डस्टबिन – नीरजा कृष्णा

सुधांशु जी के घर में आज खूब रौनक है। तीन बेटों के विवाह के बाद आज उनकी इकलौती बिटिया निशा की बारात आने वाली है। उनके इतने बड़े बंगले में ही विवाह का आयोजन होने जा रहा है। वरपक्ष की इच्छानुसार एकदम देशी खाने पीने की व्यवस्था हो रही है। आँगन के एक कोने में … Read more

ख़्वाहिशों का कोना इस मन के अंदर भी है – रश्मि प्रकाश

“कभी कभी प्यार से भरा मन भी रिक्त होता है.. हमारे पास सुख सुविधा की हर चीज उपलब्ध होती हैं फिर भी हमारे मन का एक कोना जाने क्यों खाली खाली सा रह जाता। जानती है मैं कितनी खुश रहा करती थीं पर अब चिड़चिड़ी सी रहने लगी हूं।मेरा मन नहीं करता अब कही भी … Read more

” मेरे भैया ” – रणजीत सिंह भाटिया

 सरला जो की अनाथ आश्रम में पली थी l  रजत ने उससे शादी की इसलिए घर वाले उससे बहुत नाराज थे l कॉलोनी वाले सब सरला को भाभी कहते थे l एक तीन साल का प्यारा सा बेटा था सरला अपनी छोटी सी गृहस्थी मैं बहुत खुश थी l अपने आंगन में फूल सब्जियां उगाती, … Read more

 साजन घर आए  – अनिता गुप्ता

भानू प्रताप सिंह के घर से लेकर बाहर मोहल्ले तक फूलों से सजावट हो रही थी। जगह – जगह फूलों के दरवाज़े बने थे और भानु प्रताप सिंह जिंदाबाद लिखा था। बैंड वाले स्वागत धुन बजा रहे थे। पूरा मोहल्ला ठसाठस लोगों की भीड़ से भरा हुआ था। मोहल्ले के बाहर भी बहुत लोग जमा … Read more

सगे भाई का फर्ज – अनामिका मिश्रा 

सविता के दो बच्चे थे और उसके पति छोटी-मोटी नौकरी करते थे। वो एक स्कूल में शिक्षिका थी।  छोटे बच्चों को पढ़ाया करती थी।  सविता बहुत ही मिलनसार स्वभाव की थी सब स्कूल में उसे पसंद करते थे। एक दिन प्रधानाध्यापक ने किसी स्टाफ से पूछा, “मोहन, क्या बात है चार दिनों से सविता नहीं … Read more

*राखी* – नम्रता सरन”सोना”

हर वर्ष की तरह रागिनी ने इस बार भी रक्षाबंधन की तैयारी कर रखी थी… अपने भाई के लिए सुंदर सी राखी… भाभी के लिए कंगन और साड़ी.. नारियल… रुमाल…घेवर…फ़ैनी…और भी बहुत कुछ… जो भी उसे याद आया..एक एक चीज़ बड़े ही प्यार से संजोई थी…कि जब भाई राखी बंधवाने आए तो कोई कोर कसर … Read more

मेहंदी का रंग – दीप्ति सिंह

आज शकुंतला के सामने पिछली कई तीजों के दृश्य घूम गये। छोटी बहू श्यामली  सबके हाथों में मेहंदी लगा कर अपने बाईं हथेली को सुंदर तरीके से मेहंदी से अलंकृत करती तथा पति तुषार से दाईं हथेली पर एक गोल टिक्की बनवा कर अपना और तुषार का नाम लिखवाती थी। तीज के दिन उठ कर … Read more

शादी के बाद की पहली राखी – उषा गुप्ता

शादी के बाद की पहली राखी !!कितना बेकरार दिल !  मन तो बस रमा रहता है भाइयों को राखी बांधने के लिए। मैं भी बहुत बेकरार हूँ इस रक्षाबंधन के लिए।वैसे भी शादी के बाद शुरू -शुरू में पीहर और राखी का त्यौहार बहुत ही याद आता है।जैसे-तैसे अपने ससुराल में मैंने सब को मनाया … Read more

 बेटी होने की जिम्मेदारी – सुमन श्रीवास्तव

सुरु वो सुरु ” देखो बेटा, सुमित के कमरे की सफाई ठीक से कर देना । ऐसा न हो तेरे भईया भाभी को आने के बाद किसी किस्म की परेशानी हो और हां जिस समान की जरूरत हो बाजार से मंगवा ले। मुझे देखने के लिए कितना लम्बा सफर करके आ रहे हैं। “सुरुभि ” … Read more

प्रेम का एक रूप यह भी – वीणा

ये फगुनिया,कब आई ससुराल से –बालचन ने टहोका मारते हुए पूछा… फगुनिया कुछ नहीं बोली बस डबडबाई आँखों से बालचन की तरफ देखती रही। ये फगुनिया–ई तोहार आँख में आँसू…का हो गया, कऊनो बात हो गई का ससुराल में।इस बार सहानुभूति पाकर फगुनिया फूट पड़ी और बोली –साल भर में एक बार हम आते हैं … Read more

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