भगवान हमारे भीतर हैं

एक  बार अकबर के दरबार में एक कवि आया. उसने अकबर की शान ए में एक कविता लिखी, ‘अकबर बहुत महान हैं, वह बहुत दयालु हैं’ तो सबने कहा, ‘यह तो बिल्कुल सच बात है!’ उसकी कविता सुन कर लोग उसकी तारीफ करने लगे. तो जब कवि को लगा कि उसकी कविता सबलोगों को पसंद … Read more

खुद को कमजोर समझने वालों  का जीवन बदल देगी ये कथा

 एक चरवाहा जंगल में भेड़-बकरियां चराया करता था। घूमते-घूमते एक | रोज उसे शेर का छोटा बच्चा मिला जिसने अभी आंखें भी नहीं खोली थीं। छोटा बच्चा सबको प्यारा लगता है। यह जानते हुए भी कि यह शेर का बच्चा है, उसे उठा लिया और भेड़ों का दूध पिलाने लगा। वह बच्चा धीरे-धीरे बढने लगा। … Read more

 गलतियों से कितना सीखे

बात आइंस्टीन से जुड़ी है। वह जर्मनी छोड़ चुके थे और दुनिया भर के विश्वविद्यालय उन्हें अपने यहां नियुक्त करने के लिए उत्सुक थे, लेकिन उन्होंने प्रिंसटन यूनिवर्सिटी को चुना, क्योंकि वहां का वातावरण शांत और बौद्धिक था। जब आइंस्टीन पहली बार प्रिंसटन पहुंचे, तब वहां के प्रशासनिक अधिकारी ने उनसे पूछा- सर, मैं आपके … Read more

दिखावा

एक राजा के दरबार में एक बुद्धिमान मंत्री था, जिसके पास हर समस्या का हल था. राजा अपने इस मंत्री से बिना पूछे कोई भी बड़ा- फैसला नहीं लेता था. इस मंत्री से राज दरबार के अन्य लोग जलन रखते थे. एक दिन राजदरबार में राजा ने अपने इस मंत्री से कहा, तुम इतने बुद्धिमान … Read more

बुद्धिमान लालची

एक राजा अपने लिए समझदार और ईमानदार मंत्री की तलाश कर रहे थे.राजा ने कई लोगों का साक्षात्कार लिया लेकिन कोई भी व्यक्ति उन्हें मंत्री बनने के लायक नहीं लगा. वहीं जब यह बात राज्य के | सबसे बुद्धिमान व्यक्ति को पता लगी तो वो फौरन राजमहल चला गया. राजा से  मिलकर उसने कहा, मैं … Read more

व्यवहार का ज्ञान

एक गांव की चार महिलाएं कुएं पर पानी व्यवहार का ज्ञान भरने गईं, पानी भरते समय चारों महिलाएं इधर-उधर की बातें कर रही थीं. कुछ समय बात करने के बाद वह अपने बेटों की तारीफ करने लगी. पहली महिला बोली, मेरा बेटा काशी से पढ़कर आया है, वह संस्कृत विषय का विद्वान हो गया है. … Read more

राखी का तोहफ़ा – प्रेम बजाज

ये उन दिनों की बात है जब करोना की महामारी फैली थी और बहुत से लोगों की नौकरी भी छूट गई थी, हमारे पड़ोस में रहने वाले रमेश की भी नौकरी छूट गई,  जैसे-जैसे समय बीता थोड़ा सा कुछ जमापूंजी थी सब खत्म हो गया, खाने तक के लाले पड़ गए, 5-6 महीनों में बूरा … Read more

रक्षा – पुष्पा पाण्डेय

शालिनी को बचपन से सुरक्षा विभाग में नौकरी करने की प्रवल इच्छा  थी, लेकिन वह जानती थी कि उसके माता-पिता उधर नहीं जाने देंगे। अंततः उसका नामांकन मेडिकल काॅलेज में हुआ। मन-ही-मन वह हमेशा यही सोचती रही कि वह आर्मी के अस्पताल में नौकरी करेगी। वो वक्त भी आया जब उसे निर्णय लेना था।  माँ-बाप … Read more

राखी का गिफ़्ट – प्रीति आनंद अस्थाना

ऑफ़िस के रास्ते में एक अत्यधिक व्यस्त ट्रैफ़िक सिग्नल पड़ता था। अगर उस पर रुकना पड़ गया तो कम से कम पाँच-सात मिनट की तो छुट्टी हो ही जाती। मेरी नई-नई नौकरी लगी थी तो ऑफ़िस पहुँचने की जरा जल्दी रहती। वहाँ रुकना बेहद अखरता था। इसी सिग्नल पर कुछ लोग तमाम तरह का सामान … Read more

साँसों का तार… – विनोद सिन्हा “सुदामा”

अर्पिता मन में अथाह प्रेम लिए पलकपांवडे़ बिछाए बैठी अपने भाई के आने का इंतजार कर रही थी.. एक नई उम्मीद के साथ एक नए अहसास के साथ…इस राखी पर्व पर.अनुभव की राह तक रही थी… मन की भावनाएं शांत होने का नाम नहीं ले रही थी..खुशी आँखों से आँसूं बन कर निकल रही थी..भाई … Read more

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