राखी – उमा वर्मा

 अब के बरस भेज भैया को बाबुल, सावन में लीजो बुलाये—“” गुनगुना रही थी नन्दिनी ।दो दिन बाद राखी है ।इस बार खुद जाकर राखी बांधना चाहती है वह ।”” भैया को क्यो, खुद ही चली जाओ ना,मै कल ही टिकट का इन्तजाम करता हूँ “” अजय ने कहा ।आठ साल बाद नन्दिनी अपने पीहर … Read more

 डोर टूट गयी – रीटा मक्कड़

रक्षाबन्धन के त्योहार को 2 ही दिन बचे थे। अनिता कुछ गुमसुम सी , कुछ उदास और सोच में डूबी थी।कहने को तो वो घर के काम जल्दी जल्दी निपटा रही थी ।क्योंकि उसे उसके बाद बाजार जो जाना था अपने भाईयों के लिए राखियां लेने। अब तो भाभियों को भी लुम्बा राखी बांधने का … Read more

राखी का अनमोल तोहफ़ा,, ना कभी देखा होगा ना सुना होगा,, – सुषमा यादव

,, मेरे प्यारे भैया, कहां हो तुम ? जहां भी होंगे, अच्छे से ही होंगे,, राखी का त्यौहार आ रहा है, तुम्हारी बहुत याद आ रही है, और उस राखी पर तुमने मुझे ऐसा अनमोल उपहार दिया शायद ही किसी भाई ने आज़ तक अपनी बहन को दिया होगा ,, तुम्हें याद है,जब मैं तुम्हारे … Read more

 मांग व पूर्ति – पायल माहेश्वरी

” अर्थशास्त्र के सिद्धांत के अनुसार मांग व पूर्ति में सीधा संबंध होता हैं, और वस्तु की कीमतों का घटना व बढ़ना इन दोनों तथ्यों पर आधारित हैं” निशा अपने ही कमरे से आती हुई आवाज को सुनकर उसके पीछे-पीछे गयी। ” बबलू!!तुम यहाँ पर क्या कर रहें हो ? “निशा चौंक कर बोली। ” … Read more

अच्छा करो तो अच्छा होता है(राखी स्पेशल) – पिंकी नारंग

 इस बार कौन सा आउट्फ़िट लायी हो राखी के लिए जुगनु ने आना को अपने बाहों के घेरे में कैद करते हुए कहा। जुगनु की बात सुनते ही आना सिसकियाँ भरते हुए रोने लगी। जुगनु ने घबराते हुए आना से कहा”मेरी कोई बात बुरी लग गयी जान,प्लीज़ चुप हो जाओ,जानती हो ना तुम्हें रोता नही … Read more

“छोटू” – नीतिका गुप्ता

मैदान में बच्चों को फुटबॉल खेलते देखकर आज फिर उसके कदम वहीं पर ठिठक गए। रोज ही वह कुछ देर इन बच्चों को हंसते खेलते देखकर फिर आगे बढ़ जाता है। आज का दिन शायद अलग था तभी जब बाॅल उछलती हुई उसकी तरफ आई तो एक जोरदार किक मारकर बाॅल को बच्चों की तरह … Read more

धन्य है तू भारत की नारी- संगीता अग्रवाल

” क्या हुआ प्रीतो तू यहां अंधेरे मे क्या कर रही है ?” रंजीत अपनी पत्नी के पास आ बोला। ” कुछ नही वो मैं बस यूँही !” प्रीति जिसे रंजीत प्यार से प्रीतो बोलता था वो नज़रे चुराती हुई बोली। ” तू रो रही है प्रीतो एक सच्चे सिपाही की बीवी होकर ऐसे रोना … Read more

रक्षा कवच – तृप्ति शर्मा

बहुत ही जिद की थी अमृत ने मां से ,मां हमें भी एक बहन चाहिए । सब दोस्तों के पास है ,सब माथे पर लाल रंग का टीका लगाते हैं। अगले साल वह भी दोस्तों में खूब शान से माथे पर राखी का टीका,उसमें चावल के कुछ दाने जो मां ने नन्ही अनन्या से लगवाए … Read more

 स्वाभिमान  –  नम्रता सरन “सोना’

ट्रैफिक सिग्नल पर ग्रीन लाईट की प्रतीक्षा मे गाड़ी मे बैठे बैठे राजन की सेंटर लाईन पर नज़र गई तो देखा एक छोटी सी करीब छह सात साल की बच्ची फ़ूलों की मालाऐं हाथ मे लिए हर गाड़ी के पास जाकर माला खरीदने की गुहार कर रही थी… लेकिन लोग इतनी जल्दी में होते हैं … Read more

हमारे रिश्ते के बीच में पैसे की दीवार आ गयी  – किरन विश्वकर्मा

प्रकाश जी का जब विवाह राधा जी से हुआ तब उनके पिता एक साधारण से व्यापारी थे और प्रकाश जी उनके साथ व्यापार मे हाथ बंटाया करते थे। धीरे-धीरे बिजनेस की बागडोर प्रकाश जी के हाथों में आ गयी। प्रकाश जी दिन रात मेहनत करके बिजनेस को आगे बढ़ाने में लगे रहते। प्रकाश जी की … Read more

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