एक खुशी उसके लिए जो आपको खुश रखती है – अंजु अनंत

जब से मयूरी मेरी ज़िंदगी मे आई है उसने मेरी जिंदगी सवार दी। मेरी जरूरत मेरी पसंद-नापसंद का ख्याल कितने अच्छे से रखती है वो… माँ के बाद एक वही है जिसने मेरा इतना ख्याल रखा। बचपन में मेरी माँ मेरे एग्जाम टाइम में रात-रात भर मेरे साथ जगती थी बीच-बीच मे पानी और गरम … Read more

*संघर्ष अभी शेष है* – सरला मेहता

” माँ माँ ! अब पापा तो वापस नहीं आएँगे, आप कितने भी आँसू बहाओ। चलिए कुछ खाकर दवाई  ले लीजिए। ” गर्विता, माँ वसुधा को दिलासा देते हुए कहती है।  अभी अभी दोनों लौटी हैं गणतंत्र दिवस  समारोह से। आज गर्विता क पिता शहीद मेजर पुनीत मेहरा जी को मरणोपरांत परमवीर चक्र सम्मान से … Read more

पुनर्वास – कमलेश राणा

टीवी में गाना चल रहा था,, अबके बरस भेज भैया को बाबुल,सावन में लीजो बुलाय रे,,   सावन का महीना हो और पीहर की याद न आये,,ऐसा हो ही नहीं सकता,,   रेणू बहुत कोशिश करती है अपने जज़्बातों पर काबू पाने की ,,पर जब बच्चे उससे उसके बचपन और नानी के घर के बारे … Read more

गुरु मंत्र – अंजू निगम

मैं अपनी ही बहन का फोन “इग्नोर”करने लगी थी|मुझे लगता कि वो हर बात को लेकर कुछ  ज्यादा ही परेशान हो जाती हैं|फिर वो समय नहीं देखती और तुरंत मुझे फोन कर देती|    बाई के न आने या नलके में पानी न आने जैसी छोटी बाते भी उसे बेतरह परेशान करती|समय के साथ उसकी ये … Read more

ज्यादतियां अब और बर्दाश्त नही करुगी!! –  मनीषा भरतीया

संयुक्त परिवार में दादा दादी, चाचा चाची , मां पापा, सब के लाडं  प्यार में पली बड़ी होने के बावजूद शीला बहुत ही संस्कारी और सुलझी हुई लड़की थी।,’ बड़ों को मान और छोटो को प्यार देने में वह कभी नहीं चूकती थी।, पढ़ाई से लेकर बाकी सभी दूसरे कामों में निपुण थी।  ,’ सबको … Read more

आहुति – विनोद साँखला

” भला ऐसे भी कोई अपनी जान थोड़े ना दे देता है, ज़रूर इसका शहर में किसी ना किसी के साथ कोई टांका ज़रूर भिड़ा होगा..” मिसेज़ चौबे ने अपनी राय दी। ” हाँ-हाँ बहनजी मैंने भी सुना है की शहर में रहकर शराब भी पीने लगी थी” मिसेज़ बघेल ने भी हाँ में हाँ … Read more

चलो न बुआ! – Moral Stories In Hindi

रमा जी नहीं चाहतीं कि रक्षाबंधन का पर्व आए, न इस वर्ष न कभी भविष्य में! पिछले साठ सालों से जिसकी कलाई पर रक्षा सूत्र बाँध ये त्योहार मनाती आ रही थीं, उसने तो, बिना कोई इशारा दिए, सब नाते तोड़ लिए! अब किस काम का रह गया ये दिन ….. सिवाय दर्द देने के! … Read more

राखी का तोहफ़ा – प्रेम बजाज

ये उन दिनों की बात है जब करोना की महामारी फैली थी और बहुत से लोगों की नौकरी भी छूट गई थी, हमारे पड़ोस में रहने वाले रमेश की भी नौकरी छूट गई,  जैसे-जैसे समय बीता थोड़ा सा कुछ जमापूंजी थी सब खत्म हो गया, खाने तक के लाले पड़ गए, 5-6 महीनों में बूरा … Read more

रक्षक – कमलेश राणा

एक दिन हम स्कूल से लौट रहे थे कि एक जगह भीड़ देख कर रुक गए,,वहां लोग अधेड़ उम्र के पुरुष को पीट रहे थे,,   पूछने पर पता चला कि  वह रेल्वे स्टेशन के पास बने छोटे से होटल पर चाय पी रहा था,,अभी-अभी पैसेंजर से उतरा था,,वो एक बड़ा सा बोरा लिये था … Read more

ससुराल का सरनेम – डॉ पारुल अग्रवाल

आज दिव्या बहुत परेशान थी, रह-रहकर उसे अपनी चाची सास का व्यवहार बहुत कचोट रहा था।असल में हुआ ऐसा था उसकी ससुराल जहां थी वहां पर एक बहुत बड़ा सामाजिक आयोजन हुआ था जिसमें दिव्या को भी सम्मानित किया जाना था। दिव्या शादी से पहले भी पढ़ाई- लिखाई में काफी अच्छी थी और एक अच्छे … Read more

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