स्वार्थी इंसान – संजय मृदुल
माधव जी सकते में पत्थर हुए बैठे हैं। कमरे का माहौल ऐसे शांत हो गया है जैसे अमावस की रात में खाली आसमान। दोपहर में पत्नी का क्रियाकर्म कर के वापस आये तब से घर मे गहमा गहमी मची हुई थी। शाम तक दूर के रिश्तेदार वापस जाने लगे थे। बचे हुए भाई बन्धु बैठ … Read more