सुख का आंगन
“कैसी हो सुमित्रा?” निर्मला ने अपने माथे की सिलवटों को उंगलियों से सहलाते हुए फोन पर पूछा। उसकी आवाज में एक अजीब सी थकान और झुंझलाहट थी। दूसरी तरफ से सुमित्रा की खनकती हुई शांत आवाज आई, “मैं बिल्कुल ठीक हूँ दीदी, आप कैसी हैं? बहुत दिनों बाद आपने फोन किया। सब घर में कुशल … Read more