“ब्लड इज़ ऑलवेज थिकर दैन वॉटर ” – मीनू झा 

यूं तो इस त्योहार में बहन रक्षा का वचन मांगती है और भाई निभाने का वादा देता है,पर प्रिया आज मैं तुमसे कुछ मांगता हूं और वादा कर जो मांगूंगा देगी-प्रिंस अपनी बहन से बोला जो राखी की थाल लिए खड़ी थी। मैं कुछ समझी नहीं प्रिंस-प्रिया ऊहापोह में दिखी इन पेपर्स पर अपना पीकू … Read more

अपने हैं तो सपने हैं” –  सुधा जैन

अरे मम्मी ,क्या हुआ? आप तो रो रही हैं, क्या फिर कोई दिल दुखाने वाली मूवी देख ली ? बेटे शुभम ने देखा ,मम्मी एक शार्ट मूवी देख रही है जिसमें बेटा अपनी मां को एयरपोर्ट पर छोड़कर विदेश चला जाता है ,और मां अपना सब कुछ खोकर रो रही है। यह देख कर शुभम … Read more

बहू तेरे दर्द में हम तेरे साथ है! – ज्योति आहूजा

 रुचि बहुत ही चुलबुली और सदा हंसने वाली लड़की थी। जब वह संदीप की जिंदगी में आई तो उसने संदीप की जिंदगी को खुशियों से भर दिया था। रुचि और संदीप की शादी को ढाई वर्ष बीत चुके थे। संदीप अपनी नौकरी के चलते अपने मां  बाप से दूर अलग शहर में रहता था। एक … Read more

छन्नी – नीलम सौरभ

“माही को तो कुछ दिन पहले लड़के वाले देखने आये थे न रमा भाभी! …क्या हुआ फिर? ऋचा बता रही थी, बहुत बढ़िया घर-वर मिल रहा है अपनी माही को!” जया दूर के रिश्ते में रमा की ननद लगती थीं, शॉपिंग बैग से लदी-फँदी लौट रही थीं, थोड़ा सुस्ताने को उनके पास रुकीं तो बातों … Read more

डूबता हुआ प्यार – संजय मृदुल

  घाट में भारी भीड़ में तुम्हारी मांग में भरा सिंदूर दूर से दमक रहा था। छठ पूजा की शाम का इंतज़ार हर साल रहता है। तुम हर साल इन दिनों घर आती हो।  तुम्हारी तस्वीरें देखता रहता हूँ सोशल मीडिया में अक़्सर। वहां मैं तुम्हारा मित्र तो नहीं हूं मैं, वहां क्या अब तो … Read more

अपने ही अपने हों…जरूरी है क्या? – मीनू झा

घर आ रहा हूं चाचीजी…पिछले तीन चार सालों से सबकुछ बंद पड़ा है तो थोड़ा बहुत अगर आप साफ सुथरा करवा देती तो। अच्छा आ रहे हो,बड़ी अच्छी बात है,आओ तुम्हारा स्वागत है..पर विनय तुम्हें तो पता है ना तुम्हारे चाचा जी अब खुद से चल फिर भी नहीं सकते..और मैं उनका और घर का … Read more

स्त्री का साथ – आरती झा आद्या

अरे ओ रतन की बहुरिया… चांदनी .. इतना सुन्दर नाम धरा तेरे बाप ने कि ईद का चांद ही हो गई है तू तो। कहां रहती है आजकल… रतन के बगल वाले घर में रहने वाली एक बुजुर्ग औरत जिसे सब बुआ कहते थे उन्होंने चांदनी को देख रोकते हुए पूछा। प्रणाम बुआजी.. बोलती हुई … Read more

बड़ी दादी – नीरजा कृष्णा

कल रात टीवी पर समाचार देखा कि पुणे में कोरोना के कहर से बचने के लिए सब बाज़ार वगैरह बंद कर दिए गए हैं, तभी से वो बहुत व्याकुल हैं….हाय हाय लल्ला जी उधर ही तो गए  हुए हैं अपने बेटा बहू के पास, कितनी परेशानी हो रही होगी….। फिर दूसरे ही क्षण उन्होंने मुँह … Read more

बहू जी भर कर खाना नहीं देती..….. – भाविनी केतन उपाध्याय 

‘क्या हुआ माँ ? ऐसे मुह बिगाड़ते हैं अपनी भोजन से? छुट्टियों में अपने मायके आई हुई काव्या ने अपनी मां रमा जी से कहा ‘ये भी कोई भोजन है? सब फीका फीका..!! ना नमक है ना मिर्ची..!! कोई स्वाद ही नहीं है ” रमा जी ने उदास होते हुए कहा। ‘माँ, अब इस उम्र … Read more

पर्यावरण और इंसान – आरती झा आद्या 

अवनी जब भी मौका मिलता, कॉलेज की दो चार दिन की छुट्टियों में भी रानीखेत भाग कर आ जाती है.. बहुत लगाव था इस जगह से उसे। उसकी रूम मेट्स भी हँसती कि जहाँ छुट्टियों में हम घर जाने को या नई नई जगह देखने के लिए बेताब रहते हैं… वही ये मैडम रानीखेत जाने … Read more

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