अब समझौता नहीं! – डाॅ संजु झा : Moral stories in hindi

दूसरी बार दुल्हन   के लिबास में सजी मोनिका मन-ही-मन सोच रही है-“मैं अपनी शारीरिक और मानसिक  भावनाओं को कुंठित  कर क्यों समझौता करती?मेरे भी दिल में भावनाओं के ज्वार उठते हैं,उन्हें मैं क्यों दबाती?” नवीन से दूसरी शादी के बाद मोनिका  पति का इंतजार करती हुई  पहली धोखे से हुई  शादी के ख्यालों में … Read more

समझौता आखिर किसके लिए,,,,,? – मंजू तिवारी

जब मैं बाजार जाती हूं। तो कई छोटे-छोटे 8,10, 12,14,16 साल के बच्चों को वहां घूमते देखती हूं। कोई पैन लेकर आ जाता है आंटी यह पैन ले लो बहुत अच्छे हैं। या कोई बच्चा गुब्बारे लेकर आ जाता है जबरदस्ती खरीदने के लिए बोलता है। या कुछ बच्चे बच्चियां  भीख मांग रहे होते,,,,,, उनकी … Read more

‘ ऐसी भाभी सबको मिले ‘ – विभा गुप्ता 

 श्रुति की अपने ससुराल में पहली दीपावली थी।वह बड़े उत्साह से साफ़-सफ़ाई में अपनी सासूमाँ का हाथ बँटा रही थी।तभी उसने देखा कि सासूमाँ एक फोटो को निहार रहीं हैं तो उसने पीछे से टोक दिया, ” मम्मी जी, दीपा जीजी की याद आ रही है ना। ” सुनकर वे अचकचा गईं, फोटो को साड़ियों … Read more

भाई चाय वाला – अभिलाषा कक्कड़

जीवन में कभी कभी ऐसे भी क्षण आते हैं जब ज़िन्दगी कुछ देर के लिए अपना पड़ाव सा डाल लेती है । स्मृतियों में एक मधुर याद बनकर वो सदा विराजमान रहते हैं ।रक्षाबंधन बहुत ही प्यारा त्योहार है । भले ही भाई ना होने की वजह से इस त्योहार की मेरे जीवन में कुछ … Read more

क्या यही प्यार है? – नीरजा कृष्णा

दोपहर की गुनगुनी धूप में वो कुर्सी डलवा कर थोड़ी मस्ती के मूड में आराम कर रही थी, अभी सबको आने में थोड़ी देर थी,उनके होंठों पर अनायास ही गीत मचल उठा था…..जिंदगी प्यार का गीत है, इसको हर दिल को गाना पड़ेगा….. बहुत ही भावविभोर होकर उन्होंने अपनी आँखें बंद कर ली …ये उनका … Read more

विरह – अनामिका मिश्रा

कौशल एक पढ़ा-लिखा लड़का था।शहर में उसकी नौकरी लग गई।उसी गांव में एक गांव की लड़की से उसकी शादी हो गई।जिसका नाम था रानी।वो पढ़ी-लिखी नहीं थी और एक साधारण सी लड़की थी। कौशल को वो पसंद नहीं थी, पर पिताजी के दबाव में आकर उसने ये शादी कर ली। कौशल ने उसे अपनाया नहीं … Read more

गुरु दक्षिणा – विजया डालमिया

“भैया, रुद्रप्रयाग चलोगे क्या”? इस आवाज ने देविका को पलट कर देखने पर मजबूर कर दिया ।यह वह आवाज थी जिसे वह लाखों में भी पहचान सकती थी । एक आड़ में छुप कर वह उसे देखने लगी। टैक्सी वाले के मना करने पर वह आगे बढ़ने  लगा ।उसने देखा…” हाँ वही है ।आज भी … Read more

बेटियाँ ससुराल में सुख से रहे। तो माँ के कलेजे को ठंडक मिल जाती है –  ज्योति आहूजा

केशव ये कुछ खाने पीने का सामान ले आओगे बाजार से आप प्लीज? मां ढाई साल बाद हमारे पास कुछ दिन रहने आ रही है वो भी कितना बुलाने के बाद! पापा को गुजरे एक साल हो गया केशव! उनके अचानक जाने के बाद उनका जीवन मानो रुक सा गया है! उनके सारे शौक ख़त्म … Read more

सरप्राइस – विजया डालमिया

कृति सज धज कर बड़ी बेकरारी से कृष का इंतजार कर रही थी।साल भर पहले ही तो दोनों मिले थे ।अपनी पहली मुलाकात को जब कभी भी वह याद करती तो उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाती ।झगड़े से शुरू हुई मुलाकात आज गहरे प्यार में तब्दील हो चुकी थी। कृति थोड़ी अक्खड़ और जिद्दी … Read more

मेरी हार हुई है या जीत – के कामेश्वरी

अपूर्वा एम सी ए की फ़ीस जमा करने के लिए ऑफिस के पास खड़ी थी । उसी समय एक लड़की पीछे से आई और अपूर्वा से पूछा कि एम सी ए की फ़ीस यहीं पर जमा कराना है क्या ।अपूर्वा ने पीछे मुड़कर देखा तो एक सीधी सादी गँवार टाइप की लड़की खड़ी हुई दिखी … Read more

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