खरी दोस्ती! – प्रियंका सक्सेना

काॅलेज में सभी के लिए सुधा और मीनल की दोस्ती मिसाल है। आर्थिक स्तर समान ना होते हुए भी दोनों ऐसे घुल मिल कर रहती मानों शक्कर पानी में घुली हों जैसे! सुधा मीनल में दांत-काटी दोस्ती है, पक्की वाली सहेली हैं दोनों बचपन से ही साथ पढ़ी-खेली हैं। मीनल का सपना है प्रतियोगी परीक्षाओं … Read more

विस्मृत नहीं होती है दोस्ती – अर्चना कोहली ‘अर्चि’

कस्तूरी के जाने के बाद दिल्ली शहर में मन नहीं लगा, चल पड़ी किसी ओर शहर की तरफ़। वैसे तो अपने गृहनगर भी जा सकती थी, पर वहाँ पर कोई भी तो अपना नहीं रहा था। माता-पिता  तो दो वर्ष पहले ही किसी हादसे में उसे छोड़कर जा  चुके थे।   कस्तूरी, उसकी प्रिय सहेली, … Read more

बूढ़ी घोड़ी लाल लगाम – श्रद्धा निगम

मधुको.आवाज़ देते हुए विवेक बैंक जाने के लिए तैयार हुआ. -शाम को तैयार रहना।आज हम सब घूमने चलेंगे,और रात का खाना भी बाहर ही खायेंगे। मां तुम भी तैयार रहना।– -अरे मैं क्या करूंगी जाकर ,तुम लोग चले जाना… -नही.. इस बार विवेक ने ज़ोर देते हुए कहा-बस चलना है…कोई टालमटोल नही.. विवेक  मालती का … Read more

संगीत – भगवती सक्सेना गौड़

एक विवाह समारोह मे सरिता आयी थी, रिसेप्शन समारोह की धूम थी, हर तरफ शोर , मस्ती का माहौल था। तभी किसी ने उद्घोषणा करी, अब सुनिए मेजर सागर नंदन की पेशकश, और उसमे लीन हो जाएं। तभी कोई माउथऑर्गन पर स्टेज में एक धुन बजा रहा था, ए मेरे वतन के लोगो, जरा आंख … Read more

गरीबी   – विजय कुमारी मौर्य”विजय”

चौराहे के बीच गाँधी जी की प्रतिमा के नीचे एक चबूतरे पर गरीब औरत दो बच्चों को लिए बैठी थी। कंकाल सी काया, पेट पीठ में समाया। सुबह का वक्त था, बड़ा बच्चा यही कोई तीन चार साल का और छोटा छ:सात महीने का होगा। बड़ा बच्चा बराबर रोये जा रहा था, जबकि छोटा माँ … Read more

वो बहुत वफादार था – ज्योति अप्रतिम

**************** श्रीमती सिन्हा के दिलोदिमाग में दो साल पुरानी मूवी फ्लेश बैक में चल रही थी । उन्हें वो दिन याद आ रहा था जब कालू पहली बार भरी बरसात में उनके घर आ पहुँचा था। रात के  11 बज गए थे । पिछले दो घण्टे से लगातार बारिश हो रही थी और थमने के … Read more

मइयत – विजय कुमारी मौर्य

“सेठ दुर्गा दास की मइयत में” …. हजारों की भीड़ थी। क्या हिन्दू, क्या मुसलमान, सिख, ईसाई सभी की आंखें नम थी? वे थे भी बहुत अच्छे इन्सान। क्या गरीब…. क्या अमीर,  ऊंच-नीच का भेदभाव लेश मात्र का भी न था। सबके दुख सुख में हमेशा खड़े रहते थे। परिवार में पत्नी सुशीला, अपने नाम … Read more

नींव का पत्थर – नम्रता सरन”सोना

“अरे भाभी! घर का तो नक्शा ही बदल दिया, ऐसा लग ही नही रहा कि यह वही घर है, जहाँ मेरा जन्म हुआ, जहाँ मैं पली- बढ़ी, सब कुछ बदल गया। हाँ,  पर अच्छा किया आपने रिनोवेशन करवाकर” संस्कृति ने चारों तरफ नज़र घुमाते हुए कहा। संयोगवश काफी समय के बाद संस्कृति मायके आई थी, … Read more

स्नेहिल छाँव – सपना शिवाले सोलंकी

“सुनों बहू ,इतनें सालों से खूब संभाल ली इस गृहस्थी को अब मेरे बस की बात नहीं …” रमा ने बड़े ही तल्खी के साथ कहा था। नेहा को सुनकर थोड़ा अजीब तो लगा पर उसनें बड़े ही प्यार से कहा, “जी मम्मी आप समझा दीजिएगा जैसा आप कहेंगी मैं वैसा कर लूँगी” और उस … Read more

सयानी बिटिया – सपना शिवाले सोलंकी

” मम्मी आज हम सब साथ खाना खाएंगे “ “अरे नहीं बेटे तुम तीनों बैठो मैं गर्मागर्म फुल्के उतार कर  देती जाऊँगी “ “बिल्कुल नहीं आज मैं आपकी कोई बात नहीं सुनुँगी “ विधि ने जोर देते हुए माँ से कहा। “मैंने डाइनिंग टेबल पर बाकि का खाना रख दिया है सलाद कट करके भी … Read more

error: Content is protected !!