समधी का आसन – मुकुन्द लाल

    विनायक अपने पुत्र सोनू के साथ अपनी भगनी की शादी में अपने जीजाजी के घर पहुंँचा था। अपनी पत्नी के अस्वस्थ रहने के कारण वह उसे नहीं ला सका था इस शादी के सामारोह में, किन्तु अपने इकलौते पुत्र की जिद्द के आगे उसे झुकना पड़ा, अंत में उसे अपनी यात्रा में शामिल कर लिया … Read more

देहदान- बीना अवस्थी

पाराशर जी के घर में मृत्यु सा सन्नाटा पसरा है, कभी कभी मिसेज पाराशर और बेटी प्रार्थना की सिसकियों की आवाज गूँज जाती है। आज राखी का पर्व है परन्तु उनके घर में तो खाना भी नहीं बना। सबकी ऑखों में पिछली राखी की स्मृतियॉ कौंध रही थीं। विपुल और प्रार्थना की मीठी नोंक झोक … Read more

जुड़वा बेटियाँ – बीना अवस्थी

मॉ के गर्भ में दो जुड़वा बेटियॉ आपस में बात कर रही थीं। कहते हैं कि जब तक बच्चा बोलना नहीं शुरू करता, उसे पिछला जन्म याद रहता है। पहली बहन ने दूसरी से कहा – ” पिछली बार मेरी मॉ को दो बेटियॉ पहले से थीं, बेटे की चाह में तीसरी बार गर्भ धारण … Read more

 डर  – रचना कंडवाल

मां मैं चलती हूं मुझे देर हो रही है। “अरे बेटा ठीक से नाश्ता कर ले हमेशा हड़बड़ी में रहती है”। तेरी पसंद के आलू के परांठे बनाएं हैं। मां शाम को घर लौटूंगी तो एक गर्म बना देना। मां बड़े प्यार से बेटी को निहारती रही। सामने पापा अखबार पढ़ रहें हैं बिटिया ने … Read more

अपमान लक्ष्मी का – डॉ .अनुपमा श्रीवास्तवा

सुधा की तबीयत आज कुछ ठीक लग रही थी। आधे घंटे से वह बिछावन से उठने का प्रयास कर रही थी पर कमर के दर्द के कारण उठ नहीं पा रही थी। तभी सुधीर बच्चों की तरह चहकते कमरे में आकर बोले-” सुधा उठकर चलो न बाहर चलकर देखो तो ….दो गौरैया अपना घोंसला बना … Read more

सच्ची मोहब्बत – गरिमा जैन 

प्रिय , मैं नहीं जानता कि मैं यह पत्र तुम्हें क्यों लिख रहा हूं। शायद पहले पत्रों की तरह तुम इसे भी फाड़ कर फेंक दो। डरती हो ना कहीं तुम्हारे पति को ना मिल जाए। कहीं तुम्हारी बसी बसाई गृहस्ती ना उजड़ जाए । सच बताऊं तुम डरपोक निकली। सिर्फ अपने बारे में सोचा … Read more

वो झिलमिलाती रात – श्रद्धा निगम

वो जगमगाती झिलमिलाती शाम ही तो थी,सीमा उमंग और उत्साह से रजत के बेटे के जन्मदिन में जा रही थी।महीना भर पहले से ही रजत याद दिला रहा था,पहला जन्मदिन है मनु का,याद रखना।तुम्हे जल्दी आना है। सीमा हंस कर कहती -हाँ याद है मुझे,मैं कैसे भूलूंगी ,मेरा भी तो बेटा है। -हां ,तभी तो … Read more

मैं अब नहीं ज़ियूँगी !! – मीनाक्षी सिंह

सरला के पति का देहांत हो गया था !! घर वालों में जिस जिस को पता चल रहा वो अंतिम संस्कार से पहले आने की कोशिश कर रहा था !! सरला के पति प्रशांत जी अभी पिछले  साल ही तो प्रधानाध्यापक पद से सेवा निवृत्त हुए थे !! बड़े ही धूम धाम से बड़ा सा … Read more

 दलाल – विनय कुमार मिश्रा

दो जरूरतमंद लोगों को आपस में मिलाकर उनके बीच का कमीशन कमाता हूँ। दलाल शब्द मुझे अच्छा नहीं लगता मगर पेशे से दलाल ही हूँ। इसी कमीशन से मेरा घर चलता है। मोहल्ले की एक ताई को एक किराएदार चाहिए। मगर परिवार वाला। और एक परिवार को किराए पर घर चाहिए जहाँ किचकिच ना हो.. … Read more

जान की कीमत – ऋचा उनियाल बोंठियाल

उस दिन भी हमेशा की ही तरह ,मैं शाम की वॉक पर निकली थी। अभी घर से कुछ ही दूर पहुंची थी कि , “चोर–चोर ……पकड़ो–पकड़ो…..” ये शब्द सुन मैं ठिठक गई। “कहीं ये मेरा वहम तो नहीं?” सोचते हुए मैंने ज़रा ध्यान से सुनने की कोशिश की। नहीं ये मेरा वहम नहीं था, शोर … Read more

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