दूसरी तनख्वाह – कंचन श्रीवास्तव
प्रभात उठो न कितनी देर हो गई देखो न दिन चढ़ आया। बच्चों को छोड़ना है दूध लाना है,और तुम्हें ताज़ी सब्जियां खाने का शौक है तो उन्हें भी लाना है। फिर कहीं जाके दफ्तर जा पाओगे, कहती हुई बालों में उंगली फेरती सुधा धीरे से बिल से उठी और सीधे बाथरूम में चली गई। … Read more