फ़ैसला – बेला पुनीवाला 

 बिना कुछ सोचे, बिना कुछ समझे हमने आप से प्यार किया। बस यही एक हमारी सब से बड़ी भूल हुई। आप ने एक बार प्यार से हाथ बढ़ाया हमारी ओर, तब भी ना कुछ सोचा, ना कुछ समझा, सब कुछ छोड़-छाड़ के हमने जीवन भर के लिए आप का हाथ थाम लिया।         पहले तो आप … Read more

तोता मैना का प्यार – डा. मधु आंधीवाल

—————– नेहा एक पाश कालोनी में किराये के फ्लैट में रहती थी ।इस कालोनी के सब परिवार ही धनाढ्य श्रेणी में आते थे । इन फ्लैट वाली कालोनियों में बस सबसे बड़ी कमी है पड़ोसी भी पड़ोसी को नहीं जानता या ना जानने का दिखावा करते हैं शायद उनका स्तर पड़ोसी के स्तर से अधिक … Read more

संकल्प – नम्रता सरन “सोना

रविवार का दिन। कल्पना ने टेबल पर नाश्ता लगा दिया था। मैथी की पूरी, अचारी आलू और गाजर का हलवा। सारा घर खूशबू से महक रहा था। “निशु, विक्की, चलो आओ! नाश्ता कर लो। पापा को भी बुलाओ। गर्म गर्म है, फटाफट खा लो, नहीं तो ठंडा हो जाएगा। मैं गरमागरम चाय बना कर लाती … Read more

ठंडे आटे की रोटी* – अर्चना नाकरा

रवि देख ‘तेरी बहू  ‘गीता’ मुझे खाने में क्या खिलाती है’ यह कहकर मां ने थाली रवि के आगे सरका दी.. मां जो आप खा रही हो वही तो मुझे दी है पहले आपको..’ फिर मुझे’ ना.. ना, देख  रवि ‘रात के ठंडे आटे की रोटी’ नहीं मां अभी ताजा आटा लगाकर रोटी बनाई है … Read more

ये विवाह संभव नहीं… – डॉ. सुनील शर्मा

हरीराम मास्टर जी की आंखों के आगे अंधेरा छा गया… पिछले तीन माह से बड़ी बेटी सुधा की शादी की तैयारियों में पूरा घर लगा था. ससुराल वाले ऊंचे तबके के थे. हमारा उनसे कोई मेल नहीं, लेकिन बेटी की ज़िद थी . रमेश लड़का अच्छा था. एक बैंक में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर … Read more

विषय :अवसाद- ऋतु अग्रवाल

विधा :आलेख             जीवन निरंतर घटित हो रही घटनाओं की श्रृखंला है। जीवन में अनेक उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। जब तक जीवन की रेल गाड़ी अपने निश्चित ट्रैक पर चलती रहती है तो इंसान भी संतुलित रहकर जीवन यापन करता है पर कभी-कभी कोई ऐसी घटना या हादसा जो कि मनुष्य की कल्पना या उसकी … Read more

हारा हुआ जुआरी – निभा राजीव “निर्वी”

रंजीत बिस्तर पर बैठा गोद में लैपटॉप लिए कुछ काम कर रहा था। वहीं से उसने अनन्या को आवाज लगाकर एक प्याली चाय लाने को कहा। अनन्या ने फटाफट चाय बनाई और चाय लेकर उसके पास पहुंच गई। उसने चाय की प्याली वहीं सिरहाने वाली मेज के पास रख दी और वापस रसोई तक पहुंची … Read more

अंतिम इच्छा – पुष्पा ठाकुर 

” मां आज खाना हमारे साइड खाना,तुम्हारी बहू ने आज तुम्हारी पसंद की चना भाजी और मक्के की रोटियां भी सेंकी है।” राघव अपनी बात को लगभग जाते जाते ही कह गया,जो देहरी पर बैठी उसकी बूढ़ी मां ने अच्छी तरह सुन भी ली थी।सुनती भी क्यों न ……….आज पूरे एक महीने बाद बड़े बेटे … Read more

टिमटिमाती आंखें – रानी गुप्ता 

दादी एक बात बताओ आप ये हर समय मुझमें  क्या देखती रहती हो?गौरी अपना गुस्सा दबाते हुए दादी से हंसते हुए पूछ ही लिया….पता है आपको मुझे अच्छा नही लगता कि कोई मुझ पर चैबीसो घंटे नजर रखे ,जबकि मैं कुछ गलत नही करती। अरे बिटिया नाराज न हो अपनी दादी से हम तुम्हाये ऊपर … Read more

ये रिश्ते हैं अनमोल से कुछ नाज़ुक से बेमोल से – कुमुद मोहन 

आज अम्मा जी के पाँव जमीन पर नहीं पड़ रहे थे! उनके बेटे राकेश  और बहू मीरा के ब्याह के बाद पहली बार उनकी बेटी कुसुम  अपने तीन साल के बेटे सोनू के साथ जो आ रही थी। अम्मा जी सुबह से नहा धो कर पलंग पर बैठी हिदायतों पर हिदायतें दिये जा रहीं थी! … Read more

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