सच्चाई का आईना – गुरविंदर टुटेजा

अप्रकाशित     संजना आज शाम को तैयार रहना..डॉ० अभिमन्यु के हॉस्पिटल का उदघाट्न है…नीरज ने आफिस के लिये निकलते हुये बोला…!!!!    संजना शाम को समय से तैयार हो गयी थी…नीरज आया और दोनो निकल गयें…रास्तें में बात करते हुये नीरज ने बताया बहुत बड़े मंत्री आ रहें है उदघाट्न करने के लिये…!!!!    दोनों पहुँच गयें थे…अभिमन्यु … Read more

 ” रक्षाबंधन” – गोमती सिंह

——सुबह के 8:00 बज रहे थे पावन महीना सावन फिर पूर्णमासी का दिन था मां सुबह 6:00 बजे भोर से ही    उठ कर नहा धोकर अपने बच्चों के लिए खीर पूरी बना रही थी दोनों लड़कियां भी उठकर नहा धोकर तंग  तैयार हो गई थी। अपने दोनों छोटे छोटे भाइयों को बड़े प्यार से … Read more

 बहन की राखी – पूजा अरोड़ा

“इस बार  सुषमा बहन की राखी नहीं आई। ईश्वर करे सब ठीक-ठाक हो।” बिस्तर पर पड़े हुए सुखदेव बोला। उम्र कोई अस्सी साल । कमजोर शरीर। जर्जर काया मानो बुढ़ापे का एक-एक दिन बस काट रहे हो.. “दादा जी!  क्या हो गया जो आपकी बहन सुषमा की राखी नहीं आई । आपको तो उनसे मिले … Read more

खिला खिला मन – लतिका श्रीवास्तव 

.सभी को खाना खिलाने के बाद सुमी अपने लिए भी थाली लगा रही थी….ये उसका रोज का नियम था सबको गरम गरम खाना खिलाने के बाद ही वो खुद खाना खाती थी ….. वर्षों से यही नियम चला आ रहा था …पर आज अचानक उसे अपना मन कुछ बुझा बुझा सा प्रतीत हो रहा था…जाने … Read more

स्कूटी से पहली लौंग ड्राइव!! –  मनीषा भरतीया

रमन 15 दिन पहले से बहुत आनंदित था क्योंकि वह पहली बार स्कूटी से लॉन्ग ड्राइव करने वाला था अपनी पत्नी रीना के साथ करीब 60 किलोमीटर अप और 60 किलोमीटर डाउन की यात्रा थी वह स्कूटी से टाकी जाना जाता था. उसकी पत्नी रीना ने उसे बहुत समझाया रमन तुम मान जाओ हम गाड़ी … Read more

राखी की सही हकदार – आरती झा”आद्या”

दिल्ली से सटा छोटे से गाँव में दो हजार एक की 13 जुलाई  की सुबह बीस साल की स्नेहा अपने कमरे से निकल रेलिंग पकड़े नीचे आँगन में बैठे माता पिता को देख रही थी। दो साल पहले की हो तो बात है, उसके चौबीस साल के उम्र के भाई शिवम ने आर्मी जॉइन किया … Read more

  *मैं हूँ ना* – सरला मेहता

कमर पर लटका मोबाइल निकाल नम्बर घुमाकर बोली, ” हाँ भाभी ! मैं दो दिन काम पर नहीं आऊँगी, थोड़ा आराम करुँगी। यह है सुमन ताई, कद्दावर कद काठी की। तीखे नयन नक्श  व मेहनत की घाम से पका ताम्बई रंग। चारित्रिक  से ताँबे में भी सोने की झलक सी है। अँगूठाटेक है किंतु फोन … Read more

भाइयों के लिए – निभा राजीव “निर्वी”

दिव्या की आंखें रह-रहकर भर आ रही थी। इसी साल उसने अपने फौजी भाई को खो दिया था। उसका भाई पूरी वीरता के साथ देश के लिए लड़ते हुए सीमा पर शहीद हो गया था। तिरंगे में लिपट कर आया था उसका शव! आंखें नम हो गई थी पर मस्तक गर्व से उन्नत ! ऐसी … Read more

रेड ड्रीम्स – ईशा मृदुल

“मुझे पता है लड़कियों को अलग तरीके से रखा जाता है, उन्हें सिर्फ परवरिश ही नहीं उन्हें एक तयशुदा जिंदगी सिखाई जाती है। बहुत शुरू से ही उस औहदे पर तैयार होती है लड़कियाँ जहां उन्हें दूसरों के सपने, दुसरों का घर, उनकी इज्ज़त, मान मर्यादा का ख्याल रखना पड़ता है। हमने लड़कियों को कभी … Read more

कामना – कंचन श्रीवास्तव

राधिका ने हंस कर सबका स्वागत किया……..। आइए आइए कैसे हैं आप सब बैठिए बैठिए और दीदी कैसी है आप बच्चे तो दिख रहे पर जीजा जी कहां है। कुछ नहीं बस उन्हें काम थोड़ा ज्यादा था , इसलिए वो बोले तुम चली जाओ फिर हमें भी तो…….। हां वो तो है ये दिन ही … Read more

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