संस्कार तो गिरवी रख दिये – चेतना अग्रवाल

वह हमारा सपनों का घर था और आपने उसे गिरवी रख दिया।” कहते-कहते काजल की आँखों में आँसू आ गये। “मुझे भी बहुत दुख है, काजल। लेकिन मैं क्या करता। लड़के वालों की माँग थी गाड़ी की। कहाँ से देता…. कितना जोड़-तोड़ करके शादी का इंतजाम किया था। दो दिन रह गये हैं शादी में। … Read more

संस्कार – पूजा मिश्रा

  मैं अपने दूर के रिश्ते के भाई अशोक के यहाँ कानपुर अपने इलाज के लिये आई थी ,भाई डाक्टर है सही राय देगा और अगर रुकने को कहेगा तो रुक जाऊंगी यही सोचकर आई थी ।   अशोक ने बहुत प्यार से मेरी पूरी बात सुनकर इलाज के लिये सही राय दी टेस्ट बगैरह के लिये … Read more

ऐसा क्या हो गया कि जो तुम मां  को नजरांदाज कर रही हो? – अमिता कुचया

आज रौनक  बड़े ही गुस्से में था।जब देखा पल्लवी का व्यवहार बिल्कुल उसकी मां के प्रति उपेक्षित लग रहा है।वह रात में मां के पास नहीं बैठी , न ही उनकी तबीयत के बारे में पूछा। उसे मायके से लौटे हुए बहुत समय हो गया था।इस तरफ पल्लवी को भी अंदाजा नहीं कि रौनक उसे … Read more

संस्कार से बढ़कर कुछ नहीं – अर्चना कोहली “अर्चि”

निर्मला ने अपने बेटे समीर की शादी बहुत धूमधाम से की। शादी के बाद मुँह-दिखाई की रस्म में  समस्त पड़ोसियों को आमंत्रित किया गया। “निर्मला, तेरी बहू तो चाँद का टुकड़ा है। ऐसा लगता है, हाथ लगाते ही मैली हो जाएगी”। निर्मला की प्रिय सखी रमा ने चुटकी लेते हुए कहा। “रमा, बिलकुल सही कहा … Read more

मिलन – डाॅ उर्मिला सिन्हा

 “मां…मां..आप सुन रही हैं न.. हम परसों सुबह पहुंच रहे हैं..बाय..”    बेटा आयं..बायं   ..हजारों  बातें…अपनी मां से फोन पर ……उम्र के आखिरी पडा़व पर वह..अपनी देवी सदृश मां  का आंचल .. खुशियों से भर देना चाह रहा था..          “ठीक है…ठीक है..”वे सुन कहां रही थी..दिल-दिमाग में तूफान -सा मचा हुआ था.  आज चालीस वर्षों … Read more

माँ जी संस्कारों की बात आप तो कीजिये ही मत – (पार्ट – 2 एवं अंतिम भाग)  – मीनाक्षी सिंह 

जैसा कि अभी तक आपने पढ़ा बबिता जी की बीटिया बिन्दू रात के 9 बजे रोते हुए अपने मायके आयी ! उसकी भाभी संगीता ने दरवाजा खोला ! बबिता जी पूछती हैं – बिन्दू री क्या हुआ ,,तू इतनी घबरायी हुई क्यूँ हैं ?? सब ठीक तो हैं ,,दामाद जी नहीं आये क्या ! अब … Read more

संस्कार : नौकरी करने वाली में भी होता है   – सुभद्रा प्रसाद 

” मम्मी , लिजीए, चाय” सुघा ने चाय का कप देते हुए कहा |       “अरे, इतनी सुबह तुम उठ गई ” सुषमा चाय का कप पकडते हुए बोली |          “मुझे पता है, आप सुबह जल्दी उठ जाती हैं और चाय पीती हैं |” सुघा  उनके बगल में बैठते हुए बोली -“मम्मी, ठंड बढ़ गई है … Read more

विज्ञापन में नारी – कल्पना मिश्रा 

“चाचा ,देखना अब खूब सारी लड़कियाँ आपसे लिपटकर इत्ती सारी किस्सी लेंगी” सूरज को डियो डालते देखकर छह साल की रिया ने अपने नन्हें-नन्हें हाथ फैलाते हुए कहा तो वह हँस पड़ा “ये क्या कह रही है बेटू… ऐसे कहाँ देखा?” सूरज ने पूछा तो उसने टेलीविजन की तरफ इशारा किया “इस पर दिखाते हैं … Read more

आलसी बहु  – चेतना अग्रवाल

“अनुज, जरा थोड़ी देर के लिए गुनगुन को सँभाल लीजिए। लगातार रो रही है, इस तरह मैं रसोई में काम नहीं कर पा रही।” खाना बनाती रचना ने रसोई से अपने पति को आवाज दी जो टी वी देखने में मशगूल था। रचना के सास-ससुर भी हॉल में बैठे टी वी देख रहे थे। अनुज … Read more

नहीं! मुझे बुरा नहीं लगता। – मधू वशिष्ट 

“सुनो, आज शाम को सरसों का साग बना कर रखना, थोड़ा सा गाजर गोभी का अचार भी डाल देना। यह रोटी ले जाओ, ठंडी हो गई है गरम फुल्का ले आना।” बिना विरोध किए गंगा विनय की हर बात मुस्कुराकर मानी जा रही थी। शीला ने देखा था रात को जीजा जी ने सोते हुए … Read more

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