कभी-कभी जिद्दी होना भी अच्छा है – डॉ. पारुल अग्रवाल

अपर्णा काफ़ी समझदार लड़की थी। जिसमें वैसे तो सभी अच्छे ही गुण थे पर वो स्वभाव से थोड़ी जिद्दी भीं थी।जो एक बार करने की ठान लेती वो करके ही मानती। उसके मम्मी- पापा को भी कई बार उसका हठी स्वभाव देखकर यही लगता था की ये शादी के बाद ससुराल में कैसे सबके साथ … Read more

अपमान का दंश –  प्रियंका मुदगिल

“भैया! सारे रिश्तेदार और पासपड़ोस के लोग हमारी आरती के बारे में तरह-तरह की बातें बना रहे हैं….  कहां तो हम  बिटिया के विवाह की कार्यों में लगे थे और कहां ये दुर्घटना हो गई…”” शकुंतलाजी अपने भाई पुरुषोत्तम जी से दुखी मन से कहने लगी। “कुछ समझ नही आता ….किससे क्या कहूं….. क्या करूं..खुद … Read more

अपमान का घूँट – के कामेश्वरी

सौम्या जैसे ही कॉलेज से घर पहुँची तो देखा माता-पिता दोनों खुश नज़र आ रहे थे । उसने कहा — क्या बात है आप दोनों बहुत खुश नज़र आ रहे हो दीदी का फ़ोन आया था क्या ? माँ ने कहा— अरे! नहीं सौम्या तुम्हें तो मालूम है न रम्या सिर्फ़ शनिवार और रविवार को … Read more

नया मोड़ – कमलेश राणा

अरे वाह निधि, क्या गुड न्यूज़ सुनाई है आज तो तुमने दिल खुश कर दिया,, दीदी, यह क्या सुन रही हूँ मैं,, आप मुझे मौसी बनाने वाली हो,, बहू ध्यान रखना अपना,, वजन मत उठाना,, फल और हरी सब्जियां ज्यादा खाना,, बेटा निधि खूब घी, मेवा खाना,, मैं लड्डू बना कर भेज दूँगी जिससे बच्चा … Read more

अभिमान – पुष्पा पाण्डेय

दूर के रिश्तेदार के घर शादी में गयी थी। वहीं एक अन्य रिश्तेदार से पता चला कि मंटू की शादी हो गयी। मंटू , हाँ वही मंटू जो हमारी चचेरी बहन का बेटा है। उसकी शादी की बात सुन मन को बहुत सुकून मिला। मंटू और उसकी माँ मीरा की याद आते ही दिल कराह … Read more

यह कैसा बंधन है ? – के कामेश्वरी

प्रमोद ने कहा—माँ आपको याद है न कल हमें स्कूल जाना है । अब मैं मिडिल स्कूल से हाई स्कूल में जा रहा हूँ । सुरभि ने कहा— मुझे याद है प्रमोद कल चलेंगे । सुरभि और प्रमोद दूसरे दिन सुबह स्कूल के लिए निकल गए । जैसे ही वे स्कूल पहुँचे प्रिन्सपल ने उन्हें … Read more

चोर – देवेन्द्र कुमार

“राजन, जरा चावलों की थाली खिसका दो|” माँ ने राजन को पुकारा। राजन की मम्मी ने चावलों को हवा लगाने के लिए थाली में भरकर बाल्कनी में रख दिया था। राजन ने थाल खिसका दी। उसके पहुँचते ही थाली पर चूँ-चूँ करती चिड़ियाँ उड़ गईं। वे दो थीं। चावलों पर कुछ तिनके और नीला पंख … Read more

कुछ अनकही सी बातें –  टीना सुमन

कभी-कभी कुछ चीजें आपके बस में नहीं होती ,कोशिश करते हैं आप संवारने की ,मगर चीजें कुछ ज्यादा ही उलझ जाती है ,और आप हार मान लेते हैं ।शायद  मेनें  भी  हार  मान ली थी….. अलार्म बज -बज कर खुद ही सो चुका था ,इस बार अलार्म का काम मां की आवाज ने किया- ” … Read more

माँ ने सिखाया – रिंकी श्रीवास्तव

ये क्या बहु ..!! तुम बिना घूँघट  किये  बाहर से चली आ रही हो ,सारे मोहल्ले वाले देखेंगे  तो  क्या सोचेंगे  ,हमारी इज्जत का  जरा भी ख्याल नही है तुम्हे …!!  हमारे खानदान मे  बहुएँ   बिना  घूँघट  बाहर नही  निकलती   कितनी बार समझाया है तुम्हे  पर तुमने तो   सास  की बात न  … Read more

“पिया ,मोसे छल किए जाए” – सुधा जैन

 मैं एक नारी सब कुछ हारी  पर जीवन से ना हारी, सुनाती हूं अपने जीवन की दास्तान ….नाम नहीं लिखती ….कुछ भी कह सकते हो …।सलोनी… हां प्यारा सा नाम मेरा …अपने मम्मी पापा की लाडली बिटिया …मेरे बाद मेरी छोटी सी एक बहना और दो प्यारे से भाई…. मेरी मम्मी बहुत सहज ,सरल, प्यार … Read more

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