दोस्ती – पुष्पा पाण्डेय
पत्नी की पुण्य तिथि पर जानकीदास जी वृद्धाश्रम में भोजन कराने गये थे। अचानक उनकी नजर एक जगह आकर ठिठक गई। “कहीं आप रामाशीष तो नहीं हैं?” अपना नाम सुनते ही रामाशीष जी नजरें उठाकर देखे और आँखे नम हो गयीं। “तुम यहाँ?” “हाँ, तुम्हारी बात नहीं मानने की यह सजा है।” दोनों दोस्त गले … Read more