असलियत – लखविंद्र सिंह संधू

मैंने जैसे ही आफिस की पार्किंग में कार पारक की । हररोज की तरह मेरा सेवादार सामने मेरा बेैग पकड़ने के लिए खड़ा था ।  “सर आपसे कोई मिलने आया है” बैग पकड़ते ही उसने कहा । मैं जल्दी से अपने ऑफिस में पहुंचा तो सामने मेरा दोस्त गुरबक्श और उसकी बेटी रिम्पी खड़े थे … Read more

“कर्मो का फल”  – कविता भड़ाना

रीमा आज बहुत खुश है। सुबह से ही तैयारियों में लगी हुई है। तरह तरह के पकवानों की खुशबू से पूरा रसोई घर महक रहा है, नए परदे, बेडशीट, पायदान और फूलदानों में रखे हुए ताजे फूल,…. पूजाघर से आती भीनी भीनी धूपबती की महक से पूरे घर का वातावरण बहुत खुशनुमा हो रहा है।…. … Read more

मनिया! – सारिका चौरसिया

गरमागरम पुरियों की भीनी भीनी खुशबू से उसके मुंह मे पानी आ रहा था। इधर कड़ाही से पूरियां उतरती उधर वह दौड़ दौड़ सबकी प्लेटों में परोसने चली जाती। जब तक वह दूसरी खेप ले कर पहुंचती तब तक पहली ख़ेप की पूरियाँ प्लेटों से गायब दिखती। भूख उसे भी लगी थी,उसने तो सुबह से … Read more

मर्म – नम्रता सरन”सोना

चारों देवरानी जेठानियों मे खुसुर पुसुर हो रही थी। “दीदी, बिल तो अच्छा तगड़ा बना होगा” रीत ने कहा। “हाँ भई, अब इतने बड़े हॉस्पिटल में  इलाज हो  तो बिल तो बनना ही है” गोमती ने कहा। “हाँ, वही तो, मैं तो इनसे कह भी रही थी कि आजकल तो पैसे वालों को ही बीमार … Read more

दावत और दादी मां – डा. मधु आंधीवाल

आज शहर के जाने माने उद्योग पति मि.नरेश खन्ना का बंगला ” आशियाना ” की सजावट एक अनोखी भव्यता दे रही थी । मि.खन्ना और उनकी पत्नी चारूलता दोनों ही एक गर्वीला व्यक्तित्व था इस शहर में । चारूलता जिस कार्यक्रम में होती अन्य महिलायें उनको ईष्या की नजर से देखती क्योंकि वह अपने सामने … Read more

दतिया का  डरावना  घर – सुषमा यादव

इनकी पहली पोस्टिंग दतिया जिले में हुई थी,, इन्होंने एक अच्छा सा मकान लिया और मुझे बुलाने आ गये,उस समय मैं म . प्र. के एक और जिले में नौकरी कर रही थी,, मैं बहुत खुश होकर मेडिकल अवकाश पर इनके साथ दतिया में उस नये मकान में रहने पहुंची,,घर बहुत अच्छा था, मुझे बहुत … Read more

“अनोखा रक्षाबंधन ” – अनुज सारस्वत 

“दादी दादी यह रक्षाबंधन क्या होता है मम्मी कह रही थी मामा आएंगे हम मिठाई खाएंगे”  6 साल के हर्ष ने अपनी दादी से कौतूहल वश पूछा ,हर्ष इकलौता बेटा था  फिर दादी बोली “बेटा भाई बहन का त्यौहार होता है यह, भाई अपनी बहन की रक्षा करने का वचन देता है जब बहन राखी … Read more

कड़क चाय: – मुकेश कुमार (अनजान लेखक)

शायद ही कोई चाय का शौक़ीन होगा जो कभी ना बोला हो की चाय थोडी कड़क लाना या बनाना। आप किसी भी हाल में हों: ख़ुश, नाराज़, दुखी, गमगीन या मस्तमौला, किसी के सताए हों, किसी से दग़ाबाज़ी मिली हो या किसी ने परेशान कर के थका दिया हो। चाय हर हाल में आपको वही … Read more

रखवाला – गीतांजलि गुप्ता

<p><span style=”font-weight: 400;”>”ओ छोरे ठीक से काम कर वर्ना निकाल दूंगा नौकरी से। आलसी कहीं का जल्दी जल्दी हाथ चला कर मेजे साफ़ कर फिर बर्तन भी धो पोंछ कर लगा सारे।” रोज डयूटी पर आते ही लाला की यही आवाज़ बारह वर्ष के कांशी के कानों को चीरती और बेचारा भूखा बच्चा जल्दी जल्दी … Read more

खुशी – सुधा शर्मा

   शाम के साथ ही जैसे डूबते सूरज के साथ ही मन भी डूबने लगा था , रात की गहराती स्याही उतरने लगती थी चेतना में ।बरामदे में गौरी पिछले कुछ समय में घटी घटनाओं की त्रासदी में डूबने लगी थी।         कितना प्यारा भरा पूरा परिवार ।बेटा , बहू, सात वर्ष की चहचहाती पोती।बेटा कनाडा में … Read more

error: Content is protected !!