शीतल झोंका – गीतांजलि गुप्ता।
शीना जैसे ही बैग उठा जब भी घर से निकलती हमेशा अपनी माँ से झिडकी खाती माँ उसे हरेक बात में टोकती रहती उन्हें हमेशा बेटी से नाराज़गी ही रहती ये नहीं है कि शीना उनकी नाराजगी का कारण नहीं जानती पर क्या करे सब जैसा चल रहा है उसे बदलना इतना आसान भी तो … Read more