सूनी कलाई पर बंधा रक्षा सूत्र* –       बालेश्वर गुप्ता

 माँ, तुम ठीक तो हो ना?आज रक्षाबंधन है, पर मेरी तो कोई बहन ही नही है, अब तक हमेशा कलाई सूनी ही रही है माँ, दूसरे लोगो के हाथ मे राखी और बाजार में अपनी बहनों के लिये खरीदते लोगो को देख, मेरा तो दिल मुरझाया ही है।पर माँ इस बार मेरा हाथ राखियों से … Read more

 वादा राखी का – बेला पुनीवाला

 डॉली का घर आज सुबह से सजाया जा रहा था, जैसे दिवाली पे घर सजाते है। डॉली के माँ-पापा और डॉली की भाभी, सब लोग आज बहुत ही खुश थे। डॉली ने अपनी माँ को चिढ़ाते हुए कहा, ” वाह, मम्मी क्या बात है, आज रसोई से सुबह से ही बहुत ही अच्छी-अच्छी खुशबु आ … Read more

इंसानियत जिंदा है अभी! – प्रियंका सक्सेना

आज सबमिशन की डैडलाइन थी, प्रोजेक्ट हैड होने के कारण सुनंदा की जिम्मेदारी थी। सुनंदा जल्दी जल्दी अपना काम निबटा रही थी, एक नजर घड़ी पर देख उसके हाथ और तेजी से कम्प्यूटर पर चलने लगे। शाम के सात बज चुके थे, फटाफट सभी फाइलें भेजी फिर क्लाइंट का कन्फर्मेशन आने के बाद उसने चैन … Read more

माँ जाये –  दीप्ति सिंह

    सारा  कुनबा  एक  ही  शहर  में  बसा  होने  के कारण  बुआ जी  दोनों  ताऊओं  को  राखी  बाँध कर  आ  गयी  थीं।मैंने  भी  अपने  भाई  विजय  व भाभी  को  राखी  बाँधी  और  बुआ  जी  ने  पिताजी -माँ  को।  कुछ  देर  बाद  बड़े  ताऊजी  के  बेटे  श्याम भईया अपनी  बहन  मीता दी  और  रमा भाभी  ,दोनों … Read more

  बारिश का महीना – बेला पुनीवाला

  बारिश का महीना चल रहा था और दोस्तों, आप सब तो जानते ही है, कि बारिश का महीना  खुशियों के साथ-साथ तूफान भी लाता है, कोई बारिश के मौसम में घर पे चाय और पकोड़े खाने का मज़ा ले रहा है, तो छोटे-छोटे बच्चे कागज़ की नाव बनाकर उसे पानी में बह जाने देते है … Read more

हृदय परिवर्तन – गोमती सिंह

—–एक गांव के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में एक शिक्षक हुआ करते थे श्रीमान राजेश पटेल , इनका एक नियम था कि 12 वीं की परीक्षा के परिणाम घोषित होने वाले दिन उस विद्यालय में अध्ययन रत 12वीं कक्षा के सभी विद्यार्थियों को सिर्फ आधे घंटे  की सामाजिक विज्ञान की अतिरिक्त शिक्षा  देते थे ।          तुषार … Read more

मेरे सपनों का घर – मंगला श्रीवास्तव

माही का बचपन से ही सपना  था कि उसका अपना एक सपनों का घर होगा । जब छोटी थी तब सब लोग उससे कहते कि एक दिन तुझकों ये घर छोड़ कर अपने घर जाना होगा ससुराल ! जब वह अपनी माँ से पूछती थी क्या ये मेरा घर नही है माँ ,और रोने लगती … Read more

अंतर्मन – सुधा जैन

वसुधा अपने पति सुधीर और अपने दो बच्चों रोहित और रूपल के साथ अपने जीवन का आनंद ले रही थी ।बड़ी बिटिया रूपल का शिक्षा पूर्ण करके योग्य वर देखकर उसका विवाह कर दिया। रोहित को बचपन से ही देश सेवा की भावना थी, और वह उसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए सेना में चला … Read more

एक दूसरे से आजादी – सुधा जैन

“अब आप दोनों एक दूसरे से आजाद हो” कहते हुए कोर्ट में वकील ने उन्हें बधाई दी ,और उन दोनों का तलाक मंजूर हो गया। अवनी और अमन  के वैवाहिक जीवन को 12 वर्ष हो गए । 8 वर्ष  तक दोनों साथ में थे और 4 वर्षों से तलाक का प्रकरण चल रहा था। जैसे … Read more

बदलाव* –  मुकुन्द लाल

दफ्तर की ड्यूटी से लौटने के बाद कौशल जब घर पहुंँचता तो उसकी नवोढ़ा धर्मपत्नी के जूड़े में गुंथे हुए फूलों की खुशबू उसके होश ऐसे उड़ा देते थे कि उसको अपने बच्चों की सुध लेने की जरूरत ही महसूस नहीं होती थी। ज्योति अपने पापा को टुकुर-टुकुर देखती रह जाती थी,  किन्तु उसको कुछ … Read more

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