असलियत – लखविंद्र सिंह संधू
मैंने जैसे ही आफिस की पार्किंग में कार पारक की । हररोज की तरह मेरा सेवादार सामने मेरा बेैग पकड़ने के लिए खड़ा था । “सर आपसे कोई मिलने आया है” बैग पकड़ते ही उसने कहा । मैं जल्दी से अपने ऑफिस में पहुंचा तो सामने मेरा दोस्त गुरबक्श और उसकी बेटी रिम्पी खड़े थे … Read more