दोस्ती – पुष्पा पाण्डेय 

पत्नी की पुण्य तिथि पर जानकीदास जी वृद्धाश्रम में भोजन कराने गये थे। अचानक उनकी नजर एक जगह आकर ठिठक गई।  “कहीं आप रामाशीष तो नहीं हैं?” अपना नाम सुनते ही रामाशीष जी नजरें उठाकर देखे और आँखे नम हो गयीं।  “तुम यहाँ?” “हाँ, तुम्हारी बात नहीं मानने की यह सजा है।” दोनों दोस्त गले … Read more

अंतर्वेदना – सरिता गर्ग ‘सरि’

    बिस्तर पर पड़ी सिलवटें  उसके मन की सिलवट बन गईं। रात भर की थकन उदासी,और शिथिलता ओढ़े , मन में हवा के टूटे पंखों की छटपटाहट लिए बेजान पैरों से चलती वो , हवा में  रात का ठहरा हुआ जहर पीती सूर्योदय से पूर्व ही सागर-तट पर चली आई। दूर समुद्री पक्षी लगातार चीख रहे … Read more

एक थी सिद्धि – सीमा वर्णिका

आज आँसू थमने का नाम ही नहीं ले रहे ..अश्रुओं की अविरल धारा ने अतीत पर जमी धूल को हटाकर जैसे  अनावृत कर दिया हो । सब कुछ चलचित्र भांति आँखों के समक्ष घूम रहा है। वह मेरी मित्र थी..या कोई रूहानी  सम्बन्ध था उससे ..आज तक मन समझ न पाया । ‘सिद्धि ‘-हाँ यही … Read more

अहसास – सरिता गर्ग

  कैसा खूबसूरत था वह दिन जब धरती का चाँद अपनी धड़कनें समेटे मेरे आँगन में उतरा था , मगर मेरा दुर्भाग्य मुझसे दस कदम आगे चल रहा था। मैं नहीं जानता था सुख के मुट्ठी भर पल ही  मेरे हिस्से में आने हैं।                  तुम मुझे छोड़ कर चली गईं। लाल साड़ी में लिपटा तुम्हारा निष्प्राण … Read more

परिवर्तित स्वरूप – कंचन शुक्ला

सोलह साल, कक्षा नौ की छात्रा लवलीन को, कमरे में रोता देख मम्मी ने, तुरंत वहाँ जाना उचित नही समझा। जैसे ही सिसकियों का सिलसिला कुछ देर में धीमा हुआ, नॉक कर वह अंदर दाखिल हुईं। सहसा उन्हें वहाँ देख, लवलीन सतर्क हो गयी। विषय के मद्देनजर, किसी सकारात्मक वार्तालाप की आशा नही थी, उसे। … Read more

ख़्वाबों की तामील – कंचन शुक्ला

कोपल हमेशा अपने रंगीन ख्वाबों की तामील में डूबी रहती। शादी के आठ महीने बाद भी, कपिल में अपने पसंदीदा बॉलीवुड अभिनेता की छवि तलाश रही है। पतिदेव कपिल पता नही शर्माते थे, या उनके सब शौक पूरे हो चुके थे। इन सब बातों से वे अनछुए, अनभिज्ञ थे। काल्पनिकता और अव्यवहारिकता, उन्हें बिल्कुल नही … Read more

ननद भौजाई – दीप्ति सिंह

छवि और सुहानी का याराना आठवीं कक्षा से शुरू हुआ । जहाँ छवि को सरोज अग्रवाल कड़क कक्षा अध्यापिका के रूप में मिली। यही सरोज अग्रवाल सुहानी की माँ थीं घर में एक बड़ा भाई प्रतीक था  । पिता तो अब इस दुनिया नही थे। छवि ,प्रतीक को सुहानी की तरह ‘भईया ‘ नही कह … Read more

विदेश – डॉ. नीतू भूषण तातेड

पड़ोस वाली मंजुला को बताते हुए कलिका चहकती हुए कह रही थी,”मेरा रोहन बड़ा होकर विदेश ही जाएगा ।क्या रखा है देश में? वहाँ देखो! सब कुछ साफ सुथरा ,बड़ी और चमकीली गाड़ियाँ, सुंदर-सुंदर इमारतें और भरपूर पैसा।” अपनी  बेटे रोहन के मन में बचपन से एक ही बात घर कर दी गई थी कि … Read more

लड़का लड़की दोस्त भी हो सकते है – संगीता अग्रवाल 

दोस्ती खून के रिश्तो से अलग ऐसा रिश्ता जिसमे कोई स्वार्थ नही होता। दोस्ती तो बूढ़े बच्चे मे , अमीर गरीब मे या लड़का लड़की मे भी हो सकती है।  एक सच्चा और प्यारा दोस्त है कई रिश्तो के बराबर है …आइये आपको एक प्यारी सी दोस्ती की कहानी सुनाते है। ” क्या रितेश मैं … Read more

अनोखी दोस्ती – निभा राजीव “निर्वी” : Moral stories in hindi

सतीश जी इस कार्यालय में वित्तीय विभाग में कार्यरत थे। उस दिन वह कार्यालय से बाहर निकले तो कार्यालय के बगीचे का माली रामप्रसाद आंखों में आंसू लिए बैठा दिखाई दिया। सतीश जी उसके पास पहुंचे और सहानुभूतिपूर्वक उससे पूछा “- क्या हुआ रामप्रसाद ? इतने परेशान क्यों दिखाई दे रहे हो?”.….. रामप्रसाद अचानक से … Read more

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