नज़रअंदाज़ – बेला पुनीवाला

    दोस्तों, ज़्यादातर हमारे सुनने में यही आता है की, बच्चो ने अपने माँ – बाप को घर से निकाल दिया या उनका ख्याल नहीं रखा, मगर आज में आप सबको इससे अलग कहानी सुनाना चाहती हूँ, जैसे की हर बार गलती बच्चो की नहीं होती, कभी कभी माँ – बाप भी ज़िम्मेदार होते है।         आकाश … Read more

मीठी नींद – रंजू भाटिया

अभी तक यही अटका है तू …क्या वह मेज मैं साफ करूँगा ? चल जल्दी से जा वहाँ । ग्राहक खड़ा है। पहले मेज साफ कर, फ़िर यह बर्तन धोना । पिंटू जल्दी से वहाँ से उठा और भागा कपड़ा ले कर मेज साफ करने को। ठंड के मारे हाथ नही चल रहे थे, उस … Read more

रिश्ता  नहीं  सौदा था. –  सन्दीप गढवाली

लडके के पिता ने पंडित जी को एक लडकी देखने को कहा ! पण्डित जी बोले हाँ एक लडकी है. अभी कुछ दिनों पहले उसके पिता ने भी एक लडका देखने को कहा था.             एक दिन तय हुवा और शादी हो गयी. सब कुछ ठीक चल रहा था कि कुछ महीनो बाद. लडका लडकी मे … Read more

कलयुग नही मतलबी युग चल रहा है – संगीता अग्रवाल

“बेटा तुम्हारी माँ की तबियत सही नहीं है वो हर पल तुम्हे याद करती हैं एक बार तुम आ जाओ गांव वैसे भी दो साल हो गए तुम्हे यहां आए हुए !” हरिहरण जी अपने बेटे सोमेश से फोन पर बोले। “ओहो बाबूजी मां की तबियत खराब है तो उन्हें डॉक्टरको दिखाओ मेरे आने से … Read more

लौटकर आऊंगा  – प्रियंका त्रिपाठी ‘पांडेय’

“छुटकी राखी की थाली सजाकर डेहरी पर बैठ भाई के आने का इंतजार कर रही थी। इंतजार करते-करते बचपन की यादों मे खो गई…” “छुटकी नीचे उतर तुझे मना किया है ना पेड़ पर मत चढ़ा कर।” “उतर रही हूं भैया।” “भैया तुम मुझे पेड़ पर चढ़ने से क्यों मना करते हो? जबकि तुम तो … Read more

 घुटन भरा रिश्ता – संगीता अग्रवाल

“रमिता ओ रमिता कहाँ मर गई ” अमित गुस्से मे ऑफिस से आते ही चिल्लाया। रसोई मे काम करती रमिता भाग कर आई… ” बोलिए” “बोलिए की बच्ची तुमने नैनी को फोन पर क्या कहा “ “मैने वही कहा जो सच था कि मैं आपकी पत्नी हूँ ” इसमे झूठ क्या बोला उसने पूछा था … Read more

मरना नहीं  – देवेन्द्र कुमार

=========== रामदयाल इस बड़ी दुनिया में अकेले रह गए थे। उनकी पत्नी की मृत्यु हो गई। वह दो-चार दिन ही बीमार रहीं। मोहल्ले वाले उन्हें अस्पताल ले गए। उन्होने ही भाग-दौड़ की। रामदयाल खुद बीमार थे। उनका लड़का मुंबई में रहता है। कई वर्षों से घर नहीं आया था। मां की मृत्यु का समाचार मिलने … Read more

रक्षा सूत्र ही सुरक्षा कवच हैं… –  संगीता त्रिपाठी 

 विभा निर्मला और किशोर जी की बहू थी उसने अनुज से प्रेम विवाह किया था। विवाह से पहले ही अनुज फौज में चला गया। विवाह के समय एक महीने की छुट्टी लेकर आया था। एक महीना कब बीत गया अनुज और विभा को पता नहीं चला। जब अनुज पोस्टिंग पर जाने लगा तो जाने क्यों … Read more

गुलाबी-बसंत –     मुकुन्द लाल

  उसकी आंँखों के आगे एक चमकदार गुलाबी कोहरा छा गया था, जो धीरे-धीरे संगीतमय ध्वनि के साथ छटने लगा। वृक्षों पर हरी-हरी पत्तियाँ मंद वायु के झोंकों के सहारे गले मिल रही थी, डालियों पर बैठी कोयल कूक रही थी, ‘ बसंतआ गया’, फूलों पर गुंजार करते भौरें गुन-गुना रहे थे, ‘ बसंत आ गया’, … Read more

आओ लौट चलें – सरिता गर्ग ‘सरि’

  श्वेत झीने परिधान में सरोवर से  निकली सद्य-स्नाता तुम किसी तपस्विनी का रूप धरे मेरा तप भंग कर गईं। मृणाल सी कटि तक लटके श्याम वर्णीय भुजंग का दंश पीता मैं ,नैनों के जाल में उलझा,जाने कितने शैल – शिखर पार करता अनजान घाटियों में उतर गया। तुम मेरे पास ही थीं कि माँ ने … Read more

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