पश्चाताप – गार्गी राय

शर्मा जी , जो सरकारी नौकर होते हुए भी स्वाध्याय के द्वारा अच्छा-खासा  साहित्यिक समझ रखते थें । अध्ययन में रुचि रखने से काम में हमेशा ईमानदार रहें ….नतीजा हमेशा आर्थिक तंगी का शिकार होना पड़ा । हालाँकि  शर्मा जी ऊँचे पद पर कार्यरत थें । हमारे देश की विडंबना है की पैसे बेईमानो के … Read more

उपहार – रश्मि स्थापक

“नेहा का फोन आया था…।” अविनाश बाथरूम से जैसे ही नहा के बाहर निकला कि पत्नी ने बताया। “अरे!मैं वही सोच रहा था कि छुटकी आज पहली बार रक्षाबंधन पर दूर है और अभी तक उसका फोन नही आया…मैं खुद ही नहा कर लगाने वाला था…क्या कहा छुटकी ने?” “आपसे बात करेगी…पर मुझे समझ नहीं … Read more

“माँ के हाथ की सब्जी ” – *नम्रता सरन”सोना”*

सुषमा आज फिर सकारात्मक उत्तर की अपेक्षा मे प्रमोद जी की खाने की थाली परोस रही थी कि, शायद आज दिल खुश हो जाये … प्रमोद जी ने खाना शुरू कर दिया , पहला निवाला मुँह मे रखते ही वे बोले ,अरे वाह ,,,आलू प्याज़ की सब्जी,,,, सुषमा की  जिज्ञासा और बढ़ी कि,शायद अब वे … Read more

“आ! बहना,राखी बांधे” – ऋतु अग्रवाल

         रिया और सिया दोनों जुड़वा बहनें, बहुत प्यारी। एक दूसरे से इतना प्यार करती थी मानो दो जिस्म एक जान हो। दोनों लगभग पाँच साल की थी। वैसे तो उन्हें कुछ ज्यादा नहीं पता था पर जब रक्षाबंधन पर बाजार में रंग-बिरंगी राखियाँ सजती तो बाल सुलभ कुतूहल माँ से पूछ बैठता,” मम्मी हमारा … Read more

इंतज़ार – लखविंदर सिंह संधू

“सर ये शर्मा जी हैं यह आपके साथ ही इस कमरे में बैठेंगे” मेरे दफ्तर का चपड़ासी एक आदमी जिनको वो शर्मा जी कह रहा था के साथ सामने खड़ा था । मैंने पूरे अदब से उनका वेलकम किया । “आप तो कल आने वाले थे मैंने आपके ऑर्डर देखे थे ” मैंने शर्मा जी … Read more

जख्मों की हांडी – सरिता गर्ग ‘सरि’

बहुत साधारण वस्त्र और टूटी सी पुरानी चप्पल पहने लगभग घिसटती -सी आज जब वे मेरे पास आईं , उनके हाथ में एक सीलबंद लिफाफा था। आते ही बोली मैं तुम्हें एक काम सौंप कर जा रही हूँ। मेरे जीते ही तो यह सम्भव न हुआ पर शायद तुम वह सुपात्र हो जो निश्चित रूप … Read more

बहू/बेटी / सास/माँ – गीतांजलि गुप्ता

थोड़ी देर को बाहर ले चलो सिस्टर कमरे में पड़े पड़े मन घबरा गया है। शालू सिस्टर से कह रही थी पर सिस्टर सुना अनसुना कर कमरे से निकल गई। महीने भर से शालू अस्पताल में दाखिल है। उस का भाई मानव कभी कभी मिलाई के समय आ जाता है औपचारिक मुलाकात होती है। ठीक … Read more

प्रसाद – दीप्ति सिंह

राशि का गोलमटोल बेटा शुभ जब से घुटने चलने लगा है माँ को खूब दौड़ाता है गिरी हुई वस्तुओं को नियत स्थान पर रखते -रखते राशि थक जाती है कभी कभार तो भोजन करना भी दूभर हो जाता है। “राशि …राशि ”  की आवाज लगाते हुए मकान मालकिन रचना ऊपर आयी।  “क्या बात है दीदी … Read more

थैंक्यू आंटी – नीरजा कृष्णा

मालिनी और भुवन जी को अचानक किसी कार्य के लिए मुंबई आना पड़ा था…होटल ताज़ में तीन दिनों के लिए बेटे ने बुकिंग भी करा दी थी…सब कुछ बहुत जल्दबाजी में हुआ था…वो लोग जब ताज़ में पहुँचे ….उनको लाउंज में थोड़ा वेट करने को कहा गया… वो एकदम आपा खो बैठी,”ये क्या नॉनसेंस है…अभी … Read more

मोहतृष्णा – विनोद सांखला

रात के 11:30 बज चुके थे..सिलेबस से कल की ऑनलाइन क्लासेस का मटेरियल निकाल ही रही थी कि पास रखे मोबाइल में व्हाट्सएप पर तन्मय का मैसेज चमका। ★ ” सरप्राइईईईज…मैं आपके शहर में आ गया..” पढ़कर मेरी खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा.. तुरंत मैंने भी रिप्लाई किया.. ” इतना खतरनाक सरप्राइज..?? आश्चर्य से. … Read more

error: Content is protected !!