहा था, ए मेरे वतन के लोगो, जरा आंख … Read more

गरीबी   – विजय कुमारी मौर्य”विजय”

चौराहे के बीच गाँधी जी की प्रतिमा के नीचे एक चबूतरे पर गरीब औरत दो बच्चों को लिए बैठी थी। कंकाल सी काया, पेट पीठ में समाया। सुबह का वक्त था, बड़ा बच्चा यही कोई तीन चार साल का और छोटा छ:सात महीने का होगा। बड़ा बच्चा बराबर रोये जा रहा था, जबकि छोटा माँ … Read more

वो बहुत वफादार था – ज्योति अप्रतिम

**************** श्रीमती सिन्हा के दिलोदिमाग में दो साल पुरानी मूवी फ्लेश बैक में चल रही थी । उन्हें वो दिन याद आ रहा था जब कालू पहली बार भरी बरसात में उनके घर आ पहुँचा था। रात के  11 बज गए थे । पिछले दो घण्टे से लगातार बारिश हो रही थी और थमने के … Read more

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