साझी छत का सुकून
शशांक ने आगे बढ़कर अपने पिता के घुटनों को छुआ और धीरे से पूछा, “बाबूजी, अब जब शादी निपट गई है और रोहिणी भी हमारे साथ नीचे ही रहेगी, तो क्या ऊपर वाले उस नए फ्लोर को किसी अच्छे परिवार को किराए पर दे दिया जाए?” ओंकारनाथ जी ने अपनी सफेद मूँछों पर हाथ फेरते … Read more