रास्ता बहुत सुनसान था!  – मनीषा भरतीया

रास्ता बहुत सुनसान था. आज रागिनी को ऑफिस से निकलने में कुछ ज्यादा ही देर हो गई थी. जहां वह 5:00 बजे ऑफिस में निकलती थी, आज बॉस के कहने पर एक जरूरी असाइनमेंट पूरा करने में उसे 3 घंटे लग गए क्योंकि उसे आज ही पूरा करना था.  एक तो ठंड के कारण 5:00 … Read more

  दोस्ती हो तो ऐसी – मनीषा भरतीया

दोस्तों दोस्ती का रिश्ता ही ऐसा होता है …जो इंसान अपनी मर्जी से बनाता है…..बाकी सारे रिश्ते जैसे माता-पिता ,भाई-बहन, दादा-दादी यह सब तो हमें विरासत में मिलते हैं…जिसे हम चुन नहीं सकते… दोस्ती इंसान की कहीं भी किसी से भी कभी भी हो सकती है…. यह अमीरी गरीबी ,छोटा बड़ा ,ऊंच -नीच के भेद … Read more

दोस्ती : एक विश्वास   –  आरती झा”आद्या”

मोहित गाड़ी से उतर यंत्रचालित सा चलता हुआ एयरपोर्ट के अंदर आकर बैठ गया। होनहार प्रतिभावान मोहित के लिए एमबीए खत्म होने से पहले ही लंदन की एक नामी गिरामी कंपनी से लंदन या भारत कहीं भी जॉइन करने के लिए जॉब ऑफर आ गया था। मोहित जो कि पहले मन ही मन भारत में … Read more

बच्चे मन के सच्चे – मनी शर्मा

बच्चे कितने सरल होते हैं। ऊँच नीच जात पात किसी का भेद नहीं समझते बस अपनी सच्ची नज़र से दुनिया देखते हैं। उस दिन हमारे घर काम करने वाली सोनी के साथ उसकी पाँच वर्ष की बेटी आई। एक बार तो मैं देखती रह गई। गोरा रंग, बड़ी बड़ी आँखों में मोटा मोटा काजल ,गोल … Read more

रूधिरा एक छलावा ” – रीमा महेंद्र ठाकुर

“समन्दर की लहरें उफान पर थी”  छोटे छोटे पत्थरो के ऊपर से गुजरते हुए एक बच्चा तेजी लहरों की ओर बढ रहा था “ बेटा, ज्यादा तेज मत भागो “कंक्रीट है चुभ जाऐगी” पीछ से मां आवाज लगा रही थी!  नो मम्मा “” सूज है न, बच्चा रुककर “पैर ऊपर उठाकर माँ को” दिखाते हुए … Read more

अमानत – अनुपमा

निशा कहां हो तुम … निशा निशा … आवाज देते देते आकाश सीधे उसके कमरे मैं घुस गया , वहां निशा को रमन के साथ देख कर बोला अरे तू  यहां कब आया .. कब से आवाज दे रहा हूं तुझे सुनती क्यों नही और हां अच्छा हुआ तू भी यही है चलो आज नई … Read more

परम्परा के लीक से हटकर एक नई पहल -सुषमा यादव

,हम भारतीय अपनी जिंदगी में बहुत से पुरानी प्रथाओं , परम्पराओं और रीति रिवाजों से अपने पुर्वजों के जड़ों से जुड़े हुए हैं,, इनमें बहुत सी कुरीतियों और कुप्रथाओं तथा अंधविश्वासों से धीरे धीरे हम मुक्ति पा रहें हैं,, पर कुछ रीति रिवाज, संस्कार ऐसे भी हैं,जो हमें निभाने पड़ते हैं, लेकिन हम समयानुसार उसमें … Read more

दोस्ती – प्रियंका त्रिपाठी ‘पांडेय’

जतिन और नितिन दोनों बचपन के दोस्त थे। दोनो साथ-साथ खेले कूदे। स्कूल कालेज तक की पढ़ाई भी साथ में पूरी की। दोनों होनहार थे इसलिए दोनों की सरकारी नौकरी भी लग गई। जतिन नितिन एक दूसरे से अपनी हर बात साझा करते थे,एक दूसरे के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते थे। दोनो … Read more

 रिश्ता तेरा मेरा  – बेला पुनीवाला

  तेरी मेरी बातें जो कभी ख़तम नहीं होती,                    जब हम साथ थे, साथ में कॉलेज आना, जाना, वो बातें, वो मुलाकातें, कॉलेज में lecture bunk करके तेरे साथ सीढ़ियों पे बैठें रहना, इधर-उधर की बातें करना, सबको चिढ़ाना, मस्ती करते रहना, तेरे साथ रोज़-रोज़ कॉलेज की canteen में वड़ापाव और कचोरी खाने … Read more

माधुर्य – कंचन श्रीवास्तव

रवि के जाने के बाद रेखा बिल्कुल अकेली पड़ गई,पड़ती भी क्यों ना हर वक्त उसी के आगे पीछे जो घूमती रहती । उसे तो अंदाजा भी नहीं था कि ऐसा होगा उसकी जिंदगी में ,पर हुआ। अब मरता क्या न करता अपने किए की सजा तो पानी ही है। उसे अच्छे से याद है … Read more

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