“वेदना और स्वार्थ ” – कविता भड़ाना

स्वार्थ… स्वार्थ आखिर है क्या? अपने सुख के लिए या कोई इच्छा पूरी करने के लिए किसी ऐसे इंसान के भी तलवे चाट लेना, जो हो सकता है के हमे बिलकुल पसंद ना हो….पर अपने स्वार्थ के लिए हम अपने जीवन में उसे स्थान देते ही है। कभी कभी हम बरसों तक एक ऐसे इंसान … Read more

आस्था या स्वार्थ – कमलेश राणा

दादी, दादी जल्दी आओ,,, देखो यह क्या हो रहा है टीवी में..  विभु जोर जोर से चिल्ला रहा था और काफी डरा सहमा सा था..  उसकी आवाज़ की तड़प महसूस कर मैं दौड़कर वहाँ पहुंची तो सचमुच वह नजारा भयाक्रांत कर देने वाला था। मैं भी डर गई और सांस रोक कर उस लाइव टेलीकास्ट … Read more

सच्चा प्यार, सवार्थ से परे – राशि रस्तोगी 

प्यार शब्द का अर्थ बहुत ही गहरा है,प्यार में क्या मेरा क्या तेरा, ये तो बस स्वार्थ से परे होकर दूसरे व्यक्ति के लिए कुछ कर जाने का जज़्बा है| आइये पढ़ते हैं ये कहानी.. स्नेहा की शादी वरुण से हुई.. स्नेहा दो बहने हैं.. एक छोटी बहन है ज्योति। वरुण दो भाई हैं.. उसके … Read more

“विश्वास  और वफादारी” – दीपा साहू “प्रकृति”

इंसान हैं भावनाएँ तो होती हैं।बिना भाव के इंसान ,इंसान कहां रह जाएगा? और किसी से लगाव होना स्वाभाविक प्रक्रिया ।स्वतः ही अपनापन जन्म ले ही लेता है।पर  इस अपनत्व के दायरे होने चाहिए या नहीं होने चाहिए ? कृति के शादी के बाद उसके पति कार्तिक के दोस्तों का आना-जाना लगा ही रहता ।वो … Read more

थोड़ा स्वार्थी होना भी जरुरी है – संगीता त्रिपाठी

 “माँ.. मेरा सिलेक्शन अमेरिका के एक अच्छे कॉलेज में हो गया”अंकुर चिल्लाते हुये मधुरा के गले लग बोला। बेटे का अच्छी जगह एडमिशन हो गया ये जान मधुरा भी खुश हो गई। “कितने साल की पढ़ाई है “मधुरा ने पूछा। “माँ, दो साल… फिर वहीं जॉब करना होगा “अंकुर ने कहा। “क्यों, जॉब क्यों करेगा … Read more

प्रायश्चित भरा स्वार्थ – बालेश्वर गुप्ता

   एक शोर सा उठा, कोई जोर से चिल्लाया अरे ये तो कोने वाले बंगले वाले अंकल हैं, पता नही इन्हें क्या हुआ—-?      काफी सारे लोग उस ओर दौड़ पड़े,देखा कि शंकर अंकल सड़क पर बेहोश पड़े थे।कॉलोनी में सब उन्हें अंकल ही कहते थे।एक नौकर के साथ 500 गज के बंगले में शंकर अकेले ही … Read more

“हाँ,मैं स्वार्थी होना चाहती हूँ” – ऋतु अग्रवाल

   “मम्मा मेरी यूनिफार्म प्रेस कर दो, मुझे स्कूल के लिए देर हो रही है।”         “बेटा, मैं आपका और आरव का टिफिन पैक कर रही हूँ।आप खुद कर लो।”           “क्या मम्मा! आपने मेरी यूनीफॉर्म कल प्रेस क्यों नहीं की? आपको पता है ना कि मुझे कपड़े प्रेस करना नहीं आता।” युक्ता झल्लाते हुए बोली।         “तो सीख … Read more

वो बड़ी कोठी – गीतू महाजन

सारा घर शांत था… रात्रि का दूसरा पहर शुरु हो चुका था। सब सो रहे थे पर नीलिमा जी की आंखों से नींद कोसों दूर थी। अमूमन वह इस वक्त इस हवेलीनुमा घर में दो नौकरों के साथ ही रहती थी… पर आज उसके तीनों बच्चे आए हुए थे।पूरे घर में रौनक सी आ गई … Read more

इतनी स्वार्थी भी मत बनो – रश्मि प्रकाश

”ये कैसी गलती हो गई उससे … कह दो ये झूठ है…ना मैं मान ही नहीं सकता नरेन ऐसा कुछ कर सकता है….. मेरा छोटा भाई कभी ऐसाकर ही नहीं सकता है तुम लोग मुझे मेरे भाई के बारे में ऐसी बातें बता कर मुझे उसके ख़िलाफ़ भड़का रहे हो..!” कहते हुए नरेश बाबूअपनी आराम … Read more

स्वार्थ (एक और उर्मिला नहीं बनेगी) – मीनू झा 

कमी क्या है तुम्हें यहां…सुजाता…इतने प्यार करने वाले सास ससुर है…खाने कपड़े की भी कोई दिक्कत नहीं है,घर में हर सुख सुविधा की चीज है..मायका नजदीक है जब चाहती हो आती हो जाती हो, मैं भी हर हफ्ते आ ही जाता हूं तुमसे मिलने..फिर परेशानी है कहां मुझे तो समझ नहीं आता प्रणव जी… सबकुछ … Read more

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